दिल्ली-मुंबई से चेन्नई-कोलकाता तक 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को मंजूरी, मोदी कैबिनेट का फैसला
Railway Mega Plan: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार (9 सितंबर) को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई. बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि केंद्र सरकार ने देश के सात अहम रेल कॉरिडोर पर फोर लेन बनाने की मंजूरी दे दी है. इनमें कोलकाता-दिल्ली, चेन्नई-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई और बिलासपुर-कटनी जैसे प्रमुख रेलवे रूट शामिल हैं.
11000 किलोमीटर लंबे हैं 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश के 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर करीब 11,000 किलोमीटर लंबे हैं और इन पर रेलवे के लगभग 40 प्रतिशत ट्रैफिक का दबाव रहता है. इन कॉरिडोर में 4-लाइनिंग और क्षमता बढ़ाने का काम किया जा रहा है.
अश्विनी वैष्णव बोले- 2000 किलोमीटर पहले ही हो चुका है फोर लेन
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इन हाई-डेंसिटी कॉरिडोर में करीब 2,000 किलोमीटर रेल मार्ग पहले ही 4 लेन वाला हो चुका है. इसके अलावा करीब 5,000 किलोमीटर हिस्से पर काम चल रहा है या इसके लिए मंजूरी दी जा चुकी है. बाकी करीब 4,000 किलोमीटर रेल रूट के लिए अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है. इस तरह रेलवे इन व्यस्त कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने के लिए अलग-अलग चरणों में काम कर रहा है.
5 राज्यों में बढ़ेगा रेल नेटवर्क
केंद्र सरकार ने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए पांच बड़े मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक ये परियोजनाएं तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों को कवर करेंगी. इन प्रोजेक्ट पर कुल 10,021 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इन्हें 2029-30 तक पूरा करने की योजना है.
रेलवे नेटवर्क में जुड़ेंगे करीब 540 किलोमीटर
इन पांच परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में करीब 540 किलोमीटर की अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी. मल्टीट्रैकिंग के जरिए व्यस्त रेल मार्गों पर अतिरिक्त लाइनें तैयार की जाएंगी, जिससे रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी.
इन 5 रेलवे परियोजनाओं को मिली मंजूरी
- अरक्कोनम-रेनिगुंटा: इस रूट पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी. प्रोजेक्ट की लंबाई 77 किलोमीटर है.
- व्हाइटफील्ड-बंगारपेट: यहां भी तीसरी और चौथी लाइन बनाई जाएगी. यह प्रोजेक्ट 47 किलोमीटर लंबा होगा.
- होसुर-ओमलूर: इस रेल मार्ग का दोहरीकरण किया जाएगा. इसकी कुल लंबाई 147 किलोमीटर है.
- सेलम-करूर-दिंडीगुल: इस रूट पर भी डबल रेल लाइन तैयार की जाएगी. प्रोजेक्ट की लंबाई 159 किलोमीटर है.
- सिकंदराबाद (घटकेसर)-काजीपेट: इस 110 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर अतिरिक्त लाइनें बिछाकर ट्रैक की क्षमता बढ़ाई जाएगी.
17 जिलों और 2,121 गांवों को मिलेगा फायदा
सरकार के मुताबिक इन परियोजनाओं से चार राज्यों के 17 जिलों में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी. इन परियोजनाओं का फायदा करीब 2,121 गांवों को मिलने की उम्मीद है, जहां लगभग 52 लाख लोग रहते हैं.
माल ढुलाई की क्षमता में होगा बड़ा इजाफा
रेलवे की इन क्षमता विस्तार परियोजनाओं से माल ढुलाई की क्षमता में भी बढ़ोतरी होगी. इन प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद करीब 47 MTPA यानी सालाना 47 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता जुड़ सकती है.
2029-30 तक पूरा करने की योजना
इन सभी परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा और सरकार ने इनके लिए 2029-30 तक का लक्ष्य रखा है. मल्टीट्रैकिंग के जरिए रेलवे का फोकस व्यस्त रूटों पर क्षमता बढ़ाने और रेल संचालन को बेहतर बनाने पर रहेगा.