Kamika Ekadashi Vrat Katha: आज कामिका एकादशी का व्रत रख रहे हैं, तो जरूर पढ़ें यह व्रत कथा
Kamika Ekadashi Vrat Katha: आज यानी 9 अगस्त 2026, रविवार को कामिका एकादशी का व्रत रखा जा रहा है. इस दिन भगवान विष्णु को समर्पित है. इस एकादशी पर व्रत और पूजा के साथ-साथ कथा का पाठ भी करना चाहिए. जानें कामिका एकादशी की पौराणिक कथा.
Published byNamrata Mohanty
Kamika Ekadashi Vrat Katha: आज यानी 9 अगस्त 2026, रविवार को कामिका एकादशी का व्रत रखा जा रहा है. इस दिन भगवान विष्णु को समर्पित है. इस एकादशी पर व्रत और पूजा के साथ-साथ कथा का पाठ भी करना चाहिए. जानें कामिका एकादशी की पौराणिक कथा.
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Kamika Ekadashi Vrat Katha Photograph: (ai generated)
Kamika Ekadashi Vrat Katha: हिंदू धर्म में कामिका एकादशी का खास महत्व बताया गया है. एकादशी की तिथि को सनातन धर्म में सबसे खास माना जाता है. भगवान विष्णु की आराधना करने के लिए यह दिन सबसे खास माना जाता है. आज की एकादशी सावन मास की पहली एकादशी है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत रखने से अश्वमेध यज्ञ जितना फल प्राप्त होता है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से जीवन की नकारात्कताएं दूर होती हैं. जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति होती है. हिंदू धर्म में कोई भी व्रत उसकी व्रत कथा के बिना अधूरा होता है. इसलिए, आज जो लोग व्रत रख रहे हैं उन्हें कामिका एकादशी व्रत कथा.
पढ़ें कामिका एकादशी व्रत कथा (Ekadashi Vrat Katha)
कामिका एकादशी व्रत कथा
एक गांव में एक वीर क्षत्रिय रहता था. एक दिन उसकी भेंट एक दुर्बल ब्राह्मण से हुई और किसी कारण वश उसकी ब्राह्मण से हाथापाई हो गई. हाथापाई में ब्राह्मण की मृत्यु हो गई. तुरंत उस क्षत्रिय को अपनी गलती का एहसास हुआ. उसने गांव के समक्ष क्षमा याचना की और ब्राह्मण का विधिपूर्वक अंतिम संस्कार करने का वचन दिया लेकिन पंडितों ने उसे क्रिया में शामिल होने से मना कर दिया.
ब्राह्मणों ने कहा कि तुम पर ब्रह्म-हत्या का दोष है. पहले प्रायश्चित कर इस पाप से मुक्त हो, तब हम तुम्हारे घर भोजन करेंगे. इस पर क्षत्रिय ने ब्रह्म हत्या दोष से मुक्त होने का उपाय पूछा. तब ब्राह्मणों ने बताया कि श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना कर और ब्राह्मणों को भोजन व दान देने के साथ आशीर्वाद प्राप्त करने से इस पाप से मुक्ति मिलेगी. पंडितों के बताये हुए तरीके से उस क्षत्रिय ने व्रत किया. उसी रात भगवान विष्णु उसके सपने में आए और बोले कि तुम्हारी भक्ति और आज की पूजा से मैं प्रसन्न हूँ. इस व्रत के पुण्य से तुम्हें ब्रह्म हत्या दोष से मुक्ति मिल गई है. तब से ही, कामिका एकादशी व्रत की परंपरा प्रारंभ हुई. इस एकादशी की कथा सुनने मात्र से ही वाजपेय यज्ञ के फल की प्राप्ति होती है.
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क्यों पढ़नी चाहिए कामिका एकादशी व्रत कथा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कामिका एकादशी की कथा का सुनने या पढ़ने से व्रत का आध्यात्मिक पक्ष पूरा हो जाता है. यह कथा व्यक्ति को अपने कर्मों पर विचार करने, गलतियों का प्रायश्चित करने और भगवान विष्णु की भक्ति में मन लगाने का संदेश देती है.
कामिका एकादशी व्रत का महत्व
हिंदू धर्म में श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली कामिका एकादशी का व्रत रखना अत्यंत पवित्र और पापों को नाश करने वाला माना जाता है. इस व्रत को करने से व्यक्ति को वाजपेय और अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य मिलता है. अंत में उन्हें भगवान विष्णु के वैकुंठ लोक में स्थान प्राप्त होता है.
कामिका एकादशी पर तुलसी पौधे का महत्व
कामिका एकादशी की पूजा में तुलसी दल का खास महत्व होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी को भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय भोग माना जाता है. इसलिए, उनकी पूजा में इस पत्र का इस्तेमाल जरूर किया जाता है. मान्यता है कि भक्ति और श्रद्धा के साथ तुलसी अर्पित करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामना पूरी करते हैं.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)