नरसिंहपुर में किसानों के खेतों पर पहुंचे कृषि वैज्ञानिक, अरहर की GRG-152 किस्म का प्रदर्शन; प्राकृतिक खेती के दिए टिप्स

21 अगस्त 2026, नरसिंहपुर: नरसिंहपुर में किसानों के खेतों पर पहुंचे कृषि वैज्ञानिक, अरहर की GRG-152 किस्म का प्रदर्शन; प्राकृतिक खेती के दिए टिप्स – प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को कम लागत में टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से नरसिंहपुर जिले में राष्ट्रीय मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (एन.एम.एन.एफ.) के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, नरसिंहपुर द्वारा खरीफ मौसम में चयनित कृषकों के खेतों में अरहर की उन्नत किस्म जी.आर.जी.-152 (भीमा) का प्रदर्शन कराया जा रहा है। फसल की प्रगति एवं प्राकृतिक खेती आधारित प्रबंधन की स्थिति जानने के लिए कृषि वैज्ञानिकों एवं फार्मर मास्टर ट्रेनर ने खेतों का निरीक्षण किया।

इस पहल के तहत चयनित कृषकों को कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा अरहर की उन्नत किस्म जी.आर.जी.-152 (भीमा) का बीज उपलब्ध कराया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को उन्नत बीज के साथ प्राकृतिक, कम लागत वाली और टिकाऊ कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना तथा स्थानीय परिस्थितियों में इन तकनीकों की उपयोगिता का आकलन करना है।

तीन विकासखंडों में खेतों तक पहुंचा वैज्ञानिक दल

निरीक्षण दल ने जिले के करेली, चावरपाठा और गोटेगांव विकासखंड में चयनित कृषकों के खेतों का भ्रमण किया। करेली विकासखंड के ग्राम बटेसरा में रविशंकर रजक, चावरपाठा विकासखंड के ग्राम दुधवारा में श्री कृष्ण कुमार वर्मा तथा गोटेगांव विकासखंड के ग्राम चिरचिटा में श्री कृष्ण पाल लोधी के खेतों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. विशाल मेश्राम, वैज्ञानिक डॉ. निधि प्रजापति एवं प्रगतिशील कृषक कार्यक्रम के फार्मर मास्टर ट्रेनर ने खेत में पहुंचकर फसल की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। वैज्ञानिकों ने पौधों की वृद्धि एवं विकास, खेत में नमी की स्थिति तथा कीट एवं रोगों की संभावित स्थिति का बारीकी से अवलोकन किया।

खेत पर ही किसानों को मिला समाधान और तकनीकी सलाह

निरीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने कृषकों से फसल की स्थिति एवं खेती में आ रही समस्याओं के संबंध में संवाद किया। किसानों को फसल की नियमित निगरानी, उचित नमी प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण तथा कीट एवं रोगों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान के संबंध में आवश्यक सलाह दी गई। वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों के अनुरूप स्थानीय एवं जैविक संसाधनों के अधिकतम उपयोग, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, कृषि लागत कम करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया। किसानों को समझाया गया कि फसल में किसी भी प्रकार की समस्या दिखाई देने पर उसका समय पर निदान जरूरी है, ताकि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

अरहर की उन्नत किस्म जी.आर.जी.-152 (भीमा) के प्रदर्शन को लेकर कृषकों में रुचि देखने को मिली। खेत निरीक्षण के दौरान किसानों ने फसल की वर्तमान स्थिति, उत्पादन क्षमता, प्राकृतिक खेती तथा कीट एवं रोग प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर वैज्ञानिकों से जानकारी प्राप्त की। वैज्ञानिकों ने बताया कि उन्नत किस्म के साथ अनुशंसित फसल प्रबंधन तकनीकों एवं प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों का समन्वय कर किसान उत्पादन, मृदा स्वास्थ्य और कृषि की स्थिरता में बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

प्राकृतिक खेती से कम लागत और स्वस्थ मृदा की ओर कदम

कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. विशाल मेश्राम ने कहा कि राष्ट्रीय मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों से जोड़ना, कृषि लागत को कम करना और मिट्टी एवं प्राकृतिक संसाधनों के स्वास्थ्य को बनाए रखते हुए टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि खेत स्तर पर वैज्ञानिकों का नियमित भ्रमण किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझने और उन्हें समय पर तकनीकी समाधान उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है। इससे किसानों का वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के प्रति विश्वास भी बढ़ता है।

वैज्ञानिक डॉ. निधि प्रजापति ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी, प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग एवं प्राकृतिक खेती की तकनीकों को व्यवहारिक रूप से अपनाने की जानकारी दी। उन्होंने कृषकों से स्वयं प्राकृतिक खेती अपनाने के साथ आसपास के अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

कृषकों ने वैज्ञानिक मार्गदर्शन को बताया उपयोगी

खेत भ्रमण के दौरान चयनित कृषकों ने अरहर की फसल के बेहतर प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा उत्पादन बढ़ाने से संबंधित जानकारी प्राप्त की। किसानों ने कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे बीज, तकनीकी सलाह एवं खेत स्तर पर मार्गदर्शन को उपयोगी बताते हुए संतोष व्यक्त किया। कृषि विज्ञान केंद्र नरसिंहपुर द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के अंतर्गत चयनित कृषकों के खेतों का नियमित निरीक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन आगे भी जारी रहेगा। इस पहल के माध्यम से प्राकृतिक खेती आधारित कृषि प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ जिले के अन्य किसानों को भी कम लागत, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

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