भोपाल और इंदौर भारत का अगला रियल एस्टेट मार्केट: Knight Frank and CII Report
भोपाल समाचार, 18 सितंबर 2026: मध्य प्रदेश के दोनों बड़े शहर भोपाल और इंदौर के लोगों के लिए गुड न्यूज़ है। Knight Frank and CII की लेटेस्ट रिपोर्ट में भोपाल और इंदौर को भारत के उन 11 शहरों में शामिल किया गया है जहां पर सबसे तेज विकास होने की संभावना है। बताया है कि इन दोनों शहरों में प्रॉपर्टी के प्राइस, दिल्ली और मुंबई की तुलना में तेजी से बढ़ेंगे। भारत के 11 शहरों में डिकेडल CAGR, भारत के चार बड़े महानगरों से ज्यादा रहेगा।
नाइट फ्रैंक और CII की नई रिपोर्ट 'India's Next Real Estate Markets' के मुताबिक, भारत के टियर-2 और टियर-3 सिटी - रीजन आने वाले सालों में रियल एस्टेट ग्रोथ का बड़ा हिस्सा बन सकते हैं। 2047 तक देश के कुल रियल एस्टेट आउटपुट में इन शहरों की हिस्सेदारी 25-30% तक पहुंच सकती है। इससे 1.4 से 1.7 ट्रिलियन डॉलर के रियल एस्टेट अवसर का अनुमान लगाया गया है।
2050 तक 74 करोड़ हो सकती है शहरी आबादी
रिपोर्ट के मुताबिक, अभी करीब 59.7 करोड़ लोग भारत के शहरी इलाकों में रहते हैं और शहरी अर्थव्यवस्था देश की GDP में करीब 60% योगदान देती है। 2050 तक भारत की शहरी आबादी करीब 74 करोड़ पहुंचने का अनुमान है। इस शहरी ग्रोथ का बड़ा हिस्सा बड़े मेट्रो शहरों के बाहर देखने को मिल सकता है। 2025 से 2050 के बीच टियर-2 और टियर-3 शहरों की आबादी बढ़ने की रफ्तार टॉप-8 मेट्रो शहरों के मुकाबले करीब 3 गुना रहने का अनुमान है।
भोपाल-इंदौर का डिकेडल CAGR दिल्ली-मुंबई से डबल
रिपोर्ट में चुने गए अगले रियल एस्टेट बाजारों में पिछले पांच साल में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की औसत कीमतों में करीब 63% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी अवधि में टॉप-8 शहरों में कीमतें करीब 42% की वृद्धि हुई है। 2016 से 2026 के दौरान इन चुने गए शहरों में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमतों का डिकेडल CAGR करीब 8% रहा, जबकि टॉप-8 शहरों में यह करीब 4% था। इसका मतलब हुआ कि इंदौर भोपाल जैसे शहरों का डिकेडल CAGR दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों की तुलना में 2 गुना है।
हालांकि, रिपोर्ट ये भी साफ करती है कि केवल प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी को भविष्य की डिमांड का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता। रोजगार, इनकम, कंजम्प्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर और औपचारिक रियल एस्टेट सप्लाई जैसे फैक्टर भी जरूरी हैं।
कौन से शहर बन रहे हैं अगला रियल एस्टेट मार्केट ?
रिपोर्ट में 11 सिटी-रीजन को भारत के अगले रियल एस्टेट बाजारों के तौर पर चुना गया है जिनमें शामिल हैं चंडीगढ़ ट्राइसिटी, कोयंबटूर, जयपुर, लखनऊ, भोपाल, इंदौर, नागपुर, भुवनेश्वर, विशाखापत्तनम, गोवा और कोच्चि, को भारत का अगला रियल एस्टेट मार्केट बताया गया है।
इन शहरों की इकोनॉमी एक जैसी नहीं है। कुछ शहर सरकारी और सर्विस सेक्टर पर आधारित हैं, कुछ मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स के केंद्र हैं, जबकि गोवा जैसे बाजारों में टूरिज्म, लाइफस्टाइल और सेकंड-होम डिमांड की भूमिका ज्यादा है।
सिर्फ सड़क और एयरपोर्ट से नहीं बनेगा रियल एस्टेट बाजार
रिपोर्ट का एक अहम निष्कर्ष है कि सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर बनने से रियल एस्टेट डिमांड पैदा नहीं होती। एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर किसी शहर की कनेक्टिविटी और पहुंच बढ़ा सकते हैं, लेकिन इसके बाद रोजगार, कारोबार, इनकम और कंजम्प्शन बढ़ना जरूरी है।
यानी किसी शहर में नया एयरपोर्ट या एक्सप्रेसवे बनना अपने आप में प्रॉपर्टी बाजार की सफलता की गारंटी नहीं है। वहां रोजगार पैदा होना, कंपनियों का आना, लोगों की इनकम बढ़ना और शहर में पानी, सीवरेज, ट्रांसपोर्ट, हेल्थकेयर और एजुकेशन जैसी सुविधाओं का विकास भी जरूरी है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च में बड़ा इजाफा
रिपोर्ट के मुताबिक, इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी कैपिटल एक्सपेंडिचर FY2015 के करीब 0.7 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर FY2027 में अनुमानित 6.7 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसी दौरान ऑपरेशनल एयरपोर्ट की संख्या 74 से बढकर 165 हो गई है। नेशनल हाईवे नेटवर्क भी 91.287 हो गया है।इस बेहतर कनेक्टिविटी से छोटे शहरों को बड़े बाजारों, मैन्युफैक्चरिंग सेंटर, सप्लाई चेन और रोजगार केंद्रों से जोड़ने में मदद मिल रही है।
रियल एस्टेट में सिर्फ घर नहीं, कई सेक्टरों की डिमांड
इन शहरों में रियल एस्टेट की डिमांड सिर्फ रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी तक सीमित नहीं है। बढ़ते कारोबार और कंजम्प्शन से रिटेल, ऑफिस, वेयरहाउसिंग, हॉस्पिटैलिटी और कमर्शियल प्रॉपर्टी की डिमांड भी बढ़ सकती है। 2020 के बाद टियर-2 शहरों में 59 लाख वर्ग फुट ग्रेड - A ऑर्गनाइज्ड रिटेल स्पेस जुड़ा है, जो टियर-1 शहरों में इसी अवधि में हुई बढ़ोतरी के तीन गुने से भी ज्यादा है।
इन शहरों में क्यों बढ़ रही है डिमांड ?
रिपोर्ट के मुताबिक, शहरी परिवारों का कंजम्प्शन बढ़ रहा है। शहरी परिवार प्रति व्यक्ति हर महीने करीब 7,000 रुपये खर्च करते हैं, जो ग्रामीण परिवारों के मुकाबले करीब 70% ज्यादा है। शहरी खर्च का करीब 60% हिस्सा नॉन-फूड गुड्स और सर्विसेज पर जाता है। इस बढ़ते कंजम्प्शन से रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर, एजुकेशन, लॉजिस्टिक्स और हाउसिंग जैसे रियल एस्टेट सेक्टरों को सपोर्ट मिल सकता है।
रिपोर्ट ने चेतावनी भी दी
नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि 2047 का 25-30% हिस्सा और 1.4-1.7 ट्रिलियन डॉलर का अवसर एक कंडीशनल प्रोजेक्शन है। अगर इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ रोजगार, एंटरप्राइज, कंजम्प्शन और शहरी क्षमता नहीं बढ़ती, तो सिर्फ कंस्ट्रक्शन बढ़ने से ओवरसप्लाई का खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए रिपोर्ट का फोकस सिर्फ छोटे शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों पर नहीं, बल्कि ऐसे सिटी - रीजन पर है जहां कनेक्टिविटी + रोजगार + कारोबार + कंजम्प्शन + रियल एस्टेट सप्लाई एक साथ बढ़ रहे हों। रिपोर्ट: प्रवीण चित्रांश।
