सस्ते होंगे फोन? मोबाइल पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% करने की मांग, कंपनियों ने सरकार के सामने रखी ये बात
Sep 14, 2026 06:37 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली

मुख्य बातें
- ICEA ने सरकार से स्मार्टफोन पर GST को 18% से घटाकर 5% करने की मांग की है
- संगठन के मुताबिक मेमोरी चिप की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण एंट्री-लेवल फोन 35-45% तक महंगे हुए हैं
- GST कटौती से कंपनियों को उम्मीद है कि मोबाइल की कीमतें कम होंगी, घरेलू डिमांड बढ़ेगी और ज्यादा लोग स्मार्टफोन खरीद सकेंगे

ICEA ने सरकार से की स्मार्टफोन पर GST को 18% से घटाकर 5% करने की मांग।
भारत में मोबाइल फोन की बढ़ती कीमतों ने कंपनियों के साथ-साथ ग्राहकों की चिंता भी बढ़ा दी है। यही वजह है कि स्मार्टफोन कंपनियों के संगठन इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने सरकार से मोबाइल फोन पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% करने की मांग की है। संगठन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र भेजकर इस प्रस्ताव को अपकमिंग GST काउंसिल की बैठक में रखने की अपील की है। ICEA में Apple, Xiaomi, Oppo, Vivo, Dixon, Lava और Bhagwati जैसी घरेलू और ग्लोबल कंपनियां शामिल हैं। संगठन का कहना है कि मौजूदा टैक्स और बढ़ती लागत के कारण खासतौर पर सस्ते स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों पर ज्यादा बोझ पड़ रहा है।
मोबाइल फोन महंगे होने की एक बड़ी वजह मेमोरी चिप की कीमतों में तेज बढ़ोतरी बताई जा रही है। ICEA के मुताबिक सितंबर 2025 के बाद मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाली DRAM और NAND फ्लैश मेमोरी की कीमत करीब चार गुना बढ़ चुकी हैं। दुनियाभर में AI डेटा सेंटर के लिए मेमोरी की मांग बढ़ने से उपलब्ध क्षमता पर दबाव बढ़ा है। इसका असर भारत में भी दिखाई दे रहा है। संगठन के अनुसार पिछले एक साल में एंट्री-लेवल स्मार्टफोन की कीमतों में अलग-अलग ब्रांड्स के स्तर पर करीब 35 से 45% तक बढ़ोतरी हुई है। वहीं, ₹10,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की उपलब्धता भी घटकर 5% से नीचे रह गई है।
ICEA का तर्क है कि कंपनियां मेमोरी की बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ खुद नहीं उठा सकतीं और इसका कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचता है। ऐसे में 18% GST कीमत को और बढ़ा देता है। संगठन का मानना है कि GST को 5% करने से फोन की शुरुआती कीमत कम हो सकती है, जिससे पहली बार स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहक, ग्रामीण उपभोक्ता और कम आय वाले परिवारों को राहत मिलेगी। इससे फीचर फोन और 2G इस्तेमाल करने वाले लोगों के स्मार्टफोन की ओर बढ़ने की रफ्तार भी बढ़ सकती है।
दिलचस्प बात यह है कि GST लागू होने के समय जुलाई 2017 में मोबाइल फोन को 12% टैक्स स्लैब में रखा गया था। अप्रैल 2020 में इसे बढ़ाकर 18% कर दिया गया। ICEA अब इसे वापस कम करने की मांग कर रहा है। संगठन ने यह भी कहा है कि GST घटने से सरकार के राजस्व में जितनी कमी दिखती है, उसकी भरपाई अधिक बिक्री, औपचारिक बाजार के विस्तार और मोबाइल डेटा, सब्सक्रिप्शन तथा डिजिटल सेवाओं से मिलने वाले GST से कुछ हद तक हो सकती है।
भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार तेजी से हुआ है। ICEA के अनुसार देश में मोबाइल उत्पादन FY2014-15 के ₹18,900 करोड़ से बढ़कर FY2025-26 में ₹6.27 लाख करोड़ हो गया। इसी अवधि में मोबाइल फोन का निर्यात ₹1,566 करोड़ से बढ़कर ₹2.60 लाख करोड़ पहुंच गया। भारत अब मात्रा के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है। हालांकि, कंपनियों का कहना है कि उत्पादन और निर्यात बढ़ने के बावजूद घरेलू मांग पर दबाव है। ऐसे में GST में कटौती से कंपनियों को उम्मीद है कि स्मार्टफोन की कीमतें नियंत्रित होंगी, बिक्री को बढ़ावा मिलेगा और देश में मोबाइल इंडस्ट्री का घरेलू बाजार और मजबूत होगा।