GST Section 74 पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सिर्फ ‘धोखाधड़ी’ लिखने से नहीं चलेगा काम, नोटिस में देने होंगे ठोस तथ्य

CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने GST Section 74 मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी कारोबारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए शो-कॉज नोटिस (Show Cause Notice) में केवल ‘धोखाधड़ी’, ‘जानबूझकर गलत बयान’ या ‘तथ्य छिपाने’ जैसे कानूनी शब्द लिख देना पर्याप्त नहीं है। विभाग को यह भी बताना होगा कि इन आरोपों का आधार क्या है और किन ठोस तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया है।

श्री हनुमंत स्टील ट्रेडर्स मामले में फैसला

यह मामला श्री हनुमंत स्टील ट्रेडर्स एवं अन्य बनाम राज्य GST प्राधिकरण से जुड़ा है। हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने 9 सितंबर 2026 को WPT Nos. 11, 12 और 15 of 2026 पर सुनवाई की। कोर्ट ने 16 अक्टूबर 2025 को जारी GST Act की धारा 74(9) के तहत संबंधित नोटिसों को निरस्त कर दिया। अदालत ने माना कि विस्तारित अवधि में कार्रवाई के लिए नोटिस में आरोपों से जुड़े जरूरी तथ्य स्पष्ट होना आवश्यक है।

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नोटिस में ‘Application of Mind’ जरूरी

कोर्ट ने कहा कि GST Section 74 के तहत कार्रवाई करते समय संबंधित प्राधिकरण की ओर से ‘एप्लीकेशन ऑफ माइंड’ (Application of Mind) दिखाई देना चाहिए।

यानी नोटिस केवल कानूनी शब्दावली की पुनरावृत्ति नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें यह स्पष्ट होना चाहिए कि विभाग किन परिस्थितियों और तथ्यों के आधार पर धोखाधड़ी, गलत बयान या तथ्य छिपाने का निष्कर्ष निकाल रहा है। अस्पष्ट नोटिस को पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।

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विभाग दोबारा जारी कर सकता है नोटिस

हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने संबंधित नोटिसों को निरस्त किया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि विभाग आगे कोई कार्रवाई नहीं कर सकता। अदालत ने कानून के अनुसार जरूरी तथ्यों और उचित आधार के साथ नए नोटिस जारी करने की स्वतंत्रता दी है। ऐसे में मामले में विभाग के पास कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने का रास्ता खुला हुआ है।

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कारोबारियों के लिए क्या है इसका मतलब?

इस फैसले से GST Section 74 की कार्रवाई में नोटिस की भाषा और उसमें दिए गए तथ्यों के महत्व पर जोर सामने आता है। सरल शब्दों में, किसी करदाता पर सिर्फ ‘फ्रॉड’ या ‘तथ्य छिपाने’ का आरोप लगाना पर्याप्त नहीं होगा।

नोटिस में यह भी बताना होगा कि ऐसा आरोप किन परिस्थितियों और सबूतों या तथ्यों पर आधारित है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के Tata Steels Ltd. बनाम Union of India मामले में स्थापित सिद्धांत का भी संदर्भ दिया।

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