Jharkhand News : रांची में बड़ी सफलता: 39 लाख के इनामी समेत 16 नक्सलियों ने किया सरेंडर, 11 हथियार और 1562 गोलियां बरामद
Jharkhand News : झारखंड पुलिस के नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी कामयाबी, प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़े 16 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, करोड़ों की सुरक्षा रणनीति को मिली मजबूती।
Jharkhand News : झारखंड की राजधानी रांची में नक्सल विरोधी अभियान के तहत बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़े 16 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें 39 लाख रुपये के इनामी छह नक्सली शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से 11 हथियार और 1562 गोलियां बरामद की हैं।Jharkhand News : रांची में झारखंड पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़े 16 सक्रिय नक्सलियों ने मंगलवार को झारखंड पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में छह ऐसे नक्सली भी शामिल हैं जिन पर कुल 39 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इस बड़ी कार्रवाई को राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 11 पुरुष और 5 महिला सदस्य शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इनके पास से 11 आधुनिक हथियार, 1562 जिंदा गोलियां तथा अन्य नक्सली गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की है। यह बरामदगी इस बात का संकेत है कि संगठन अब भी हथियारों के बल पर अपनी गतिविधियां संचालित करने का प्रयास कर रहा था, लेकिन लगातार सुरक्षा अभियानों के कारण उसे बड़ा झटका लगा है।
उच्च पदों पर रहे नक्सलियों ने भी छोड़ा संगठन
झारखंड पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन के कई महत्वपूर्ण पदाधिकारी शामिल हैं। इनमें एक रीजनल कमेटी सदस्य (RCM), तीन जोनल कमेटी सदस्य (ZCM), तीन सब-जोनल कमेटी सदस्य (SZCM), छह एरिया कमेटी सदस्य (ACM) तथा तीन दस्ता सदस्य शामिल हैं।
इन पदों पर कार्यरत नक्सलियों की भूमिका संगठन की रणनीति तैयार करने, नए सदस्यों की भर्ती, हथियारों की व्यवस्था, लेवी वसूली और विभिन्न नक्सली गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। ऐसे में इनका आत्मसमर्पण माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में थे सक्रिय
पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सली कोल्हान और सारंडा के दुर्गम जंगल-पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय थे। ये क्षेत्र लंबे समय से नक्सली गतिविधियों के लिए संवेदनशील माने जाते रहे हैं। यहां सुरक्षा बलों द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
बताया गया है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के शीर्ष नेताओं मिसिर बेसरा उर्फ सागर जी तथा असीम मंडल के दस्ते से जुड़े हुए थे। इन दोनों नेताओं के नेटवर्क को कमजोर करने के उद्देश्य से सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं।
11 हथियार और 1562 गोलियां बरामद
आत्मसमर्पण के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सलियों के कब्जे से 11 हथियार तथा 1562 गोलियां बरामद की हैं। पुलिस के अनुसार यह बरामदगी सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन हथियारों का उपयोग भविष्य में नक्सली घटनाओं को अंजाम देने में किया जा सकता था।
बरामद हथियारों और भारी मात्रा में मिले कारतूस से यह भी स्पष्ट होता है कि संगठन अभी भी हथियारबंद गतिविधियों को जारी रखने की तैयारी में था। हालांकि लगातार चल रहे संयुक्त अभियानों ने उनकी क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया है।
संयुक्त अभियान का दिखा असर
झारखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) तदाशा मिश्र ने इस सफलता पर कहा कि झारखंड पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), कोबरा बटालियन तथा झारखंड जगुआर की संयुक्त कार्रवाई के कारण माओवादी संगठन पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों द्वारा जंगलों में लगातार सर्च ऑपरेशन, इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई और विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के कारण नक्सली संगठन कमजोर पड़ रहा है। इसी दबाव के चलते कई नक्सली अब मुख्यधारा में लौटने का फैसला कर रहे हैं।
आत्मसमर्पण नीति का मिल रहा सकारात्मक परिणाम
राज्य सरकार और झारखंड पुलिस की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप पुनर्वास, प्रशिक्षण तथा समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए जाते हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हथियार छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताने वाले लोगों को समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया जाता है। इससे अन्य सक्रिय नक्सलियों को भी हिंसा का रास्ता छोड़ने के लिए प्रेरणा मिलती है।
नक्सलवाद के खिलाफ अभियान रहेगा जारी
झारखंड पुलिस ने स्पष्ट किया है कि राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। सुरक्षा एजेंसियां जंगल क्षेत्रों में सक्रिय माओवादी संगठनों के खिलाफ अभियान तेज कर रही हैं ताकि राज्य में शांति और विकास का वातावरण मजबूत हो सके।
पुलिस का कहना है कि जिन क्षेत्रों में पहले नक्सली प्रभाव अधिक था, वहां अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और अन्य विकास योजनाओं का विस्तार किया जा रहा है। इससे स्थानीय लोगों का विश्वास बढ़ा है और नक्सली संगठनों को जनसमर्थन मिलने में कमी आई है।
सुरक्षा व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि एक साथ 16 नक्सलियों का आत्मसमर्पण और बड़ी मात्रा में हथियारों की बरामदगी राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ेगा और नक्सली नेटवर्क को कमजोर करने में मदद मिलेगी।
पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में भी इसी तरह के अभियान जारी रहेंगे, जिससे राज्य के शेष नक्सल प्रभावित इलाकों में भी शांति स्थापित करने में सफलता मिलेगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे विकास और शांति की प्रक्रिया में सहयोग करें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ जारी अभियान के बीच यह आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल माओवादी संगठन की गतिविधियों पर असर पड़ेगा, बल्कि राज्य में विकास कार्यों को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।