JPSC Files: झारखंड में सिर्फ एक परीक्षा में गड़बड़ी का नहीं है मामला, पूरे भर्ती सिस्टम की हो रही है जांच

JPSC Files: झारखंड में सिर्फ एक परीक्षा में गड़बड़ी का नहीं है मामला, पूरे भर्ती सिस्टम की हो रही है जांच

झारखंड में छात्रों का आंदोलन जारी है.

झारखंड में छात्र आंदोलन कर रहे हैं. छात्रों का ये आंदोलन झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की तरफ से आयोजित 14वीं संयुक्त सिविल सर्विस प्रीलिम्स एग्जाम 2025 का रिजल्ट जारी होने के बाद शुरू हुआ है. इसके बाद से JPSC सिविल सर्विस एग्जाम 2025 प्रक्रिया सवालों के घेरे में हैं, लेकिन झारखंड की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, उसमें नए एंगल सामने आ रहे हैं.

इस मामले में अब तक हुई 14 गिरफ्तारियों को यदि अलग-अलग घटनाओं की तरह देखा जाए तो तस्वीर अधूरी लगती है, लेकिन CID की क्रमवार जांच को ध्यान से देखने पर एक अलग कहानी सामने आती है. यह कहानी सिर्फ एक परीक्षा की नहीं, बल्कि पूरे भर्ती तंत्र की परतें खोलने की कोशिश करती दिखाई देती है.

शक के घेरे में JPSC की अन्य परीक्षाएं

CID ने 22 जुलाई 2026 को केस नंबर 16/2026 दर्ज किया है. केस का शीर्षक केवल 14वीं JPSC परीक्षा नहीं, बल्कि JPSC द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं है. यही इस जांच का पहला बड़ा संकेत है कि एजेंसी का दायरा एक परीक्षा से कहीं व्यापक है.

अधिकारी ही नहीं कैंडिडेट्स भी जांच के दायरे में

इस मामले में CID की जांच आगे बढ़ती गई और मामला खुलता गया. 30 जुलाई को पहला बड़ा खुलासा हुआ. झारखंड संयुक्त सिविल सर्विस परीक्षा 2025 में चयनित कैंडिडेट सुमन सोरेन को गिरफ्तार किया गया. CID ने कहा कि उसने अनुचित तरीके से परीक्षा पास करने की बात स्वीकार की है. हालांकि उसके पास से OMR की कार्बन कॉपी बरामद नहीं हुई. यह गिरफ्तारी बताती है कि जांच केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अभ्यर्थियों तक भी पहुंच चुकी है.

अभय तिवारी की गिरफ्तारी बड़ा संकेत है

इस मामले में 3 अगस्त को CID ने राज्यभर में 18 स्थानों पर छापेमारी की. रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद में हुई इन कार्रवाइयों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज़, OMR की कार्बन कॉपियां, एडमिट कार्ड और अन्य रिकॉर्ड जब्त किए गए. जांच में पहली बार अभय तिवारी का नाम सामने आया. CID ने कहा कि जांच में यह तथ्य सामने आए हैं कि उसने कई केंद्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाएं पास कीं, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इन तथ्यों का सत्यापन अभी बाकी है. यह सावधानी इस बात का संकेत है कि जांच एजेंसी अभी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है.

4 अगस्त को CID ने उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार की गिरफ्तारी की जानकारी दी. एजेंसी ने कहा कि इनकी गिरफ्तारी साक्ष्यों के आधार पर की गई और इनके पास से डिजिटल व अभिलेखीय साक्ष्य भी जब्त किए गए. इसके साथ ही गिरफ्तारियों की संख्या 14 पहुंच गई.

नतीजे पर पहुंचने में जल्दीबाजी में नहीं CID

जांच की रणनीति स्पष्ट दिखाई देती है. पहले कैंडिडेट्स, फिर दस्तावेज, फिर डिजिटल साक्ष्य और उसके बाद कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी. इसी दौरान JPSC के अधिकारियों और TDPL से जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई हुई.

इस पूरी जांच में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि CID अभी किसी बड़े निष्कर्ष की सार्वजनिक घोषणा नहीं कर रही. बल्कि एक ही वाक्य दोहराया गया है कि जांच जारी है. जांच के दौरान प्राप्त होने वाले साक्ष्यों के आधार पर अग्रेतर विधि-सम्मत कार्रवाई की जाएगी. इसका अर्थ है कि जांच अभी खुली हुई है और एजेंसी लगातार नए साक्ष्य जोड़ रही है.यही कारण है कि इस मामले को केवल 14 गिरफ्तारियां या JPSC घोटाला कहकर समझना पर्याप्त नहीं होगा.

शिवांग माथुर

शिवांग माथुर

शिवांग माथुर टीवी 9 भारतवर्ष में एसोसियेट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं.

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