ITR फाइलिंग की आखिरी तारीख 31 अगस्त: गलतियों से बचने के लिए देखें ये जरूरी चेकलिस्ट
ITR फाइलिंग की आखिरी तारीख 31 अगस्त: गलतियों से बचने के लिए देखें ये जरूरी चेकलिस्ट
Published: Friday, August 28, 2026, 13:24 [IST]
इस वीकेंड लाखों टैक्सपेयर्स अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने वाले हैं। गैर-ऑडिट वाले बिजनेस और प्रोफेशनल्स के साथ-साथ योग्य पार्टनर्स के लिए ITR भरने की आखिरी तारीख सोमवार, 31 अगस्त है। फाइलिंग के दौरान किसी भी गलती, देरी या फॉर्म रिजेक्ट होने से बचने के लिए यह आसान चेकलिस्ट जरूर देख लें। सही फॉर्म चुनने, सही टैक्स रिजीम (Old या New) सेलेक्ट करने, आंकड़ों का मिलान करने, बकाया टैक्स चुकाने और समय पर e-verify करने से जुड़ी सभी अहम बातें यहां समझें।
अगर आपकी बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम है और खातों का ऑडिट नहीं होना है, तो 31 अगस्त तक रिटर्न हर हाल में फाइल कर दें। इसमें प्रोपराइटर, फ्रीलांसर, कंसल्टेंट और बिना ऑडिट वाली फर्मों के पार्टनर शामिल हैं। अगर आप प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम का फायदा ले रहे हैं, तो ITR-4 का इस्तेमाल करें। वहीं अगर आप खाते (Books of Accounts) मेंटेन करते हैं, असल खर्च क्लेम करना चाहते हैं, कैपिटल गेंस दिखा रहे हैं या नुकसान (Loss) सेट-ऑफ करना है, तो ITR-3 चुनें। ध्यान दें कि जिन फर्मों का ऑडिट होना है, उनके पार्टनर्स के लिए ऑडिट की अलग ड्यू डेट लागू होती है।

सबसे पहले आईटी पोर्टल पर अपनी प्रोफाइल डिटेल्स अपडेट करें और रिफंड वाला बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेट (Pre-validate) कर लें। इसके बाद Form 26AS, एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इन्फॉर्मेशन समरी (TIS) डाउनलोड करें। अपने टर्नओवर का मिलान जारी किए गए बिलों या GST रिकॉर्ड से अच्छी तरह कर लें। अगर कोई बकाया टैक्स बनता है, तो Net Banking, UPI या NEFT के जरिए e-Pay Tax से सेल्फ-असेसमेंट टैक्स जमा करें और चालान आइडेंटिफिकेशन नंबर (CIN) संभालकर रखें। याद रखें, डेडलाइन बीतने के बाद ITR दाखिल करने पर लेट फीस और ब्याज दोनों देना पड़ेगा।
पुराना बनाम नया टैक्स रिजीम: गैर-ऑडिट टैक्सपेयर्स के लिए आसान तुलना
| फीचर | ओल्ड टैक्स रिजीम | न्यू टैक्स रिजीम |
|---|---|---|
| डिडक्शन और छूट | ज्यादातर डिडक्शन मिलते हैं, जिनमें Chapter VI-A के प्रमुख क्लेम और होम लोन/हाउसिंग बेनेफिट शामिल हैं। | सीमित छूट; सैलरी पर मिलने वाला स्टैंडर्ड डिडक्शन और एम्प्लॉयर के चुनिंदा योगदान। |
| नुकसान की भरपाई (Loss set-off) | शर्तों के मुताबिक नुकसान को सेट-ऑफ करने और आगे (Carry-forward) ले जाने के ज्यादा विकल्प। | कई मामलों में नुकसान सेट-ऑफ करने पर पाबंदी। |
| डिफॉल्ट और चयन का नियम | यह डिफॉल्ट नहीं है; रिटर्न भरते समय इसे अलग से चुनना पड़ता है। | यह बाय-डिफॉल्ट सेलेक्ट रहती है; रिटर्न भरते समय ओल्ड रिजीम में स्विच कर सकते हैं। |
| कब है फायदेमंद? | अगर आप हर साल बड़े पैमाने पर टैक्स डिडक्शन और छूट का दावा करते हैं। | कम डिडक्शन, फिक्स इनकम और आसान कंप्लायंस चाहने वालों के लिए। |
इसे 12,00,000 रुपये की सालाना सैलरी के उदाहरण से समझें। मान लीजिए आप सेक्शन 80C के तहत 1,50,000 रुपये और मेडिकल इंश्योरेंस के 25,00,000 नहीं बल्कि 25,000 रुपये क्लेम करते हैं। स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद ओल्ड रिजीम में आपकी टैक्स योग्य आय 9,75,000 रुपये रह जाती है। वहीं न्यू रिजीम में अमूमन सिर्फ स्टैंडर्ड डिडक्शन ही मिलता है, जिससे टैक्स योग्य आय 11,50,000 रुपये बनेगी। टैक्स योग्य आय का यही अंतर अक्सर बचत करने वालों का रुझान ओल्ड रिजीम की तरफ झुका देता है।
AIS/TIS में गड़बड़ी, 44AD/44ADA की शर्तें और 30 दिनों का e-verification
फाइलिंग से पहले AIS और TIS में दर्ज सभी एंट्रीज चेक कर लें। अगर कोई डेटा गलत या गायब है, तो पोर्टल पर तुरंत ऑनलाइन फीडबैक दें। रिटर्न में सही आंकड़े भरें और जरूरत पड़ने पर उनके सबूत संभालकर रखें। सेक्शन 44AD या 44ADA के तहत प्रिजम्प्टिव क्लेम कर रहे हैं, तो टर्नओवर या कुल रसीदों (Gross Receipts) की तय सीमा का पूरा ध्यान रखें। इसके 5 साल वाले नियम को न भूलें—अगर आप एक बार इस स्कीम से बाहर निकलते हैं, तो अगले 5 साल तक दोबारा इसमें शामिल नहीं हो सकते। ITR-4 का इस्तेमाल तभी करें जब प्रिजम्प्टिव स्कीम के नियम पूरी तरह लागू होते हों।
याद रखें कि ई-वेरीफाई (e-verification) के लिए मिलने वाला 30 दिनों का समय फाइलिंग की तारीख से ही शुरू हो जाता है। अगर आप सोमवार, 31 अगस्त को ITR फाइल करते हैं, तो इसे मंगलवार, 29 सितंबर तक ई-वेरीफाई जरूर कर लें। अगर यह सीमा चूक गई, तो रिटर्न को अमान्य (Not Filed) माना जाएगा। रिफंड की प्रक्रिया अमूमन आईटीआर प्रोसेस (Intimation) के बाद शुरू होती है, इसलिए बैंक अकाउंट पहले से वैलिडेट रखें। अगर फाइलिंग के दौरान कोई तकनीकी समस्या आती है, तो पोर्टल पर चालान और अक्लॉलेजमेंट (Acknowledgment) लगाकर ग्रीवांस (Grievance) दर्ज कराएं।
Story first published: Friday, August 28, 2026, 13:24 [IST]
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