कुम्भ राशिफल – Kumbh Rashifal 2026– 16 July To 23 July
गू, गे, गो, सा — धनिष्ठा नक्षत्र
सी, सू, से, सो — शतभिषा नक्षत्र
दा, दी, दू, डे — पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र
16 जुलाई से 23 जुलाई तक
16 जुलाई को लक्ष्यों पर पूर्ण रूप से एकाग्रचित्त होकर ध्यान देंगे। कहीं से कोई शुभ समाचार प्राप्त होंगे। शत्रु व षड़यंत्र सक्रिय रहेंगे, लेकिन आपका बिगाड़ कुछ भी नहीं पाएंगे। प्रबल इच्छाशक्ति व आत्मविश्वास के सहारे आप लाभ प्राप्त करेंगे। 17 व 18 को परिवार में हंसी खुशी का वातावरण रहेगा। बड़े-बुजुर्गों का स्नेह व आशीर्वाद आपकी सबसे बड़ी ताकत होगी। धन प्राप्ति के लिए किए गए प्रयास सफल होंगे। 19 व 20 जुलाई को धन हानि होने के योग हैं। नौकरी में वातावरण बिल्कुल भी आपके पक्ष में नहीं रहेगा। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। 21 से 23 जुलाई
मध्य आप शांति की तलाश में आश्रम, मंदिर या मठ में जा सकते हैं। कोर्ट-कचहरी में परिस्थितियां आपके पक्ष में निर्मित होगी। घर में किसी नवीन वस्तु की खरीददारी संभव है।
ग्रह स्थिति
मासारम्भ में राहु कुंभ राशि का लग्न में, शनि मीन राशि का द्वितीय भाव में, मंगल वृषभ राशि का चतुर्थ भाव में, सूर्य मिथुन राशि का पंचम भाव में, बृहस्पति + बुध + शुक्र कर्क राशि का षष्टम भाव में, केतु सिंह राशि का सप्तम भाव में, चन्द्रमा धनु राशि का ग्यारहवें भाव में चलायमान है।
कुम्भ राशि की शुभ-अशुभ तारीख़ें
| 2026 | शुभ तारीख़ें | सावधानी रखने योग्य अशुभ तारीख़ें |
| जनवरी | 16, 17, 21, 22, 25, 26 | 1, 2, 8, 9, 10, 19, 20, 28, 29 |
| फरवरी | 12, 13, 14, 18, 19, 21, 22, 23 | 4, 5, 6, 15, 23, 24 |
| मार्च | 5, 6, 7, 15, 16, 24, 25 | 8, 9, 13, 14, 15, 17, 18 |
| अप्रैल | 1, 2, 3, 7, 8, 11, 12, 29, 30 | 4, 5, 6, 8, 9, 26, 27, 31 |
| मई | 1, 2, 5, 6, 22, 23, 24, 28, 29 | 1, 2, 19, 20, 24, 25, 28, 29 |
| जून | 1, 2, 19, 20, 24, 25, 28, 29 | 16, 17, 21, 22, 23, 25, 26, 27 |
| जुलाई | 12, 13, 14, 18, 19, 22, 23 | 10, 11, 15, 16, 17, 19, 20 |
| अगस्त | 10, 11, 15, 16, 17, 19, 20 | 1, 2, 11, 12, 20, 21, 28, 29, 30 |
| सितम्बर | 8, 9, 17, 18, 25, 26, 27 | 4, 5, 14, 21, 22, 23 |
| अक्टूबर | 2, 3, 11, 12, 19, 20, 29, 30 | 7, 8, 15, 16, 17, 25, 26 |
| नवम्बर | 3, 4, 5, 11, 12, 13, 22, 23 | 1, 2, 9, 10, 11, 19, 20, 28, 29 |
| दिसम्बर | 2, 3, 4, 13, 14, 22, 23, 30, 31 | 5, 6, 7, 15, 16, 24, 25 |
कुम्भ राशि का वार्षिक भविष्यफल
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कुंभ राशि के लिए यह साल 2026 कुछ मुश्किलों व चुनौतियों से भरा हुआ है। शनि महाराज इस वर्ष पूरे साल दूसरे स्थान में रहेंगे, जो आर्थिक चुनौतियों की स्थिति को दर्शा रहे हैं। वहीं शनि की साढ़ेसाती का वर्ष भर प्रभाव शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर भी ठीक नहीं है। गंभीर व घातक रोगों के प्रति सावधान रहें। वहीं दीर्घकालिक बीमारियां शुगर, ब्लडप्रेशर हार्ट डिजीज में भी नियमित जांच व परीक्षण करवाते रहें। वर्षारंभ में सर्दीजनित रोग, मौसमी बीमारियां परेशान कर सकती हैं। हालांकि इस समय व्यापार के हालात भी कोई बहुत ज्यादा बढ़िया नहीं रहेंगे। आमदनी कम व खर्चा अधिक वाली स्थिति रहेगी। व्यापार व कारोबार के विस्तार को लेकर बनाई गई योजना व प्लानिंग अंधेरे में पड़ जाएगी। आप कुंभ राशि के जातक हैं तथा कुंभ राशि के व्यक्ति विपरीत से विपरित परिस्थिति में साहस व धैर्य का दामन नहीं छोड़ते। इस वर्ष आप व्यापार में नए-नए प्रयोग करके आप जान फूकने का पूरा प्रयास करेंगे। लेकिन परिणाम इतना ठोस नहीं निकल कर आएगा। हां उदारवादिता, मीठे वचन व ग्राहकों के प्रति अच्छा व्यवहार यह चुम्बक की तरह काम करेंगे। लेकिन परिस्थितियां आपको बाधित करती रहेंगी। किसी को उधार रुपया या माल नहीं दें अन्यथा वापस निकलवाने में आपके पसीने निकल जाएंगे। नौकरी में आपको अपने काम को संजीदगी व गंभीरता से लेना चाहिए। आपकी शिकायत की जा सकती है। समाजसेवा व लोकहित से जुड़े हुए विषय आपको आकर्षित करेंगे।
आपकी राशि में राहु की स्थिति के कारण व्यापार व परिवार के बीच में आप बेहतर संतुलन व तारतम्य बिठा देंगे। 2 जून से 31 अक्टूबर के मध्य उच्च के बृहस्पति के कारण विद्यार्थियों का ध्यान अपने लक्ष्य व अध्ययन से भटकेगा। संपत्ति संबंधी विषय उलझेंगे जिस कारण परिवार व भाईयों में तनाव का वातावरण बनेगा। बाद में किसी की मध्यस्थता से तनाव सुलझ भी जाएगा। नौकरी में आपके विरुद्ध कोई व्यक्ति साजिश कर सकता है। आप पर कोई आरोप कलंक लग सकता है। आप यह महसूस करेंगे कि 5 सितंबर तक सातवें केतु के कारण जीवनसाथी हर मुश्किल व कठिन परिस्थिति में आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। रिश्तेदारों से मदद कोई उम्मीद नहीं है, हालांकि ये इस समय आपके मजे लेंगे। इस साल वर्षारंभ में ग्यारहवें भाव में चार-चार ग्रहों के योग के कारण किसी प्रभावशाली या विशिष्ट व्यक्ति का साथ सहयोग जरूर मिलेगा। 27 जुलाई से 11 दिसंबर के मध्य शनि वक्र स्थिति में चलायमान रहेंगे, अतः घर के किसी सदस्य का स्वास्थ्य गड़बड़ होगा, तथा आपको अस्पताल के चक्कर काटने पड़ सकते हैं। इस दरम्यान कोई बड़ा आर्डर, डील या बड़ा काम आपके हाथों से निकल सकता है। यह साल विपरीत परिस्थितियों का द्योतक है, अतः आपको वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। संतान के करियर व नौकरी को लेकर चिंता रहेगी, भूमि, भवन, वाहन चल-अचल संपत्ति की खरीद के लिए ऋण लेना पड़ सकता है। लेकिन सावधानी के साथ पढ़े किसी भी कागजाद पर हस्ताक्षर नहीं करें। कोर्ट केस में हालात व स्थितियां इतनी पक्ष में नहीं रहेंगी, फिर भी आप डटकर शत्रुओं, विरोधियों व परिस्थितियों का मुकाबला करेंगे। आयकर, जीएसटी, सैल्स टैक्स आदि से जुड़ी हुई को सरकारी समस्या भी पेश आ सकती है।
शारीरिक सुख एवं स्वास्थ्य:-
यह साल शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से ढीला है। इस साल शनि की साढ़े साती का प्रभाव रहेगा। रोग हावी रहेगा। मौसमी बीमारियों का योग रहेगा। गंभीर व घातक बीमारी का योग नहीं है। बुरी आदतों का त्याग करें अन्यथा आप किसी गंभीर व घातक बीमारी को नियंत्रण दे बैठेंगे। दीर्घकालिक बीमारियों, डायबिटीज, हार्टडिजीज, ब्लड प्रेशर आदि के प्रति गंभीर रहें। किसी भी प्रकार की लापरवाही के परिणाम घातक रह सकते हैं। योग, व्यायाम, पैदल घूमना, फिरना, खान-पान जैसी चीजों का खास ध्यान रखें। 27 जुलाई से 11 दिसंबर मध्य वक्री शनि के कारण घर के किसी सदस्य का स्वास्थ्य चिंता का विषय बन सकता है।
व्यापार, व्यवसाय व धन:-
रुपयों पैसों के मामले में समय प्रतिकूल है। आप भरसक प्रयास व परिश्रम करके भी गाड़ी को पटरी पर नहीं ला पाएंगे। शनि की साढ़ेसाती के कारण नए-नए विचार व आइडियाज आएंगे, परंतु कार्यरुप में परिणित नहीं हो पाएंगे। कुछ विचार आंशिक रूप से परिणित भी होंगे, तो उनमें अपेक्षित लाभ प्राप्ति में संशय रहेगा। निवेश करने से पूर्व या कोई व्यापारिक करार अनुबंधन करने से पूर्व उस विषय पर विशेषज्ञ से कानूनी सलाह ले सकते हैं। भागीदार व पार्टनर की हर गतिविधि हरकत पर पैनी नजर रखें। विश्वास में विश्वासघात हो सकता है। काम-काज में आपका पूरा ध्यान व फोकस प्रोडेक्शन (क्वांटिटी) बढ़ाने पर रहेगा। परंतु उसमें कहीं न कहीं गुणवत्ता (क्वालिटी) के साथ समझौता कर बैठेंगे। रुपयों-पैसों के मामले में किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा नहीं। नौकरी में लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आप प्रयासरत रहेंगे। लक्ष्य पूरे नहीं होने पर बॉस व अधिकारी की डांट फटकार सुननी पड़ सकती है। संपत्ति को लेकर जो विवाद चला आ रहा था, वह बातचीत के माध्यम से हल हो जाएगा। 27 जुलाई से 11 दिसंबर के मध्य आपका रुपया कहीं पर रुक व अटक जाएगा। शनि वक्र स्थिति में चलायमान है। किसी भी कागज या दस्तावेज पर हस्ताक्षर बिना पढ़े नहीं करें। धैर्य व संतोष से काम लें। मकान की मरम्मत, संपत्ति के रख-रखाव पर खर्चा होगा। अपरिचित व अजनबी व्यक्तियों से लेन-देन व व्यवहार नहीं करें। उधार से बचें।
घर-परिवार संतान व रिश्तेदार:-
घर-परिवार में वातावरण थोड़ा तनावपूर्ण रहेगा। संतान की गतिविधि कार्यकलाप तनाव का मूल विषय रहेगी। दाम्पत्य जीवन में मधुरता का रस घुलेगा। इस वर्ष परिवार आपकी प्राथमिकता का विषय रहेगा। व्यापार व परिवार दोनों में से चुनाव करना हो तो आप परिवार का चुनाव करेंगे। संतान पर अध्ययन, करियर, शिक्षा आदि का अधिक तनाव नहीं बनाएं, अन्यथा संतान डिप्रेशन में आ सकती है या विद्रोही हो सकती है। भाईयों से संपत्ति व बंटवारे संबंधी विवाद का हल घर में सामंजस्यपूर्वक शांतिपूर्ण वातावरण में होगा। 27 जुलाई से 11 दिसंबर के मध्य परिवार के किसी वरिष्ठ सदस्य के स्वास्थ्य को लेकर सचेत रहें। इस प्रतिकूल समय में भी रिश्तेदार आपकी गलतियां निकालेंगे, आलोचना करेंगे। आपको अपना व्यवहार बहुत ही संयमित रखना चाहिए। ननद-भौजाई, सास-बहु की हल्की-फुल्की नोंक-झोंक अप्रैल से सितंबर के मध्य चलती रहेगी।
विद्याध्यन, पढ़ाई व करियर:-
इस वर्ष शनि दूसरे स्थान में गतिशील है। वहीं बृहस्पति वर्षारंभ में 2 जून तक पंचम स्थान में गतिशील है। अतः साल के प्रारंभ में तो विद्यार्थी वर्ग अपने करियर, अध्ययन को लेकर गंभीर व सतर्क रहेंगे। नौकरी से संबंधित परीक्षा, विभागीय परीक्षा, जॉब इंटरव्यू आदि में वर्ष के पूर्वार्द्ध में सफलता मिल जाएगी। 2 जून के बाद कहीं न कहीं ध्यान भटक जाएगा। नौकरी में जॉब में अस्थायित्व आएगा। बृहस्पति छठे भाव में रहेगा, तो कार्यक्षेत्र में शत्रु सक्रिय हो जाएंगे। लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाने का भी दबाव रहेगा। 27 जुलाई से 11 दिसंबर के मध्य वक्री शनि के कारण प्रेम-प्रसंग व गलत सोहबत में आप पड़ सकते हैं, जिसका प्रभाव आपके अध्ययन पर पड़ सकता है । लीगल सेक्टर, तकनीकी शिक्षा व मैजमेंट के विद्यार्थियों के लिए समय अच्छा रहेगा।
प्रेम-प्रसंग व मित्र:-
इस साल मित्रों की भीड़ रहेगी, परंतु उस भीड़ में सही सच्चे मित्र आपको नहीं मिल पाएंगे। अवसरवादी मित्रों का साथ रहेगा। मुसीबत व संकट के समय आपको एक भी मित्र नजर नहीं आएगा। प्रेम-प्रसंग व प्रेम संबंधी कहीं न कहीं बदनामी व अपयश का कारण बन सकते हैं। 2 जून के बाद छठा बृहस्पति प्रेम संबंधों को उजागर करवा सकता है तथा उससे घर की शांति बाधित हो सकती है। कुंभ राशि के जातक वैसे भी प्रेम संबंधों के मामले में स्वछंद विचारों वाले होते हैं। परंतु कहीं न कहीं यह स्वछंदता घातक हो सकती है।
वाहन, खर्च व शुभकार्य:-
इस साल वाहन सुख का तो पूरा योग बना हुआ है। लेकिन वाहन पर खर्च के भी योग इस साल ज्यादा हैं। वैसे अगर खर्चों की बात करें तो समग्र रूप से ही इस साल खर्च ज्यादा ही होगा। कुछ फिजुलखर्ची व व्यर्थ के खर्चों की भी परिस्थितियां रहेंगी। इस वर्ष आपको बड़ी राशि संतान पर खर्च करनी पड़ सकती है। आमदनी अठन्नी व खर्चा रुपया वाली स्थिति रहेगी। वर्षारंभ में मंगल एकादश स्थान में है तथा 27 जुलाई से 11 दिसंबर के मध्य वाहन द्वारा कोई अपहति या क्षति हो सकती है। वक्री शनि के कारण अगर आप वाहन चलाते हैं तो सीटबैल्ट, हैलमेट व ट्रैफिक नियमों का पालन करें। शराब पीकर वाहन चलाना, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग सीधे रूप से दुर्घटना को निमंत्रण है।
हानि, कर्ज व अनहोनी:-
इस वर्ष धनहानि होने के प्रबल योगायोग हैं। जिस पर आपने सबसे ज्यादा भरोसा या विश्वास किया वही आपके साथ विश्वासघात करेगा, आपकी पीठ में छुरी घोपेगा। शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव है। अतः व्यापार में भी कुछ गलत निर्णय होंगे, जिनका खामियाजा आपको भुगतना पड़ सकता है। निवेश से संबंधी निर्णय काफी सोच- विचार व प्रोपर स्टडी करने के बाद ही करना चाहिए। किसी की चिकनी चुपड़ी बातों में न आवें। 27 जुलाई से 11 दिसंबर के मध्य वक्री शनि अनहोनी का कारण बन सकता है। व्यापार को चलाने के लिए व अपने खर्चों को चलाने के लिए ऋण लेना पड़ सकता है।
यात्राएं :-
इस वर्ष 2 जून से पूर्व पंचम बृहस्पति के कारण छोटी-मोटी यात्राएं परिवार के साथ धार्मिक यात्राओं की स्थिति बन सकती है। व्यापार व काम-काज के लिए भी वर्ष के मध्य में यात्राएं होंगी, परंतु यात्राएं धनप्रद नहीं होगी।
उपाय:-
वर्ष की शुभता में वृद्धि के लिए 7 प्रकार के अनाज व दालों को मिश्रित कर पक्षियों को चुगावें । ॐ शं शैश्चराय नमः मंत्र की 1 माला नित्य करें। शनिवार को शनि मंदिर में तिल व तेल चढ़ावें । समुद्री नाव की कील की या काले घोड़े की नाल को लोहे की अगूंठी मध्यमा उंगली में धारण करें।
कुम्भराशि की चारित्रिक विशेषताएं
आपकी राशि का स्वामी शनि है। शनि के कारण कुंभ राशि का जातक प्रायः मेहनती तथा स्वाभिमानी होता है, अपने स्वयं की मेहनत व परिश्रम के बलबूते पर आगे बढ़ता है। शनि पाप ग्रह है तथा इनका रंग काला है। कुंभ राशि वाला व्यक्ति प्रायः मध्यम कद, गेहुएं वर्ण, सिर गोल, फूले हुए नथुने व गाल, दीर्घकाय, तोंदयुक्त, गंभीर वाणी बोलने वाला व्यक्ति होता है। यह राशि पुरुष जाति सूचक, स्थिर संज्ञक व वायु तत्व प्रधान होती है। इस राशि वाले पुरुष का प्राकृतिक स्वभाव विचारशील, शांत चित्त, धर्मभीरु तथा नवीन आविष्कारों का प्रजनन है।
कुंभ राशि का चिह्न ‘जल से परिपूर्ण घट लिए हुए स्त्री' है। अतः इस राशि वाले पुरुष की आकृति घड़े के समान गोल व घट के समान गंभीर व गहरी होती है। ऐसे व्यक्ति प्रायः बाहरी दिखावे में ज्यादा विश्वास रखते हैं। ये पूर्णतया रहस्यवादी व्यक्ति होते हैं । व्यापारिक क्षेत्र में अपनी पूंजी का फैलाव सही पूंजी से कई गुना अधिक करते हैं। इनकी वास्तविकता को पहचान पाना बड़ा ही कठिन है। ये बड़े-से-बड़ा जोखिम लेने में भी नहीं हिचकिचाते।
कुंभ राशि में उत्पन्न जातक स्वस्थ, बलवान एवं चंचल होते हैं, इनका व्यक्तित्व आकर्षक होता है, जिससे अन्य जन इनसे प्रभावित रहते हैं। ये स्वभाव से ही प्रगतिशील एवं क्रान्तिकारी विचारधारा से युक्त होते हैं तथा पुराने रीति-रिवाजों को कम ही स्वीकार करते हैं। अन्य जनों के प्रति इनके मन में स्नेह एवं सहानुभूति का भाव विद्यमान रहता है। धार्मिकता की भावना कम एवं आधुनिकता से परिपुष्ट विचारों के होते हैं। साहित्य एवं कला में रुचि के साथ-साथ ये उत्तम वक्ता भी होते हैं।
इनका सांसारिक दृष्टिकोण विशाल होता है तथा इनके हृदय में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं रहता है। अध्ययन के प्रति इनकी रुचि होती है तथा परिश्रमपूर्वक विभिन्न शास्त्रों का ज्ञान अर्जित करके एक विद्वान के रूप में सामाजिक मान-प्रतिष्ठा एवं सम्मान अर्जित करते हैं। अवसरानुकूल इनको नेतृत्व का भी अवसर प्राप्त हो जाता है। ये भावुकता से कोई भी कार्य नहीं करते तथा बुद्धिमत्तापूर्वक सोच-समझकर अपने कार्यों को पूर्ण करते हैं। धन, ऐश्वर्य, वैभव एवं भौतिक सुख-संसाधनों को अर्जित करके आनन्दपूर्वक इनका उपयोग करते हैं।
अतः इसके प्रभाव से आप स्वस्थ एवं बलवान होंगे, परन्तु मन में अस्थिरता का भाव होगा। आप अपनी विद्वता एवं बुद्धिमत्ता से शुभ एवं महत्त्वपूर्ण कार्यों को सम्पन्न करके इनमें सफलता अर्जित करेंगे, फलतः आपका उन्नति का मार्ग प्रशस्त रहेगा। आपकी दृष्टि भी सूक्ष्म रहेगी तथा अन्य जनों को प्रभावित करके उनके विषय में पूर्ण ज्ञान प्राप्त करने में समर्थ होंगे।
आपका व्यक्तित्व आकर्षक होगा तथा अन्य जन आपसे प्रभावित रहेंगे। आप में पराक्रम एवं तेजस्विता का भाव भी रहेगा। फलतः अपने सांसारिक महत्त्व के कार्य-कलापों को आप परिश्रम से सम्पन्न करेंगे तथा इनमें सफलता प्राप्त करेंगे। यदा-कदा उग्रता के प्रदर्शन से आपको अनावश्यक समस्याओं तथा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
आर्थिक रूप से आपकी स्थिति सामान्यतया अच्छी रहेगी तथा आवश्यक मात्रा में धन एवं लाभ अर्जित करने में समर्थ होंगे। आप भ्रमणप्रिय होंगे और अवसरानुकूल भ्रमण तथा यात्रा आदि पर अपना काफी समय व्यतीत करेंगे। साथ ही व्यय भी आप मुक्त भाव से करेंगे, लेकिन उत्तम आय होने के कारण इनका कोई विशेष दुष्प्रभाव नहीं होगा।
धर्म के प्रति आपके मन में श्रद्धा रहेगी, परन्तु धार्मिक कार्य-कलापों एवं अनुष्ठानों को आप अल्प मात्रा में ही सम्पन्न करेंगे। यदा-कदा तीर्थ यात्रा पर भी आप जा सकते हैं। इस प्रकार आप पराक्रमी, बुद्धिमान एवं परिश्रमी पुरुष होंगे तथा भौतिक सुखों का उपभोग करते हुए आनन्दपूर्वक अपना समय व्यतीत करेंगे।
कुंभ राशि शीर्षोदय तथा तमोगुणी राशि है। इस राशि वाले जातक गुस्सा कम करते हैं और करते हैं तो फिर गांठ बांध लेते हैं। आप एकान्तप्रिय व्यक्ति हैं तथा स्वार्थपूर्ण भावनाओं से परिपूर्ण हैं। अगर आपका जन्म ‘धनिष्ठा’ नक्षत्र में है तो आप सर्वदा सरल स्वभाव वाले, उदार हृदय व स्नेहयुक्त व्यवहार से कीर्ति पाने वाले व्यक्ति हैं। अगर आप व्यापारी वर्ग के व्यक्ति हैं, तो आपका 'वाहन - योग' 36 वर्ष की अवस्था में बनता है।
धनिष्ठाः- यदि आपका जन्म कुंभ राशि के 'धनिष्ठा नक्षत्र' तृतीय व चतुर्थ चरण (गू, गे) में हुआ है, तो आपका जन्म 7 वर्ष की मंगल की महादशा में हुआ है। आपकी योनि - सिंह, गण-राक्षस, वर्ण- -शूद्र, हंसक-वायु, नाड़ी - मध्य, पाया - तांबा एवं वर्ग-बिलाव है। धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति निडर एवं निर्भीक होता है। ये संगीत प्रेमी होते हैं और समाज में इनकी बहुत प्रतिष्ठा होती है।
राहु की शतभिषाः- यदि आपका जन्म कुंभ राशि के 'शतभिषा नक्षत्र' (गो, सा, सी, सू) में हुआ है, तो आपका जन्म 18 वर्ष की महादशा में हुआ है। आपकी योनि-अश्व, गण-राक्षस, वर्ण-शूद्र, हंसक- वायु, नाड़ी-आद्य, पाया-तांबा, प्रथम चरण का वर्ग- बिलाव तथा अंतिम तीनों चरणों का वर्ग-मेढ़ा है। इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति कूटनीतिज्ञ होते हैं। दूसरों को चकमा देकर अपना काम कराने में सिद्धहस्त होते हैं।
पूर्वाभाद्रपद :- यदि आपका जन्म कुंभ राशि के 'पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र' के प्रथम चरण (से, सो, द) में हुआ है, तो आपका जन्म 16 वर्ष की बृहस्पति की महादशा में हुआ है। आपकी योनि - सिंह, गण-मनुष्य, वर्ण-शूद्र, हंसक-वायु, नाड़ी-आद्य, पाया-लोहा, प्रथम व द्वितीय चरण का वर्ग-मेढ़ा तथा तृतीय चरण का वर्ग- सर्प है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक छोटी-छोटी बातों से उद्विग्न व तनावग्रस्त हो जाते हैं। इनमें स्वाभिमान की मात्रा विशेष होती है।
कुंभ राशि द्विबली व पश्चिम दिशा की स्वामिनी है। इस राशि से पेट के भीतरी भागों पर विचार किया जाता है। आपका स्वभाव मृदु, सरल एवं सद्गुणों से परिपूर्ण है, परन्तु संकोचशीलता आपकी कमी है। आपको प्रतिपल एक वहम-सा रहता है। आप ऐसा सोचते हैं कि अन्य जन आप से ईर्ष्या कर रहे हैं और आप अकारण उनसे उलझ पड़ते हैं। यदि आप में यह आदत विद्यमान है, तो यह कभी भी खतरनाक साबित हो सकती है। यदि आपको किसी प्रकार के दुःस्वप्न आते हैं, अकारण खिन्नता महसूस
होती है एवं बनते कार्यों में दिक्कत एवं रुकावटें आती हैं तो फौरन ‘शनि मुद्रिका' धारण करें। शनि मुद्रिका काले घोड़े के पैर की घुड़नाल से बनाई जाती है। यह लोहे की होती है। शनि का रत्न 'नीलम' भी आपके लिए अत्यधिक अनुकूल व लाभप्रद रहेगा।
उपाय :- नीलम रत्न 44 रत्ती का धारण करें। शनिवार को शनि मंदिर में तिल व तेल चढ़ाएं। बैंगनी रंग का सुगन्धित रुमाल पास में रखें।
म के अभाव में काकानीली या कटैला रत्न धारण करें। काले उड़द जल में प्रवाहित करें। रोटी पर सरसों का तेल लगाकर कुत्ते या कौवे को खिलाएं। चींटियों को खाना खिलाएं।
कुंभ राशि की प्रमुख विशेषताएं
- राशि – कुंभ
- राशि चिन्ह – जल से भरा घड़ा
- राशि स्वामी – शनि
- राशि तत्व – वायु तत्त्व
- राशि स्वरूप – स्थिर
- राशि दिशा – पश्चिम
- राशि लिंग व गुण – पुरुष, तमोगुणी
- राशि जाति – शूद्र
- राशि प्रकृति व स्वभाव – क्रूर स्वभाव, त्रिधातु प्रकृति
- राशि का अंग – पैर
- अनुकूल रत्न – नीलम
- अनुकूल उपरत्न – काकानील, कटैला
- अनुकूल धातु – लोहा, त्रिलोह
- अनुकूल रंग – नीला, आसमानी, काला
- शुभ दिवस – शनिवार, शुक्रवार
- अनुकूल देवता – शनिदेव
- व्रत / उपवास – शनिवार
- अनुकूल अंक – 8
- अनुकूल तारीखें – 8, 17, 26
- मित्र राशियां – मीन, वृषभ, मकर
- शत्रु राशियां – कर्क, मेष, सिंह
- व्यक्तित्व – अवधूत, योगी, साधक, तपस्वी
- सकारात्मक तथ्य – सत्यनिष्ठ, अन्वेषक, यशस्वी, समाजप्रिय, कुंटुंब प्रेमी
- नकारात्मक तथ्य – लगातार विचार बदलने की प्रवृत्ति