LNJP में 225 करोड़ के नए भवन में हैंडओवर विवाद: ठेकेदार ने जड़ा ताला, प्रबंधक को धमकाने का आरोप; निदेशक बोले-अधूरे भवन की जिम्मेदारी कैसे लें - Patna News
पटना6 घंटे पहले
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एशिया के सबसे बड़े हड्डी रोग हॉस्पिटल लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल (LNJP) के 400 बेड वाले नए सुपर स्पेशियलिटी भवन के हैंडओवर को लेकर विवाद सामने आया है।
आरोप है कि भवन निर्माण करने वाले ठेकेदार अंबुज सिंह पर ने नए भवन के गेट, एसी और शौचालयों में पर ताला लगा दिया है। अस्पताल प्रबंधन ने भवन को अधूरा बताते हुए हैंडओवर लेने से इनकार कर दिया था।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि 225 करोड़ रुपए की लागत से बने इस भवन में अभी कई काम बाकी हैं। जरूरी उपकरण और संसाधन भी उपलब्ध नहीं हैं।
इसके अलावा 400 बेड के संचालन के लिए 168 डॉक्टर और 131 ग्रेड-ए नर्स समेत बड़ी संख्या में अन्य कर्मचारियों की जरूरत है, जो अभी उपलब्ध नहीं हैं।
इस कारण सोमवार को नए भवन में संचालित ओपीडी, फिजियोथेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी की सेवाएं प्रभावित हुईं। मरीजों को पुराने भवन में भेजना पड़ा। पार्किंग को लेकर भी अस्पताल परिसर में गहमागहमी की स्थिति बनी रही।
निदेशक बोले- अधूरे भवन की जिम्मेदारी कैसे लें?
अस्पताल निदेशक डॉ. राकेश चौधरी ने इस संबंध में बिहार मेडिकल सर्विसेज इंफ्रास्ट्रक्चर एंड कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMSCIL) को पत्र भेजा है। पत्र में ठेकेदार अंबुज सिंह पर दबाव बनाने, धमकी देने और अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है।
सोमवार को इस पत्र की प्रतिलिपि BMSCIL के महाप्रबंधक, मुख्य महाप्रबंधक (प्रोजेक्ट), स्वास्थ्य विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी और सचिव को भी भेजी गई है।
ठेकेदार पर दबंगई दिखाने और धमकाने का आरोप
अस्पताल प्रबंधन के , 18 सितंबर की शाम करीब 4 बजे ठेकेदार निदेशक कक्ष पहुंचे और नए भवन का हैंडओवर लेने का दबाव बनाया। निदेशक ने भवन में पर्याप्त मैनपावर और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने का हवाला देते हुए तत्काल हैंडओवर लेने में असमर्थता जताई।
प्रबंधन का कहना है कि भवन की जिम्मेदारी लेने के बाद यदि कोई उपकरण खराब होता है, सामान चोरी होता है या तकनीकी समस्या आती है तो इसकी जवाबदेही अस्पताल पर आएगी। ऐसे में पर्याप्त संसाधन और सुरक्षा के बिना भवन का हैंडओवर लेना व्यावहारिक नहीं है।
एसी-शौचालय में ताला लगाने का आरोप
आरोप है कि इसके बाद ठेकेदार ने दबंगई दिखाते हुए अस्पताल प्रबंधक को भवन खाली करने का दबाव बनाया। ठेकेदार ने बिजली-पानी बंद करने की धमकी भी दी।
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, विवाद के अगले दिन 19 सितंबर को नए भवन का एसी बंद कर दिया गया। पुरुष, महिला और दिव्यांग शौचालयों में भी ताला लगा दिया गया।
इस वजह से बुनियादी सुविधाएं प्रभावित होने के बाद अस्पताल प्रबंधक को नए भवन से ओपीडी, फिजियोथेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी की सेवाएं वापस पुराने भवन में शिफ्ट करनी पड़ीं, जिससे मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
सेवाएं पूरी तरह हुई ठप, इधर उधर भटकते रहे मरीज
प्रबंधक और ठेकदार के विवादों बीच सोमवार को नए भवन में ओपीडी सेवाएं, फिजियोथैरेपी और ऑक्पेशनल थेरेपिस्ट की सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई। दिन भर मरीजों को इधर उधर भटकना पड़ा। इससे अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
इतना ही नहीं पार्किंग में खड़ी मरीज के परिजनों और डॉक्टरों की गाड़ियों को भी हटवा दिया और पार्किंग परिसर को प्रतिबंधित कर दिया। ठेकेदार के इस रवैये से पूरा अस्पताल चर्चा का केंद्र बन गया।
BMSCIL के MD ने तीन महीने में व्यवस्था का दिया भरोसा
विवाद की जानकारी के बाद BMSCIL के एमडी सुब्रत दास और प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारी सोमवार शाम एलएनजेपी पहुंचे। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और ठेकेदार से बातचीत कर विवाद सुलझाने का प्रयास किया।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, बैठक में BMSCIL की ओर से अगले तीन महीने में जरूरी संसाधन और व्यवस्थाएं चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया। इसके बाद नए भवन में सेवाएं धीरे-धीरे शुरू करने पर सहमति बनी।
400 बेड के लिए 269 डॉक्टर चाहिए, 101 पद ही स्वीकृत
नए भवन के संचालन में सबसे बड़ी चुनौती मैनपावर की है। अस्पताल के प्रस्ताव के मुताबिक, 400 बेड के लिए 269 डॉक्टरों की जरूरत है, जबकि 101 पद ही स्वीकृत हैं। यानी 168 डॉक्टरों की कमी है।
इसी तरह 219 ग्रेड-ए नर्स की जरूरत के मुकाबले 88 पद स्वीकृत हैं। अस्पताल में 131 नर्सों की कमी है। वार्ड अटेंडेंट, फार्मासिस्ट, टेक्नीशियन और अन्य सपोर्ट स्टाफ की स्थिति भी ऐसी ही है।
सवाल अब यह है कि नए भवन में 400 बेड का भवन तैयार होने के बावजूद जब पर्याप्त मानवबल, उपकरण और जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, तो अस्पताल में पूरी क्षमता से सेवाएं कब शुरू होंगी।
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