शाही मस्जिद पर पहले सहमति, फिर पथराव... उज्जैन में कैसे बिगड़े हालात? Inside Story

सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाया जा रहा मस्जिद का हिस्सा.
Ujjain News: मध्य प्रदेश के उज्जैन में शाही मस्जिद के छोटे से हिस्से को सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाने पर बवाल हुआ. बीते रविवार रात प्रशासन और शहर काजी के बीच सहमति बनने के बावजूद सोशल मीडिया पर वायरल संदेशों के बाद सोमवार सुबह भीड़ जुटी और पुलिस पर पथराव हुआ. पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज कर स्थिति नियंत्रित की. मस्जिद पक्ष का दावा है कि यह करीब 600 साल पुरानी ऐतिहासिक मस्जिद है, जबकि प्रशासन का कहना है कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत मास्टर प्लान के मुताबिक सड़क चौड़ीकरण जरूरी है. हाई कोर्ट से भी मस्जिद पक्ष को राहत नहीं मिली है.
उज्जैन में आज पथराव कैसे हुआ?
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है. इसी सड़क की प्रस्तावित चौड़ाई में शाही मस्जिद का एक छोटा हिस्सा आ रहा है. बीते रविवार रात प्रशासन और शहर काजी के बीच इस हिस्से को मस्जिद कमेटी/समुदाय की ओर से खुद हटाने पर सहमति बनी थी. सोमवार सुबह कार्रवाई शुरू होने से पहले बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए और विरोध के दौरान स्थिति बिगड़ गई. पुलिस के मुताबिक, भीड़ की ओर से पथराव हुआ, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए. पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया.

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सोशल मीडिया से कैसे फैली अफवाह?
रविवार रात बनी सहमति के बावजूद सोशल मीडिया पर अलग-अलग संदेश और भ्रामक जानकारी वायरल हुई. वॉट्सऐप ग्रुप और इंस्टाग्राम पर ऐसे मैसेज तेजी से फैले, जिससे बड़ी संख्या में लोग सुबह मौके पर पहुंच गए. शहर काजी और प्रशासन दोनों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की. पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए गलत सूचना फैलाने के आरोप में कुछ लोगों पर कार्रवाई भी की है.
शाही मस्जिद का क्या इतिहास है?
शाही मस्जिद की उम्र को लेकर अलग-अलग दावे हैं. मस्जिद के इमाम/प्रबंधन की ओर से दावा किया गया है कि इसका इतिहास 1390 तक जाता है. यानी इसे करीब 636 साल पुराना बताया जा रहा है. हालांकि, वर्तमान विवाद से जुड़े उपलब्ध दस्तावेजों में मस्जिद का स्पष्ट रिकॉर्ड 1925 के दस्तावेज और 1985 के मध्य प्रदेश सरकार के गजट में मिलता है. इसलिए 1390 वाला दावा मस्जिद प्रबंधन का दावा है, जबकि उपलब्ध आधुनिक दस्तावेज इसके अलग-अलग कालखंडों में अस्तित्व की पुष्टि करते हैं.

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सड़क क्यों चौड़ी की जा रही है?
कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर के बीच करीब 900 मीटर के मार्ग को 15 मीटर चौड़ा करने की योजना है. यह मार्ग महाकालेश्वर मंदिर, गोपाल मंदिर और शिप्रा क्षेत्र को जोड़ता है. प्रशासन के मुताबिक, सिंहस्थ-2028 और बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर करने के लिए सड़क चौड़ीकरण किया जा रहा है. उज्जैन प्रशासन और मुस्लिम समुदाय के बीच बनी सहमति के अनुसार, सड़क की निर्धारित सीमा में आने वाला लगभग 9 फीट का हिस्सा हटाया जाना है. यही हिस्सा सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहा है.
मामला कोर्ट तक कैसे पहुंचा?
शाही मस्जिद वक्फ से जुड़े पक्ष ने मस्जिद के हिस्से को हटाने के प्रशासनिक आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. 9 सितंबर 2026 के आदेश में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने याचिकाएं खारिज करते हुए सड़क चौड़ीकरण के लिए छोटे हिस्से को हटाने की कार्रवाई में हस्तक्षेप से इनकार किया था. कोर्ट के रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि इसी सड़क पर अन्य धार्मिक संरचनाओं के हिस्सों को हटाने की कार्रवाई हुई है.
आज की स्थिति क्या है?
28 सितंबर को इंदौर हाई कोर्ट की डबल बेंच ने भी मस्जिद कमेटी की अपील खारिज कर दी और सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार किया. प्रशासन के मुताबिक, मस्जिद कमेटी की ओर से बाधक हिस्से को हटाने का काम आगे बढ़ाया जा रहा है. पथराव के बाद इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी है.
क्या बोले नुमाइंदा कमेटी के मेंबर?
वहीं नुमाइंदा कमेटी के मेंबर फहीम सिकंदर ने कहा कि कोर्ट के आदेश में क्या निर्देश दिए गए हैं, इसकी उन्हें अभी जानकारी नहीं है. प्रशासन से पूरे मामले में बातचीत चल रही है. उन्होंने बताया कि कमेटी ने स्वेच्छा से निर्माण कार्य हटाना शुरू किया था. सोमवार को शहर काजी और प्रशासन के बीच सहमति बनने वाली थी, लेकिन कुछ अफवाहों के चलते स्थिति बिगड़ गई. उनका कहना है कि कोई भी धर्मस्थल नहीं हटना चाहिए. उन्होंने बताया कि मस्जिद का स्ट्रक्चर आरबीसी से बना है, जिसे अचानक गिराने से बड़ा नुकसान हो सकता है. इसलिए इसे धीरे-धीरे हटाया जा रहा है. शुरुआत में 9.30 फीट पर निशान लगाया गया था.
उधर, शाही मस्जिद का मलबा हटाने के लिए सोमवार शाम को नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची. जेसीबी और डंपर की मदद से मलबा हटाया जा रहा है. बताया जा रहा है कि रविवार रात से ही जेसीबी और डंपर मौके पर पहुंचा दिए गए थे, लेकिन सोमवार दिनभर मस्जिद के निर्माण को हटाने के दौरान जेसीबी और पोकलेन मशीन का इस्तेमाल नहीं किया गया. शाम को निगम की टीम ने जेसीबी और डंपर के जरिए मलबा हटाने का काम शुरू किया.

शुभम गुप्ता
शुभम गुप्ता को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक दशक से अधिक का अनुभव है. शुभम ने आरजीपीवी यूनिवर्सिटी से IT में इंजीनियरिंग की. इसके बाद ITMI से ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म सर्टिफिकेशन प्राप्त किया. उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली में “आज तक” से बतौर संवाददाता की, जहां आदर्श ग्राम योजना, नोटबंदी और मुद्रा योजना जैसी कई अहम रिपोर्ट्स ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी. दिल्ली में लगभग पांच साल काम करने के बाद शुभम ने अपने गृहप्रदेश मध्यप्रदेश का रुख किया और न्यूज़ नेशन से जुड़े. यहां उनकी कई खबरों ने व्यापक असर डाला, जैसे कृषि विस्तार अधिकारी परीक्षा घोटाले को उजागर करने के बाद सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी. साल 2020 में मध्यप्रदेश की राजनीति के ऐतिहासिक घटनाक्रम, कमलनाथ सरकार के पतन, को उन्होंने बेहद बारीकी से कवर किया. कोरोना काल में उन्होंने जान जोखिम में डालकर व्यवस्थाओं की कमियों को उजागर किया, जिसके बाद सरकार को कई महत्वपूर्ण फैसले लेने पड़े. साल 2023 में शुभम गुप्ता नई भूमिका में TV9 भारतवर्ष के एमपी-सीजी ब्यूरो प्रमुख बने. यहां भी उन्होंने कई बड़े घोटाले उजागर किए, जैसे- बर्तन घोटाला, सर्पदंश घोटाला, धान घोटाला और डामर घोटाला. उनकी रिपोर्टिंग के बाद मुफ्त शव वाहन योजना को तत्काल प्रभाव से शुरू करना पड़ा. मुख्यमंत्री ने महज़ 9 घंटे में इन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.
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