दलाई लामा से अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की मुलाकात आखिरी वक्त पर क्यों टली? Inside Story
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की लद्दाख की पहली यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू वह बैठक रही जो कभी हो ही नहीं सकी. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की इस यात्रा के दौरान लेह में ही मौजूद तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के साथ एक मुलाकात तय मानी जा रही थी. लेकिन गोर का विमान लेह उतरने से ठीक कुछ घंटे पहले यह बैठक रद्द कर दी गई.
सेंट्रल तिब्बती एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) ने मीडिया को बताया कि राजदूत गोर के पहुंचने से एक रात पहले कार्यक्रम में बदलाव किया गया था. हालांकि, किसी भी पक्ष ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह बैठक क्यों रद्द हुई. कूटनीति की दुनिया में ऐसी खामोशी किसी आधिकारिक बयान से भी ज्यादा बयां कर देती है.
इस बैठक के रद्द होने की वजह समझना मुश्किल नहीं है. लद्दाख भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थित एक बेहद संवेदनशील इलाका है, जिसके पश्चिम में पाकिस्तान के कब्जे वाला इलाका है और पूर्व में चीन के नियंत्रण वाला अक्साई चिन.
2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में लंबे समय तक तनाव रहा. ऐसे में 2020 के बाद किसी मौजूदा अमेरिकी राजदूत की लद्दाख की यह पहली यात्रा थी.
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दलाई लामा को चीन अपने शासन के लिए अलगाववादी खतरे के तौर पर देखता है. ऐसे में अमेरिकी राजदूत की लद्दाख की जमीन पर दलाई लामा से मुलाकात बीजिंग के लिए एक संवेदनशील संदेश के तौर पर देखी जा सकती थी. खासकर तब, जब अगले महीने भारत में BRICS शिखर सम्मेलन होने वाला है.
कश्मीर बयान के बाद पाकिस्तान ने जताई थी नाराजगी
गोर की लद्दाख यात्रा से ठीक एक दिन पहले उन्होंने श्रीनगर में कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था. उनके इस बयान से पाकिस्तान नाराज हो गया और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर विरोध दर्ज कराया.
ऐसे में दलाई लामा से मुलाकात नहीं करने के फैसले को एक साथ कई कूटनीतिक मोर्चे खोलने से बचने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है. यानी पाकिस्तान की आपत्ति के बाद चीन के साथ भी किसी नए विवाद को हवा न देने की रणनीति अपनाई गई हो सकती है.
दलाई लामा से मुलाकात नहीं होने के बाद गोर ने लद्दाख में अपेक्षाकृत गैर-विवादित गतिविधियों में हिस्सा लिया. उन्होंने निम्मू में जांस्कर और सिंधु नदियों के संगम पर राफ्टिंग की और लेह के ग्रैंड ड्रैगन होटल में ठहरे. हालांकि, उनकी यात्रा को पूरी तरह सामान्य पर्यटन यात्रा नहीं माना जा सकता. एक मौजूदा अमेरिकी राजदूत का लद्दाख दौरा अपने आप में महत्वपूर्ण है. उनकी गतिविधियां भले ही विवाद से दूर रहीं, लेकिन इस यात्रा के जरिए एक संदेश जरूर गया.
महबूबा मुफ्ती ने उठाए सवाल
गोर की कश्मीर यात्रा को लेकर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि 2019 के बाद विदेशी राजनयिकों के दौरे पहले से तय और सीमित होते हैं. महबूबा मुफ्ती के मुताबिक, विदेशी प्रतिनिधि केवल मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल से मिलते हैं, शिकारा की सवारी करते हैं और वापस चले जाते हैं. उन्होंने इसकी तुलना 2019 से पहले के दौर से करते हुए कहा कि तब विदेशी राजदूत समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों से भी मुलाकात करते थे.
लद्दाख में गोर ने सिंधु नदी में राफ्टिंग की, लेकिन उनकी उपराज्यपाल वीके सक्सेना से मुलाकात नहीं हो सकी. उस समय उपराज्यपाल दिल्ली के दौरे पर थे.
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