Independence Day 2026: लाल किले की प्राचीर से अब तक सबसे लंबे और सबसे छोटे भाषण किस PM ने दिए?
Independence Day 2026: भारत की आजादी के बाद से हर साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हैं. इस दौरान सबसे लंबे और सबसे छोटे भाषण के कई दिलचस्प रिकॉर्ड बने हैं.
Independence Day 2026: भारत की आजादी के बाद से हर साल 15 अगस्त को प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हैं. इस दौरान सबसे लंबे और सबसे छोटे भाषण के कई दिलचस्प रिकॉर्ड बने हैं.
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Independence Day 2026: आजादी के बाद से ही 15 अगस्त का दिन हर भारतीय के लिए बेहद खास और गर्व से भरा होता है. देश के आजाद होते ही भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से पहली बार तिरंगा झंडा फहराया था. इसके बाद से ही यह एक अटूट परंपरा बन गई. हर साल स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से झंडा फहराते आ रहे हैं. अब तक लाल किले की प्राचीर से देश के अलग-अलग प्रधानमंत्रियों ने कुल 79 बार तिरंगा फहराया है. ध्वजारोहण की इस गरिमामयी प्रक्रिया के तुरंत बाद प्रधानमंत्री पूरे देश और दुनिया के नाम अपना विशेष संबोधन देते हैं. साल 1947 में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने पहली बार राष्ट्र को संबोधित किया था.
हर प्रधानमंत्री का अपना अनोखा अंदाज
समय के साथ लाल किले से भाषण देने के तरीके में भी बड़ा बदलाव आया है. हर प्रधानमंत्री का जनता से बात करने और अपनी बात रखने का एक अलग अंदाज रहा है. देश के ज्यादातर पूर्व प्रधानमंत्री लिखित भाषण पढ़ना पसंद करते थे और वे कागज पर लिखे शब्दों को ही दोहराते थे. हालांकि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तरीका इससे बिल्कुल अलग है. वे लाल किले की प्राचीर से बिना कागज के यानी बिना लिखा भाषण दिए धाराप्रवाह बोलते हैं. इसी के साथ लाल किले से सबसे लंबा भाषण देने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ही दर्ज है.
सबसे लंबे भाषण देने का अनूठा रिकॉर्ड
अगर बात सबसे लंबे भाषण की करें तो इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे आगे हैं. उन्होंने लाल किले से 98 मिनट तक भाषण देकर अपना ही पुराना रिकॉर्ड तोड़ा था. इससे पहले साल 2016 में उन्होंने 96 मिनट का भाषण दिया था. पीएम मोदी अब तक लाल किले से कई बार देश को संबोधित कर चुके हैं और उनका औसतन भाषण समय लगभग 82 मिनट रहता है. पीएम मोदी से पहले यह रिकॉर्ड पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम था, जिन्होंने साल 1947 में 72 मिनट का भाषण दिया था. इसके अलावा साल 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने भी 71 मिनट तक देश को संबोधित किया था.
नेहरू और इंदिरा के नाम सबसे छोटा भाषण
दूसरी तरफ अगर लाल किले से सबसे छोटे भाषण की बात करें तो इसमें देश के दो सबसे बड़े नेताओं का नाम सामने आता है. लाल किले से सबसे छोटा भाषण देने का रिकॉर्ड संयुक्त रूप से पंडित जवाहरलाल नेहरू और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम दर्ज है. इन दोनों ही दिग्गज नेताओं ने केवल 14-14 मिनट का भाषण दिया था. सबसे पहले साल 1954 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने केवल 14 मिनट में अपना संबोधन समाप्त कर दिया था. इसके बाद साल 1966 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी महज 14 मिनट में ही अपनी बात पूरी की थी. यह लाल किले के इतिहास का सबसे संक्षिप्त भाषण माना जाता है.
अटल और मनमोहन के छोटे संबोधन
सबसे छोटे भाषणों की सूची में केवल नेहरू और इंदिरा गांधी ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य प्रधानमंत्रियों के नाम भी शामिल हैं. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह ने भी कई बार बहुत संक्षेप में अपनी बात रखी थी. साल 2002 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने केवल 25 मिनट का भाषण दिया था, जबकि इसके अगले साल 2003 में उनका भाषण मात्र 30 मिनट का था. इसी तरह पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भी साल 2012 में 32 मिनट और साल 2013 में केवल 35 मिनट तक ही अपना भाषण दिया था.
लाल किले की प्राचीर से देश का संदेश
लाल किले से दिया जाने वाला यह भाषण केवल एक औपचारिकता नहीं होता, बल्कि यह देश की दिशा और दशा तय करने वाला संदेश होता है. जहां कुछ प्रधानमंत्रियों ने बहुत ही कम शब्दों में अपनी बात देश के सामने रखी, वहीं कुछ नेताओं ने सरकार की सभी नीतियों और योजनाओं को बहुत गहराई से जनता को समझाया. आज भी हर साल 15 अगस्त को पूरा देश यह जानने के लिए उत्सुक रहता है कि देश के प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से कौन सी नई घोषणाएं करने वाले हैं.
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