हरियाणा के शिक्षकों के लिए HTET पास करना हुआ अनिवार्य: नौकरी जाने का खतरा या लेना होगा VRS,शिक्षक संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी - Haribhoomi
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हरियाणा स्कूल शिक्षा निदेशालय का सख्त रुख। बिना HTET पढ़ा रहे शिक्षकों की बढ़ी मुश्किलें, भिवानी बोर्ड अब साल में 2 बार कराएगा परीक्षा। शिक्षक संघ ने फैसले का विरोध कर कोर्ट जाने की दी चेतावनी।
हरियाणा में पढ़ा रहे पुराने शिक्षकों के लिए HTET पास करना अनिवार्य किया गया।
- Published: 14 Sep 2026, 06:30 PM IST
- Last Updated: 14 Sep 2026, 06:30 PM IST
हरियाणा के सरकारी विद्यालयों में बिना हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा (HTET) पास किए सेवाएं दे रहे अध्यापकों के लिए बेहद बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है।
विद्यालय शिक्षा निदेशालय, हरियाणा ने उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के सख्त निर्देशों का पालन करते हुए एक नया आदेश जारी किया है। इसके तहत अब सभी कार्यरत शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा पास करना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। नियम न मानने या परीक्षा में असफल रहने वाले अध्यापकों को अपनी सेवा से हाथ धोना पड़ सकता है।
5 साल से अधिक सेवा वाले शिक्षकों पर सीधी गाज
विभाग की ओर से जारी नए दिशानिर्देशों के अनुसार जिन अध्यापकों की सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) में 1 सितंबर 2025 तक 5 वर्ष से अधिक का समय बचा हुआ है और उन्होंने अभी तक अपने विषय में HTET क्वालीफाई नहीं किया है, उन्हें यह परीक्षा हर हाल में पास करनी होगी। ऐसा करने में असफल रहने पर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) दे दी जाएगी या नौकरी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ेगा।
5 साल से कम सेवा वालों को राहत, पर प्रमोशन पर रोक
जिन शिक्षकों की सेवा अवधि 1 सितंबर 2025 तक 5 साल से कम बची है, वे बिना पात्रता परीक्षा पास किए भी अपनी सेवानिवृत्ति की आयु तक नौकरी पर बने रह सकते हैं। हालांकि, यदि वे भविष्य में किसी भी प्रकार का पदोन्नति (Promotion) लाभ चाहते हैं, तो उन्हें अपने संबंधित विषय का HTET परीक्षा पास करना ही पड़ेगा, वर्ना वे प्रमोशन के हकदार नहीं होंगे।
भिवानी बोर्ड साल में दो बार कराएगा HTET
अध्यापकों को परीक्षा क्लियर करने का भरपूर अवसर प्रदान करने के लिए हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (BSEH), भिवानी को साल में दो बार HTET का आयोजन करने का निर्देश जारी किया गया है। शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा सिविल अपील संख्या 1385/2025 और मई 2026 की समीक्षा याचिका में सुनाए गए फैसलों के अनुपालन में उठाया गया है। प्रदेश के सभी DEOs और DEEOs को अपने जिलों के अध्यापकों तक यह फरमान तुरंत पहुंचाने के आदेश दिए गए हैं।
12 हजार शिक्षक होंगे प्रभावित
इस फरमान का राज्य भर में विरोध शुरू हो गया है। हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष हरिओम राठी ने इस निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि इससे राज्य के 12 हजार से भी अधिक अध्यापकों का भविष्य प्रभावित होगा। संगठन का कहना है कि वे सबसे पहले इस विषय में शिक्षा निदेशक से सीधी वार्ता करेंगे। यदि समाधान नहीं निकला तो शिक्षक इसके खिलाफ सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे और कानूनी न्याय के लिए अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे।