अब गाड़ी में कभी नहीं सोएगा ड्राइवर, अगर कार में लगी है 'इंटेलीसीट'; IIT मद्रास ने बनाई स्मार्ट ड्राइवर सीट - iit madras developed smart driver seat intelliseat to awake driver and prevent accident
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। रात के सफर में आंखों पर नींद हावी हो जाए और ड्राइवर को पता भी न चले, तो एक छोटी-सी झपकी जानलेवा हादसे में बदल सकती है।
खासकर लंबी दूरी के ट्रक और बस चालकों के लिए यह जोखिम ज्यादा रहता है। इसी खतरे को कम करने के लिए आइआइटी मद्रास के विज्ञानियों ने ऐसी स्मार्ट ड्राइवर सीट विकसित की है, जो ड्राइवर के शरीर में थकान के संकेत महसूस कर समय रहते उसे जगा सकती है। ‘इंटेलीसीट’ नाम की यह सीट जरूरत पड़ने पर फ्लीट मालिक को भी अलर्ट करेगी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आइआइटी मद्रास के रीहैबिलिटेशन बायोइंजीनियरिंग ग्रुप ने प्रोफेसर वेंकटेश बालासुब्रमण्यम के नेतृत्व में वाहन सीट निर्माता कंपनी हरिता के साथ मिलकर इसे विकसित किया है।
देखने में यह सामान्य ड्राइवर सीट जैसी ही है, लेकिन इसके भीतर लगे सेंसर ड्राइवर की मौजूदगी, बैठने की स्थिति और शरीर की हल्की-सी हलचल तक को पकड़ते हैं।
शरीर की हलचल से पकड़ेगी थकानड्राइवर के थकने पर उसका शरीर धीरे-धीरे ढीला पड़ने लगता है और सीट पर उसका वजन डालने का तरीका बदल जाता है। इंटेलीसीट इसी बदलाव को पहचानती है।
विज्ञानियों के मुताबिक, लंबे समय तक ड्राइविंग में पीठ और कंधों की मांसपेशियों में थकान बढ़ती है, जिसका असर ड्राइवर की बैठने की मुद्रा पर भी पड़ता है।
विज्ञानियों ने मांसपेशियों की गतिविधि को समझने के लिए ‘सरफेस इलेक्ट्रोमायोग्राफी’ (एसईएमजी) जैसी तकनीक का भी इस्तेमाल किया है। इससे मांसपेशियों में पैदा होने वाले बेहद हल्के इलेक्ट्रिकल सिग्नल को पढ़कर थकान के स्तर का अनुमान लगाने में मदद मिलती है।
खतरा बढ़ने के साथ तेज होता जाएगा अलर्ट
सीट तुरंत तेज अलार्म नहीं बजाती। थकान कम होने पर डैशबोर्ड पर चेतावनी लाइट जलती है। थकान बढ़ने पर आवाज के जरिए ड्राइवर को सतर्क किया जाता है।
स्थिति गंभीर होने पर सीट में कंपन शुरू हो जाता है, ताकि ड्राइवर को शारीरिक रूप से भी चेतावनी महसूस हो।सबसे गंभीर स्थिति में इससे जुड़े मोबाइल एप के जरिये वाहन या फ्लीट मालिक को भी सूचना मिल सकती है। इससे वह ड्राइवर को वाहन रोककर आराम करने के लिए कह सकता है।
इंटेलीसीट को अलग-अलग वाहनों में लगाया जा सकता है और इसके लिए वाहन के मुख्य कंप्यूटर सिस्टम में बदलाव की जरूरत नहीं पड़ती।
वाहन स्टार्ट होते ही सीट के सेंसर सक्रिय हो जाते हैं। सीट से मिलने वाला डाटा फ्लीट संचालकों को ड्राइविंग पैटर्न और जोखिम वाले मार्गों को समझने में भी मदद कर सकता है।
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