रिपोर्ट: 'LPG सिलेंडर के दाम ₹400, सब्सिडी भी बढ़े'; क्या ऐसा होने वाला है?
Sep 09, 2026 10:00 am ISTलाइव हिन्दुस्तान

मुख्य बातें
- LPG Price: CEW की रिपोर्ट बताती है कि सही जानकारी के अभाव और कमजोर डिलीवरी नेटवर्क के कारण बहुत से लोग स्थानीय दुकानों, सड़क किनारे बैठे विक्रेताओं से गैस सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं
- ये तय रेट से ज्यादा महंगे होते हैं
- इनमें न तो कोई गारंटी होती है और न ही सरकारी सब्सिडी का लाभ मिलता है

LPG सिलेंडर के दाम ₹400, सब्सिडी भी बढ़े
ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद यानी CEW की एक रिपोर्ट आई है। इसमें कहा गया है कि LPG की कीमत एक ऐसा बड़ा मुद्दा है, जो सभी वर्गों के लिए चुनौती बना हुआ है। मौजूदा दरें आम आदमी की पहुंच से काफी ऊपर हैं। इसी वजह से लोग जलाऊ लकड़ी या महंगे अनौपचारिक सिलेंडरों का सहारा ले रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक अगर 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 400 रुपये हो जाए तो 80 प्रतिशत से अधिक लोग पूरी तरह से गैस पर आ जाएंगे। अभी सिलेंडर रिफिल करवाने की औसत भुगतान क्षमता 500 रुपये प्रति सिलेंडर है, जबकि उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाला सिलेंडर 642 रुपये का है।
प्रवासी मजदूरों को भारी दिक्कतें
स्टडी के अनुसार, प्रवासी मजदूरों में से 79 प्रतिशत के पास औपचारिक गैस कनेक्शन नहीं है और 4 प्रतिशत से भी कम लोग प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ पा रहे हैं। यह स्थिति इसलिए और हैरान करने वाली है, क्योंकि 2021 की नीति में प्रवासी मजदूरों के लिए सेल्फ-डिक्लेरेशन के माध्यम से कनेक्शन लेने की सुविधा पहले ही दे दी गई थी। इसके बावजूद जागरूकता की कमी और कागजी प्रक्रियाओं में उलझन के कारण प्रवासी मजदूर इस योजना से दूर हैं।
सीईडब्ल्यू की फेलो प्रार्थना बराह का कहना है कि सरकार का यह सोचना कि केवल एलपीजी कनेक्शन दे देने भर से काम हो जाएगा, सही नहीं है। असली चुनौती यह है कि लोग नियमित रूप से गैस रिफिल करवा पाएं, प्रवासी मजदूरों को उज्ज्वला योजना की पूरी जानकारी हो और ग्रामीण घरों तक सिलेंडर भरोसेमंद ढंग से पहुंचते रहें।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत की स्वच्छ हवा की नीति को केवल 'कनेक्शन देने' से आगे बढ़कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि साफ ईंधन सस्ता, भरोसेमंद और लंबे समय तक टिकाऊ हो।
शहरी झुग्गियों और प्रवासियों की स्थिति
शहरी अनौपचारिक बस्तियों में 70 प्रतिशत लोग पूरी तरह से गैस का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बिना औपचारिक कनेक्शन वाले 31 प्रतिशत लोगों को एड्रेस प्रूफ न होने के कारण कनेक्शन देने से मना कर दिया जाता है। इस वजह से 11 प्रतिशत लोग वास्तविक रिटेल प्राइस के बजाय 1,040 रुपये तक अनौपचारिक रूप से सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं।
वहीं, प्रवासी मजदूरों में से 70 प्रतिशत, जो खुले स्थानों में रहते हैं, पूरी तरह से ठोस ईंधनों जैसे लकड़ी और कोयले पर निर्भर हैं। जो प्रवासी अनौपचारिक रूप से गैस खरीदते हैं, उन्हें 71 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान करना पड़ता है, जो आधिकारिक दर से 20 प्रतिशत से अधिक महंगा है।
200 रुपये और बढ़े सब्सिडी
सीईडब्ल्यू की पहली सिफारिश यह है कि पेट्रोलियम मंत्रालय को उज्ज्वला सब्सिडी को प्रति सिलेंडर लगभग 200 रुपये बढ़ाना चाहिए। दूसरा सुझाव प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष पंजीकरण अभियान चलाने का है, ताकि वे आसानी से उज्ज्वला योजना से जुड़ सकें।
तीसरा, स्मार्ट मीटर कियोस्क की पायलट परियोजनाएं शुरू करने की सिफारिश की गई है, ताकि लोग छोटी-छोटी किस्तों में गैस के पैसे जमा कर सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर डिलीवरी बढ़ाने के लिए विक्रेताओं को अलग-अलग कमीशन देने का सुझाव दिया गया है, ताकि दूर-दराज के इलाकों में भी सिलेंडर पहुंच सकें।
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Drigraj Madheshia
दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें