Hunkkaar: एक्टिंग में वजन, फिर भी बिखर गया असर, अगर इन 5 बातों पर संभल जाती सीरीज तो मच जाता भौकाल
ओटीटी की दुनिया में जब भी सत्ता, बगावत, विरासत की जंग और जमीनी सियासत की कहानी आती है, तो दर्शकों की उम्मीदें सातवें आसमान पर पहुंच जाती हैं. इसी उम्मीद के साथ रिलीज हुई नई वेब सीरीज ‘हुंकार’. अपने नाम के मुताबिक ही सीरीज का मिजाज बागी है, धूल-धक्कड़ से भरा देहाती बैकड्रॉप है और डायलॉग्स में वही खुरदुरापन है जो इस तरह के क्राइम जॉनर की जान होता है. कलाकारों ने भी अपने किरदारों में जान फूंकने में कोई कसर नहीं छोड़ी. लेकिन जब पूरी सीरीज खत्म होती है, तो दिल में एक खालीपन सा रह जाता है.
ऐसा लगता है कि जैसे एक बहुत बेहतरीन दावत तो सजी थी, लेकिन उसमें कुछ जरूरी मसालों का स्वाद हल्का रह गया. ‘हुंकार’ एक बेहद असरदार और कल्ट सीरीज बन सकती थी, लेकिन यह उस मुकाम से चंद कदम पहले ही ठिठक कर रह गई. अगर इन 5 कमजोरियों पर काम किया गया होता, तो ‘हुंकार’ की गूंज ओटीटी पर सालों तक सुनाई देती,
1. एपिसोड्स की बेवजह की लंबाई और खिंचाव
सीरीज की सबसे बड़ी कमजोरी है इसकी पेसिंग. कई एपिसोड्स बहुत ज्यादा खिंचे हुए हैं, जबकि उनमें उतनी कहानी थी ही नहीं. कई लंबे-लंबे सीन्स ऐसे हैं जो प्लॉट को एक इंच भी आगे नहीं बढ़ाते, बल्कि सिर्फ माहौल बनाने के नाम पर कैमरा घुमाते रहते हैं. आज का ओटीटी दर्शक बहुत तेज रफ्तार और कसावट की मांग करता है. अगर 8-9 एपिसोड्स के इस ड्रामे को चुस्त एडिटिंग के साथ 6 या 7 टाइट एपिसोड्स में समेट दिया जाता, तो हर एपिसोड का सस्पेंस दर्शकों को अगला एपिसोड देखने पर मजबूर कर देता.
2. किरदारों की भरमार और बिखरा हुआ फोकस
‘हुंकार’ में मेकर्स ने एक साथ इतने सारे किरदारों और उनके परिवारों की कहानियां खोल दी हैं कि दर्शक कई बार उलझ कर रह जाता है कि आखिर वो किसके सफर से जुड़े. हर किरदार को अहमियत देने के चक्कर में मुख्य एक्टर और विलेन के बीच का जो सीधा टकराव होना चाहिए था, वो धुंधला पड़ गया. जब किरदारों की एक बड़ी टीम स्क्रीन पर आ जाती है, तो किसी एक के प्रति भी गहरी सहानुभूति या नफरत पैदा नहीं हो पाती. अगर फोकस सिर्फ 3-4 मजबूत चेहरों के टकराव पर रखा जाता, तो ड्रामा कहीं ज्यादा तीखा होता.
The Vvan और भी ज्यादा असरदार हो जाती, अगर इन 5 बड़ी कमजोरियों पर मेकर्स ने किया होता काम!
3. घिसे-पिटे फॉर्मूले और प्रिडिक्टेबल ट्विस्ट्स
देसी सियासत और रंजिश पर आधारित सीरीज का एक तय फॉर्मूला बन चुका है. एक गद्दार दोस्त, एक चालाक राजनेता, अचानक होने वाला मर्डर और फिर बदले की आग. ‘हुंकार’ भी कई मोर्चों पर इसी घिसे-पिटे रास्ते पर चलती नजर आती है. कई अहम मोड़ों पर दर्शक पहले ही भांप लेता है कि अब कौन सा किरदार किसको धोखा देने वाला है. ओटीटी के इस परिपक्व दौर में अगर राइटिंग टेबल पर कुछ नए, अनपेक्षित और माइंड-बेंडिंग ट्विस्ट्स गढ़े जाते, तो सीरीज का रोमांच कई गुना बढ़ जाता.
4. महिला किरदारों को हाशिए पर धकेलना
सीरीज का बैकड्रॉप कितना भी पितृसत्तात्मक क्यों न हो, लेकिन बेहतरीन क्राइम ड्रामा वही होता है जहां महिला किरदार सिर्फ रोने-धोने या बैकग्राउंड में चाय का गिलास पकड़ाने के लिए न हों. ‘हुंकार’ में महिला किरदारों को शुरुआत में बहुत मजबूत और असरदार दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ी, वे पूरी तरह पुरुषों की बंदूकों और राजनीतिक चालों के पीछे दबी हुई नजर आईं. अगर इन किरदारों को सियासत के खेल में अपनी स्वतंत्र चालें चलने की जगह दी जाती, तो कहानी में लेयर्स और गहराई दोनों बढ़ जातीं.
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5. एंटी-क्लाइमैक्स और अधूरे धागों की हड़बड़ी
सीरीज का आखिरी एपिसोड अगले सीजन की नींव रखने की इतनी जल्दबाजी में दिखता है कि वो मौजूदा सीजन के कई बड़े सवालों को बिना किसी ठोस जवाब के बीच में ही छोड़ देता है. कई सब-प्लॉट्स जो इतने एपिसोड्स से बड़े ध्यान से बुने गए थे, उन्हें अचानक एक झटके में बिना किसी लॉजिकल अंत के गायब कर दिया गया. किसी भी सीरीज का फिनाले ऐसा होना चाहिए जो दर्शक को तृप्त भी करे और अगले सीजन का इंतजार भी कराए. यहां हड़बड़ी में खत्म किया गया फिनाले उस पूरे बिल्ड-अप के असर को फीका कर देता है.

सोनाली नाईक
सोनाली करीब 15 सालों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रहार न्यूज पेपर से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी. इस न्यूज पेपर में बतौर रिपोर्टर काम करते हुए सोनाली ने एंटरटेनमेंट बीट के साथ-साथ सीसीडी (कॉलेज कैंपस और ड्रीम्स) जैसे नए पेज पर काम किया. उन्होंने वहां 'फैशनेरिया' नाम का कॉलम भी लिखा. इस दौरान एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की, लेकिन पत्रकारिता के जुनून की वजह से इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के इरादे से 2017 में टीवी9 से सीनियर कोरेस्पोंडेंट के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की. टीवी9 गुजराती चैनल में 3 साल तक एंटरटेनमेंट शो की जिम्मेदारी संभालने के बाद सोनाली 2020 में टीवी9 हिंदी डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम में शामिल हुईं. सोनाली ने टीवी9 के इस सफर में कई ब्रेकिंग, एक्सक्लूसिव न्यूज और ऑन ग्राउंड कवरेज पर काम किया है. हिंदी के साथ-साथ गुजराती, मराठी, इंग्लिश भाषा की जानकारी होने के कारण डिजिटल के साथ-साथ तीनों चैनल के लिए भी उनका योगदान रहा है. रियलिटी शोज और ग्लोबल कंटेंट देखना सोनाली को पसंद है. नई भाषाएं सीखना पसंद है. संस्कृत भाषा के प्रति खास प्यार है. नुक्कड़ नाटक के लिए स्क्रिप्ट लिखना पसंद है. सोनाली के लिखे हुए स्ट्रीट प्लेज 'पानी', 'मेड इन चाइना' की रीडिंग 'आल इंडिया रेडियो' पर सोशल अवेयरनेस के तौर पर की जा चुकी है.
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