रावलाकोट प्रदर्शन में घायल JKLF के पूर्व आतंकी कमांडर फारूक की मौत, 90 के दशक में J&K में आतंकी घटनाओं में था शामिल
दुनिया
- Reported by: सुहैल नाजिर भट्ट
- Updated Jul 31, 2026, 12:38 PM IST
फारूक का JKLF से लंबा जुड़ाव रहा और 1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की शुरुआती गतिविधियों में वह सक्रिय भूमिका निभाता रहा। बताया जाता है कि फारूक ने पहले पाकिस्तान सेना के स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) में सेवा दी और बाद में JKLF से जुड़ गया।
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जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का पूर्व आतंकी कमांडर फारूक।
JKLF Commander Farooq : जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के पूर्व आतंकी कमांडर फारूक की पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। वह रावलाकोट में विरोध प्रदर्शनों के दौरान गंभीर रूप से घायल हुआ था। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, रावलाकोट के मंग क्षेत्र के निवासी फारूक 28 जुलाई को उस समय गंभीर रूप से घायल हुआ जब रावलाकोट बस टर्मिनल के पास प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर गोलीबारी की गई। शुक्रवार को इस्लामाबाद के अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
आतंकी गतिविधियों में थी सक्रिय भूमिका
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि फारूक का JKLF से लंबा जुड़ाव रहा और 1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की शुरुआती गतिविधियों में वह सक्रिय भूमिका निभाता रहा। बताया जाता है कि फारूक ने पहले पाकिस्तान सेना के स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) में सेवा दी और बाद में JKLF से जुड़ गया। 1990 के दशक में उसने पुंछ डिवीजन में JKLF के एक प्रशिक्षण केंद्र का नेतृत्व किया और रावलाकोट स्थित शिविर में करीब 7,000 JKLF आतंकियों को प्रशिक्षण देने का दावा किया जाता है।
PoK में हो रहे पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन
उसे JKLF का पूर्व बेस कमांडर और संगठन के संस्थापक अमानतुल्ला खान का करीबी सहयोगी भी बताया जाता है। सामने आई तस्वीरों में फारूक अपने शुरुआती वर्षों में पाकिस्तान सेना के जवानों के साथ और बाद में अज्ञात स्थानों पर JKLF आतंकियों के साथ दिखाई देता है। ज्वाइंट एक्शन अवामी कमेटी के अनुसार, 5 जून से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoJK) में जारी अशांति के दौरान अब तक करीब 75 से 91 नागरिकों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शनकारी 12 शरणार्थी सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पाकिस्तान इन सीटों का उपयोग जनादेश को प्रभावित करने के लिए करता है। इसके अलावा प्रदर्शनकारी सस्ती बिजली, सब्सिडी वाला गेहूं और अन्य बुनियादी अधिकारों की भी मांग कर रहे हैं।
कौन था कमांडर फारूक
1960 के दशक में पाकिस्तान सेना के स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) की 2 कमांडो यूनिट में शामिल हुआ। इसके बाद 1974 में अरब-इजरायल युद्ध के बाद लाहौर में आयोजित इस्लामिक समिट सम्मेलन के दौरान यासिर याराफात जो उस समय फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) के अध्यक्ष थे, की सुरक्षा टीम में तैनात रहा। 1988 में लगभग 25 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद पाकिस्तान सेना से सेवानिवृत्त हुआ। 1990 में संगठित कश्मीरी उग्रवाद से जुड़े और पुंछ डिवीजन में JKLF के प्रशिक्षण केंद्र का प्रमुख बना। रावलाकोट में JKLF के बेस कमांडर के रूप में कार्य किया। कहा जाता है कि फारूक ने लगभग 7,000 आतंकियों को प्रशिक्षण दिया। उसे अमानुल्लाह खान का करीबी सहयोगी भी माना जाता था।