LAC, कैलाश मानसरोवर यात्रा, जिनपिंग का भारत दौरा! डोभाल की चीन यात्रा क्यों है खास, किन मुद्दों पर हुई बात?
Published: Wednesday, August 26, 2026, 10:21 [IST]
Ajit Doval China Visit: भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ समय से दिख रही नरमी के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का बीजिंग दौरा काफी अहम माना जा रहा है। मंगलवार को डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत की। बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई।
दोनों देशों ने आपसी सहयोग और द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया। यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब सितंबर में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना जताई जा रही है।
डोभाल और वांग यी के बीच सीमा पर अहम चर्चा
बीजिंग में हुई बैठक के दौरान अजीत डोभाल और वांग यी ने भारत-चीन सीमा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की। दोनों पक्षों का जोर इस बात पर रहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता कायम रहे। डोभाल ने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में सामान्य स्थिति लौटने की बड़ी वजह सीमावर्ती इलाकों में शांति बनाए रखना है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों को इस दिशा में अपने प्रयासों को और प्रभावी बनाने की जरूरत है। चीन की ओर से भी सीमा विवाद को उचित तरीके से संभालने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने पर जोर दिया गया।
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अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी बनी हुई है तनातनी
भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर लंबे समय से मतभेद हैं। चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता रहा है और इसे दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है, जबकि भारत उसके दावे को पूरी तरह खारिज करता है। डोभाल और वांग यी की बातचीत में सीमा से जुड़े मतभेदों को शांतिपूर्ण तरीके से संभालने पर जोर रहा। डोभाल ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के हित में है। ऐसे में यह बैठक अरुणाचल प्रदेश समेत सीमा विवाद के मुद्दे पर आगे की बातचीत के लिए अहम मानी जा रही है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमा व्यापार का भी जिक्र
डोभाल ने बैठक के दौरान दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया। उन्होंने नाथू ला के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा के सफल आयोजन को अहम उपलब्धि बताया। इसके अलावा तीनों दर्रों के जरिए पारंपरिक सीमा व्यापार दोबारा शुरू होने की बात भी सामने आई। भारत का मानना है कि ऐसे कदमों से दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को फायदा मिल सकता है। इससे न सिर्फ लोगों के बीच संपर्क बढ़ेगा, बल्कि लंबे समय से तनावपूर्ण रहे रिश्तों में विश्वास बहाली की प्रक्रिया को भी मजबूती मिल सकती है।
शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले क्यों अहम है मुलाकात?
डोभाल और वांग यी की बातचीत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सितंबर में BRICS शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है और इसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना है। अगर शी भारत आते हैं तो BRICS बैठक के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी अलग मुलाकात भी हो सकती है। ऐसे में सीमा विवाद, द्विपक्षीय व्यापार और आपसी संबंधों से जुड़े मुद्दे बातचीत में उठ सकते हैं। डोभाल-वांग वार्ता को इसी संभावित उच्चस्तरीय बैठक की जमीन तैयार करने वाली अहम कड़ी के तौर पर भी देखा जा रहा है।
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2003 में शुरू हुई थी विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत की व्यवस्था साल 2003 में शुरू की गई थी। करीब 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़े विवाद के समाधान के लिए दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि समय-समय पर बातचीत करते रहे हैं। भारत की ओर से अजीत डोभाल और चीन की तरफ से वांग यी इस प्रक्रिया से जुड़े प्रमुख चेहरे हैं। डोभाल के मौजूदा दौरे में भी इसी व्यवस्था के तहत बातचीत हुई। इससे पहले उन्होंने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की थी, जिसमें सीमा पर शांति और द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने पर चर्चा हुई।