IRDAI के नए प्रस्ताव का असर, इंश्योरेंस शेयरों में 28% तक की भारी गिरावट
इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईआरडीएआई) की ओर से व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसियों पर कमीशन के लिए एक नई अधिकतम सीमा के प्रस्ताव के बाद इश्योरेंस शेयरों में गुरुवार को 28 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली.
इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईआरडीएआई) की ओर से व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसियों पर कमीशन के लिए एक नई अधिकतम सीमा के प्रस्ताव के बाद इश्योरेंस शेयरों में गुरुवार को 28 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली.
New Update
/newsnation/media/media_files/2026/08/28/tejas-networks-share-price-2026-08-28-14-10-51.jpg)
Tejas Networks share price
इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईआरडीएआई) की ओर से व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसियों पर कमीशन के लिए एक नई अधिकतम सीमा के प्रस्ताव के बाद इश्योरेंस शेयरों में गुरुवार को 28 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली. दोपहर 12 बजे इंश्योरेंस ब्रोकिंग कंपनी पीबी फिनटेक (पॉलिसी बाजार) का शेयर 28 प्रतिशत, टर्टलमिंट फिनटेक का शेयर 20 प्रतिशत, एचडीएफसी लाइफ का शेयर 5 प्रतिशत और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस का शेयर 2.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ लाल निशान में था.
इस प्रस्ताव मकसद बिक्री पर मिलने वाले शुरुआती इंसेंटिव को कम करना और पॉलिसीधारकों को कई साल वाले पेमेंट प्लान जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है. इस प्रस्ताव में नियामक ने कहा,"लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए कमीशन का स्ट्रक्चर ऐसा होना चाहिए जो डिस्ट्रीब्यूशन करने वाले लोगों और संस्थाओं को पॉलिसीहोल्डर्स को मल्टी-ईयर पेमेंट प्लान जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित करे, न कि सिर्फ पहले साल के पेमेंट के लिए."
आईआरडीएआई ने अलग-अलग नॉन-लिंक्ड और लिंक्ड लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए प्रीमियम पेमेंट टर्म (पीपीटी) के आधार पर अधिकतम कमीशन की सीमा का प्रस्ताव दिया है. पांच साल से कम के पीपीटी के लिए, डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों के लिए प्रस्तावित सीमा 5 प्रतिशत और एजेंटों के लिए 6.25 प्रतिशत है. पांच साल के पीपीटी वाली पॉलिसी में, ये सीमाएं क्रमशः 10 प्रतिशत और 12.5 प्रतिशत हो जाती हैं. छह से आठ साल के पीपीटी के लिए ये सीमाएं क्रमशः 14 प्रतिशत और 17.5 प्रतिशत होंगी. नौ साल के पेमेंट टर्म के लिए ये बढ़कर 18 प्रतिशत और 22.5 प्रतिशत हो जाती हैं, और 10 साल या उससे ज्यादा के पीपीटी के लिए 20 प्रतिशत और 25 प्रतिशत हो जाती हैं.
रेगुलेटर ने सिंगल प्रीमियम वाले प्रोडक्ट्स और टैक्स छूट वाले प्रोडक्ट्स के लिए कम कमीशन का भी प्रस्ताव दिया है. उदाहरण के लिए, सिंगल प्रीमियम वाली व्यक्तिगत बचत पॉलिसियों के लिए पहले साल का कमीशन डिस्ट्रीब्यूशन करने वाली संस्थाओं के लिए 1 प्रतिशत और एजेंटों के लिए 2 प्रतिशत तक सीमित होगा, जबकि सिंगल प्रीमियम वाली प्योर टर्म पॉलिसियों के लिए यह सीमा क्रमशः 7.5 प्रतिशत और 10 प्रतिशत होगी. प्रस्ताव में कहा गया है कि कमीशन में इंसेंटिव, अवॉर्ड, बिक्री के खर्च की भरपाई और नॉन-कैश फायदे जैसी सभी चीजें शामिल होनी चाहिए. सिंगल-प्रीमियम टर्म पॉलिसी के मामले में पहले साल का कमीशन डिस्ट्रीब्यूशन करने वाली संस्थाओं के लिए 7.5 प्रतिशत और एजेंटों के लिए 10 प्रतिशत तक हो सकता है, जबकि मल्टी-ईयर प्रीमियम टर्म पॉलिसी में पहले साल का कमीशन डिस्ट्रीब्यूशन करने वाली संस्थाओं के लिए 25 प्रतिशत और एजेंटों के लिए 30 प्रतिशत तक हो सकता है.
Input: IANS
हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें! विशेष ऑफ़र और नवीनतम समाचार प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति बनें