Hartalika Teej Puja Date : दूर हुआ तारीखों का फेर, जानिए हरतालिका तीज व्रत पर पूजा का सबसे सटीक समय

भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाया जाने वाला हरतालिका तीज का पावन पर्व इस बार 14 सितंबर को रखा जाएगा। अखंड सौभाग्य की कामना से जुड़े इस कठिन निर्जला व्रत के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और जरूरी नियमों की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

Hartalika Teej Puja Date : सुहाग की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए रखा जाने वाला हरतालिका तीज का व्रत महिलाओं के लिए बहुत खास होता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को पड़ने वाले इस व्रत को लेकर इस बार तारीखों का थोड़ा संशय बना हुआ है। कुछ लोग 13 सितंबर तो कुछ 14 सितंबर की बात कर रहे हैं।

शास्त्रों में उदया तिथि यानी सूर्योदय के समय मौजूद तिथि को प्राथमिकता दी जाती है। पंचांग के हिसाब से तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि की मान्यता के चलते हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर, सोमवार को ही रखा जाएगा।

पूजा का शुभ समय क्या रहेगा?

हरतालिका तीज पर सुबह के समय की जाने वाली पूजा सबसे फलदायी मानी जाती है। 14 सितंबर को पूजा का शुभ प्रातःकालीन मुहूर्त सुबह 6 बजकर 05 मिनट से 7 बजकर 06 मिनट तक रहेगा।

अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के समय में थोड़ा अंतर होता है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में कुछ मिनटों का फेरबदल हो सकता है। यदि आप सुबह पूजा न कर पाएं, तो प्रदोष काल यानी शाम के समय भी भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जा सकती है।

इस बार बना गणेश चतुर्थी का संयोग

इस वर्ष पंचांग का एक और सुंदर संयोग देखने को मिल रहा है। 14 सितंबर को ही गणेश चतुर्थी का पर्व भी मनाया जाएगा। एक ही दिन हरतालिका तीज और भगवान गणेश के आगमन का दिन पड़ने से इस तारीख का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।

दोनों पर्वों के पूजन विधान और समय अलग-अलग हैं, इसलिए घर में दोनों अनुष्ठान आसानी से संपन्न किए जा सकते हैं।

मिट्टी के शिवलिंग और पूजा की विधि

  • हरतालिका तीज पर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा का विधान है।
  • कई घरों में महिलाएं शुद्ध काली मिट्टी या बालू से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमाएं अपने हाथ से बनाती हैं।
  • चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर इन प्रतिमाओं को स्थापित किया जाता है।
  • भगवान शिव को प्रिय बेलपत्र, धतूरा, मदार के फूल और गंगाजल अर्पित करें।
  • माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री—जैसे सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेंहदी और चुनरी चढ़ाएं।
  • शाम के समय धूप-दीप जलाकर हरतालिका तीज की पावन व्रत कथा सुनें और आरती के साथ पूजा पूरी करें।

व्रत का महत्व और जुड़ी मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। जब उनके पिता उनका विवाह कहीं और तय करना चाहते थे, तब उनकी सखियां उन्हें हरण करके यानी गुप्त रूप से घने वन में ले गईं।

संस्कृत में ‘हरत’ का अर्थ हरण और ‘आलिका’ का अर्थ सखी होता है, इसी वजह से इस पावन पर्व का नाम हरतालिका पड़ा। वन में रहकर माता पार्वती ने रेत का शिवलिंग बनाकर कठिन तप किया, जिससे प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।

यही कारण है कि सुहागिनें अपने दांपत्य की रक्षा और कुंवारी कन्याएं सुयोग्य जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं।

कठिन व्रत और सेहत का संतुलन

हरतालिका तीज का व्रत पारंपरिक रूप से निर्जला रखा जाता है, यानी पूरे दिन अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। यह काफी कठिन नियमों वाला व्रत है।

यदि आप गर्भवती हैं, स्तनपान करा रही हैं या किसी पुरानी बीमारी (जैसे डायबिटीज या ब्लड प्रेशर) से जूझ रही हैं, तो शरीर पर ज्यादा दबाव न डालें।

ऐसे मामलों में फलाहार या पानी का सेवन करके भी मानसिक संकल्प के साथ पूजा की जा सकती है। व्रत में अपनी सेहत और सामर्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।