ISI-समर्थित दो क्रॉस-बॉर्डर टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़, 9 शातिर अरेस्ट, कैसे करते थे 'आतंकी सेल' तैयार?
Published: Tuesday, August 4, 2026, 21:35 [IST]
Chandigarh Terror Modules Busted: चंडीगढ़ में मंगलवार (4 अगस्त 2026) को ISI-समर्थित दो क्रॉस-बॉर्डर टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ। पंजाब की अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसमें चार नाबालिग भी शामिल हैं। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने एक्स पर पोस्ट कर इस सफलता की जानकारी दी।
डीजीपी गौरव यादव (DGP Gaurav Yadav) के अनुसार, शुरुआती जांच से पता चला है कि आरोपी विदेशी आईएसआई हैंडलर के इशारे पर काम कर रहे थे। ये हैंडलर स्थानीय युवाओं को आतंकी गतिविधियां अंजाम देने, सुरक्षा प्रतिष्ठानों की निगरानी करने, अवैध हथियार हासिल करने और सार्वजनिक शांति भंग करने के लिए भर्ती करने की कोशिश कर रहे थे। जांच में यह भी सामने आया कि रेलवे ट्रैक के पास निगरानी कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों का फुटेज कथित तौर पर विदेशी हैंडलर के साथ साझा किया गया था।
अमृतसर के मोहकमपुरा, एयरपोर्ट और सी-डिवीजन पुलिस स्टेशनों में एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस ने साफ कहा है कि आईएसआई-समर्थित नेटवर्क के बाकी सदस्यों की पहचान करने, इसके फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक का पता लगाने, वित्तीय लेन-देन की जांच करने और अन्य आतंकी गतिविधियों में किसी संलिप्तता का खुलासा करने के लिए आगे की जांच जारी है। आइए विस्तार से जानते हैं पूरी कुंडली...
Cross-Border Terror Modules: गिरफ्तार आरोपी कौन हैं? पूरी कुंडली...
गिरफ्तार आरोपियों में तरनतारन के पट्टी इलाके के वंश कुमार (19) और अनमोल सिंह उर्फ साहिल (20) शामिल हैं। अमृतसर से हरमन सिंह उर्फ हम्मू (24), सुखदेव सिंह (30) और सुखमन सिंह (19) पकड़े गए हैं। बाकी चार आरोपी नाबालिग हैं, जिनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
अमृतसर पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने ऑपरेशन की पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस टीमों ने वंश कुमार और उसके नाबालिग साथी को रोका। उनके पास से एक अवैध .32 बोर की देसी पिस्तौल और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए। गिरफ्तार आरोपियों के बयानों के आधार पर पुलिस ने अनमोल सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया। अनमोल पर आरोप है कि उसने इन हथियारों की सप्लाई की थी।
जेल में बंद सुखदेव सिंह का क्या कनेक्शन?
पुलिस को जांच में पता चला कि रेलवे ट्रैक के पास सर्विलांस कैमरे लगाने से जुड़े पैसे का लेन-देन अमृतसर सेंट्रल जेल में बंद सुखदेव सिंह ने किया था। उसने अपने साथी कैदी हरमन सिंह उर्फ हम्मू के कहने पर पेटीएम के जरिए ये लेन-देन किया। सुखदेव सिंह को प्रोडक्शन वारंट पर अदालत से लाया गया और इस मामले में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। अनमोल, उसके साथियों और रेलवे ट्रैक किनारे लगे सीसीटीवी कैमरों को आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए सरकारी रेलवे पुलिस को सौंप दिया गया है।
पुलिस के अनुसार सुखदेव और हरमन राजासांसी पुलिस स्टेशन में दर्ज आर्म्स एक्ट के एक अन्य मामले में भी शामिल हैं। उस मामले में उनके पास से चार ग्लॉक पिस्तौलें बरामद की गई थीं।
दूसरा ऑपरेशन और पेट्रोल बम
एक अन्य ऑपरेशन में पुलिस टीमों की जानकारी के आधार पर दो नाबालिगों को पकड़ा। उनके पास से एक .32 बोर की देसी पिस्तौल, पेट्रोल से भरे दो बोतल बम और एक लाइटर बरामद हुआ। लगातार पूछताछ के दौरान इन आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्होंने अपने दो साथियों सुखमन सिंह और एक अन्य नाबालिग के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम देने की कई बार कोशिश की थी। दोनों साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। उनके पास से दो और पेट्रोल बम तथा एक .30 बोर की पिस्तौल बरामद की गई।
कैसे रची जा रही थी साजिश?
पुलिस जांच के अनुसार, ये मॉड्यूल स्थानीय युवाओं को निशाना बना रहे थे। विदेशी हैंडलर उन्हें आतंकी गतिविधियों के लिए उकसा रहे थे। सुरक्षा प्रतिष्ठानों की निगरानी, रेलवे ट्रैक के पास कैमरे लगाना और फुटेज साझा करना इस साजिश का हिस्सा था। अवैध हथियार जुटाना और पेट्रोल बम जैसे विस्फोटक तैयार करना सार्वजनिक जगहों पर अशांति पैदा करने की योजना को दर्शाता है। जेल में बंद कैदियों के जरिए वित्तीय लेन-देन का खुलासा इस नेटवर्क की गहराई को दिखाता है।
डीजीपी गौरव यादव ने स्पष्ट किया कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। नेटवर्क के अन्य सदस्यों, वित्तीय स्रोतों और संभावित अन्य गतिविधियों की पड़ताल जारी है। अमृतसर पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने भी कहा कि खुफिया जानकारी के आधार पर समय रहते कार्रवाई से बड़ी घटना को अंजाम लेने से रोका जा सका।
(PTI इनपुट के साथ)