Lord Ganesha-Kuber Story: कुबेर के महल में पहुंचते ही बाल गणेश ने खा लिया सारा भोजन, जानें क्या था रहस्य - Haribhoomi
Bal Ganesha Story: जानें वह पौराणिक कथा जब कुबेर को अपने धन का अहंकार हो गया था। बाल गणेश ने कैसे उन्हें विनम्रता और श्रद्धा का महत्व समझाया।
Lord Ganesha-Kuber Story
- Published: 18 Sep 2026, 10:02 AM IST
- Last Updated: 18 Sep 2026, 10:02 AM IST
Bal Ganesha Story: हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं में देवी-देवताओं से जुड़े कई ऐसे प्रसंग मिलते हैं, जिनमें जीवन के लिए महत्वपूर्ण संदेश छिपे होते हैं। भगवान गणेश और धन के देवता कुबेर से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा भी ऐसी ही है। इस कथा में धन-संपत्ति से अधिक विनम्रता, श्रद्धा और अहंकार से दूर रहने का संदेश दिया गया है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार कुबेर देव को अपने धन और ऐश्वर्य पर काफी गर्व हो गया। अपने वैभव का प्रदर्शन करने के लिए उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती को अपने महल में भव्य भोज के लिए आमंत्रित किया।
कुबेर ने भगवान शिव को क्यों दिया भोज?
कथा के अनुसार, कुबेर चाहते थे कि भगवान शिव और माता पार्वती उनके महल की भव्यता और अपार संपत्ति को देखें। भगवान शिव कुबेर के मन में पैदा हुए इस अहंकार को समझ गए।
उन्होंने स्वयं कुबेर के भोज में जाने के बजाय बाल गणेश को वहां भेज दिया। कथा के एक प्रचलित रूप में शिवजी ने कुबेर से बाल गणेश की भूख शांत करने के लिए कहा। इसके बाद बाल गणेश कुबेर के महल पहुंच गए।
बाल गणेश ने खा लिया सारा भोजन
कुबेर ने बाल गणेश के स्वागत के लिए तरह-तरह के पकवान तैयार करवाए। उनके सामने स्वादिष्ट व्यंजनों से भरी कई थालियां परोसी गईं। कथा के अनुसार, बाल गणेश ने देखते ही देखते सारा भोजन खा लिया, लेकिन उनकी भूख शांत नहीं हुई। कुबेर लगातार उनके सामने भोजन परोसते रहे, लेकिन गणेश जी की भूख कम होने के बजाय बढ़ती ही गई।
कुछ ही समय में महल का तैयार भोजन खत्म हो गया। इसके बाद बाल गणेश ने रसोई में रखा कच्चा सामान और दूसरी वस्तुएं भी खाना शुरू कर दिया। कथा के कुछ प्रचलित रूपों में महल के बर्तनों को खाने का भी वर्णन मिलता है।
घबरा गए कुबेर, महादेव के पास पहुंचे
बाल गणेश की लगातार बढ़ती भूख देखकर कुबेर परेशान हो गए। उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर गणेश जी की भूख कैसे शांत की जाए। जब स्थिति उनके नियंत्रण से बाहर होती नजर आई तो कुबेर भगवान शिव के पास कैलाश पहुंचे। उन्होंने महादेव से अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी और गणेश जी की भूख शांत करने का उपाय पूछा।
महादेव ने बताया अहंकार दूर करने का उपाय
भगवान शिव ने कुबेर को समझाया कि धन और ऐश्वर्य पर अहंकार करना उचित नहीं है। कथा के अलग-अलग प्रचलित रूपों में गणेश जी की भूख शांत करने के लिए अलग-अलग प्रसाद का उल्लेख मिलता है।
एक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ने कुबेर को दूर्वा दी और उसे श्रद्धा के साथ गणेश जी को अर्पित करने के लिए कहा। कुबेर ने ऐसा ही किया और इसके बाद गणेश जी की भूख शांत हो गई। वहीं, कथा के कुछ अन्य रूपों में माता पार्वती द्वारा बनाए गए चावल या लड्डू को प्रेम और श्रद्धा से गणेश जी को अर्पित करने का उल्लेख मिलता है।
बाल गणेश ने कुबेर को क्या सिखाया?
कथा के अनुसार, इस प्रसंग के बाद कुबेर को समझ आया कि धन-संपत्ति और वैभव से ज्यादा महत्वपूर्ण विनम्रता और सच्ची श्रद्धा है। इस पौराणिक कथा का मूल संदेश यही माना जाता है कि इंसान के पास चाहे कितना भी धन और ऐश्वर्य क्यों न हो, उसे उसका अहंकार नहीं करना चाहिए। संपत्ति का सही उपयोग और दूसरों के प्रति विनम्र व्यवहार ही उसे सार्थक बनाता है।
नोट: यह लेख धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित कथा का वर्णन है। इसके अलग-अलग प्रचलित संस्करणों में कुछ घटनाओं और प्रसाद से जुड़े विवरण अलग मिल सकते हैं।