नेपाल त्रासदी LIVE: ठाणे के 10 कैलाश मानसरोवर यात्री अब भी लापता; मृतकों का आंकड़ा 1252 पहुंचा
12:12 PM, 03-Sep-2026
मृतकों की संख्या 1,252 पहुंची, 4,875 लोग अब भी लापता
नेपाल में प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद होने के साथ ही बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,252 हो गई है। वहीं, हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल पुलिस की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा 355 शव चितवन जिले से बरामद हुए हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट से 218 और नवलपरासी वेस्ट से 208 शव मिले हैं। नवलपरासी वेस्ट के आंकड़े में भारत से बरामद कर सौंपे गए 18 शव भी शामिल हैं। इसके अलावा नुवाकोट से 177, रासुवा से 127, गोरखा से 69, धादिंग से 60 और तनाहुन से 38 शव बरामद किए गए हैं। नेपाल सेना के नेतृत्व में संयुक्त बचाव दल गुरुवार को हादसे के नौवें दिन भी प्रभावित इलाकों में तलाशी और राहत अभियान चला रहे हैं। पुलिस के अनुसार, अभी 4,875 लोगों के लापता होने का अनुमान है।
10:49 AM, 03-Sep-2026
तिब्बत में करीब 100 नेपाली लापता, भारत में मिले 19 शव; 1500 अब भी फंसे
तिब्बत में करीब 100 नेपाली नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने बुधवार को इसकी पुष्टि की। इस आपदा में नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही हुई है। नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1,200 से अधिक हो चुकी है, जबकि 4,875 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। फ्लैश फ्लड के एक सप्ताह बाद भी कई प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता छेत्री के मुताबिक, रसुवा जिले की भोटेकोशी नदी में बह गए कम से कम 19 लोगों के शव भारत में बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि शव भोटेकोशी नदी से त्रिशूली और नारायणी नदी के रास्ते बहते हुए भारत पहुंचे। इन शवों को नेपाल की सीमा से लगे भारत के रुपन्देही और नवलपरासी पश्चिम जिलों के आसपास बरामद किया गया। नेपाल के अधिकारियों को शव सौंपने की प्रक्रिया चल रही है।
छेत्री ने बताया कि बाढ़ के दौरान तिब्बत में करीब 100 नेपाली नागरिक लापता हो गए। वहीं, तीर्थयात्रा और कारोबार के सिलसिले में तिब्बत गए करीब 3,000 नेपाली नागरिक वहां फंस गए थे। इनमें से 2,500 से अधिक नेपाली सुरक्षित रूप से नेपाल लौट चुके हैं। अधिकांश लोगों ने हिल्सा और तातोपानी सीमा चौकियों के जरिए वापसी की, जबकि कुछ नागरिकों को हवाई मार्ग से भी नेपाल लाया गया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, तिब्बत के केरुंग सीमा क्षेत्र में अभी भी करीब 1,500 नेपाली नागरिक फंसे हुए हैं। उन्हें सुरक्षित तरीके से नेपाल वापस लाने के लिए दोनों देशों के अधिकारी लगातार बातचीत कर रहे हैं।
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09:28 AM, 03-Sep-2026
ठाणे के 10 कैलाश मानसरोवर यात्री अब भी लापता, परिवारों की उम्मीदें धुंधली
नेपाल-चीन सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद महाराष्ट्र के ठाणे जिले के 10 कैलाश मानसरोवर यात्री अब तक लापता हैं। परिवार लगातार उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए हुए हैं, लेकिन प्रभावित इलाके में संचार व्यवस्था ठप होने से उनकी चिंता बढ़ती जा रही है। बाढ़ के दौरान तिमुरे स्थित चीनी इमिग्रेशन चेकपॉइंट के पास भारी तबाही हुई थी। इस घटना में स्थानीय संचार ढांचा भी क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद लापता यात्रियों से संपर्क नहीं हो सका। ठाणे से यात्रा पर गए दो पर्यटकों के सुरक्षित घर लौटने की जानकारी है।
अब तक जिले के डोंबिवली निवासी प्रकाश शांताराम माने और उनकी पत्नी प्रतिभा ही सुरक्षित वापस लौटे हैं। बाकी 10 यात्रियों के परिजन लगातार प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर उन्हें तलाशने की अपील कर रहे हैं। लापता यात्रियों में सतीश विनायक पाटणकर और उनकी पत्नी रेखा पाटणकर भी शामिल हैं। सतीश के भाई संजय पाटणकर ने बताया कि बाढ़ आने के बाद से परिवार का उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है।
जिला आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के अनुसार लापता यात्रियों में समीर मुकुंद जोशी, अपर्णा समीर जोशी, सुनील सुदर्शन सुभेदार, संजय राजमल पाटिल, नलिनी संजय पाटिल, रजनीश रघुनाथ नातू, यशस भंड और अभिषेक घोने शामिल हैं। इनके अलावा सतीश और रेखा पाटणकर भी लापता हैं। ठाणे जिला प्रशासन ने बताया कि लापता यात्रियों का पता लगाने के लिए नेपाल में आपदा राहत दलों और टूर ऑपरेटरों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
09:21 AM, 03-Sep-2026
अब तक 166 भारतीयों का रेस्क्यू, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 410 भारतीय चीन से लौटे
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत का राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें बुधवार को बचाए गए तीन लोग भी शामिल हैं। वहीं, कैलाश मानसरोवर यात्रा और अन्य गतिविधियों के लिए तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र गए 410 भारतीय नागरिक बुधवार को चीन से रवाना हो गए। भारत ने बुधवार को राहत सामग्री की पांचवीं खेप नेपाल भेजी। भारतीय वायुसेना का एक विमान काठमांडू पहुंचा, जिसमें करीब 5.5 टन चिकित्सा सामग्री भेजी गई। इसमें एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक दवाएं, सर्जिकल उपकरण और अन्य आवश्यक दवाएं शामिल हैं।
इसके साथ ही विमान में 11 सदस्यीय विशेष बचाव दल और छह टन से अधिक आधुनिक रेस्क्यू उपकरण भी भेजे गए। भारत अब तक नेपाल को लगभग 74 टन राहत सामग्री उपलब्ध करा चुका है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने राहत सामग्री नेपाल सरकार को सौंपी। यह सहायता 26 अगस्त को तिब्बत में ग्लेशियर ध्वस्त होने के बाद आई भीषण फ्लैश फ्लड से प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों के लिए दी गई है। भारतीय सुरंग बचाव दल ने अपना बेस त्रिशूली से स्याब्रुबेसी स्थानांतरित कर दिया है, जिससे चिलीमे सुरंग तक पहुंचने में कम समय लगेगा। नेपाली सेना के साथ संयुक्त अभियान के दौरान दल ने कीचड़ और मलबे से भरी सुरंग में लगभग 100 मीटर आगे तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
एमईए ने बताया कि भारी मशीनरी पहुंचाने के लिए सुरंग तक अस्थायी सड़क बनाने की संभावना भी तलाश की जा रही है। बुधवार को भारत से पहुंचे 11 विशेषज्ञ त्रिशूली बाजार के पास पहुंच चुके हैं और गुरुवार से नेपाली सेना के साथ अभियान में शामिल होंगे। भारतीय फॉरेंसिक टीम काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में नेपाली विशेषज्ञों के साथ मिलकर डीएनए नमूनों की जांच और पहचान का काम कर रही है। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बुधवार सुबह तक बाढ़ में बहकर गए 1,114 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 3,916 लोग अब भी लापता हैं।
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने संसद में कहा कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से बढ़ते खतरों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गंभीरता से ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि यह आपदा नेपाल के भविष्य और जलवायु संकट को लेकर कई बड़े सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के पास लेंगदे खोला पर हिमस्खलन से प्राकृतिक बांध बन गया था। बाद में यह बांध टूटने से भोटेकोशी नदी में भीषण बाढ़ आई, जिसने त्रिशूली नदी तक के क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई।
07:58 AM, 03-Sep-2026
नेपाल-चीन सीमा पर भी सामने आई बड़ी चुनौती
इस हादसे ने सीमा पार आपदा निगरानी की कमी को भी उजागर किया है। ल्हेंदे खोला का उद्गम तिब्बत में होता है और इसके बाद यह नदी नेपाल में प्रवेश करती है। लेकिन नेपाल और चीन के बीच इस तरह की अचानक आने वाली आपदाओं के लिए समान रूप से संचालित प्रभावी अर्ली वार्निंग प्रोटोकॉल नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक, हिमालयी इलाकों का दुर्गम भूगोल और सीमित संसाधन दूरदराज के क्षेत्रों में निगरानी को बेहद चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।
बचाव दल अब भी मलबे के बीच लोगों की तलाश में जुटे हैं। खासतौर पर हाइड्रोपावर सुरंगों के आसपास खुदाई, ड्रिलिंग और मलबा हटाने का काम जारी है, जहां लोगों के फंसे होने की आशंका है। काठमांडू में बड़ी संख्या में परिवारों ने बरामद शवों की पहचान में मदद के लिए डीएनए नमूने दिए हैं। शवगृहों में जगह कम पड़ने के कारण कुछ पीड़ितों का अंतिम संस्कार भी किया जा चुका है। भारत में भी नीचे की ओर बहने वाली नदियों से कम से कम 17 शव बरामद किए गए हैं।
07:39 AM, 03-Sep-2026
नेपाल त्रासदी LIVE: ठाणे के 10 कैलाश मानसरोवर यात्री अब भी लापता; मृतकों का आंकड़ा 1252 पहुंचा
नेपाल में चीन सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने देश के आपदा चेतावनी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 26 अगस्त को सुबह 8:37 बजे ल्हेंदे घाटी में बर्फ और चट्टानों का भारी मलबा नीचे आया, लेकिन प्रभावित इलाकों के लिए चेतावनी 38 मिनट बाद सुबह 9:15 बजे जारी की गई। कुछ लोगों तक यह संदेश इससे भी देर से पहुंचा।
8:37 बजे टूटा ग्लेशियर, देखते ही देखते मची तबाही
26 अगस्त की सुबह ल्हेंदे घाटी में ग्लेशियर के टूटने के साथ बर्फ, पानी, चट्टानों और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर बढ़ा। अचानक आई इस बाढ़ ने रास्ते में आने वाले इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल में राहत और बचाव दल अब तक 1,204 शव बरामद कर चुके हैं, जबकि 4,216 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। चीन की ओर से 21 मौतों और 541 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। दोनों देशों को मिलाकर मृतकों की संख्या 1,225 और लापता लोगों की संख्या 4,757 हो गई है। नेपाल और चीन में लापता लोगों में 30 से अधिक देशों के 800 से ज्यादा विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।