Lust Stories 3 Movie Review: ‘लस्ट स्टोरीज 3’ की 4 कहानियों में क्या है खास? पढ़ें पूरा रिव्यू
Lust Stories Film Review: ‘लस्ट स्टोरीज 3’ चाहत और रिश्तों को चार अलग नजरियों से दिखाती है। चार फिल्ममेकर्स की अलग शैलियां एंथोलॉजी को फ्रेश और दिलचस्प बनाती हैं। जानिए यह फिल्म क्यों देखें?
‘लस्ट स्टोरीज 3’ एक ऐसी एंथोलॉजी है, जो प्यार, चाहत और रिश्तों को एक ही नजरिए से देखने के बजाय चार अलग कहानियों के जरिए सामने रखती है। विक्रमादित्य मोटवाने, किरण राव, शकुन बत्रा और विशाल भारद्वाज अपनी-अपनी फिल्मों में रिश्तों के अलग पहलुओं को तलाशते हैं। कहीं कहानी असहज रिश्तों के बीच पहुंचती है, तो कहीं ठगी और ट्विस्ट के जरिए मनोरंजन करती है। एक सेगमेंट भावनात्मक उलझनों पर बात करता है, जबकि दूसरी कहानी 1987 के दौर में सेक्स एजुकेशन जैसे विषय को छूती है। यही विविधता इस फ्रेंचाइजी के तीसरे अध्याय को अलग पहचान देती है।
क्या है ‘लस्ट स्टोरीज 3’ की कहानी?
‘लस्ट स्टोरीज 3’ चार अलग कहानियों का कलेक्शन है, जिनका केंद्र चाहत, रिश्ते और इंसानी भावनाएं हैं। विक्रमादित्य मोटवाने की कहानी पति-पत्नी और पार्टनर बदलने जैसे असहज विषय को कोरियन फिक्शन से प्रभावित अंदाज में एक्सप्लोर करती है। किरण राव की कहानी ड्रग्स, पैसे और ठगी के बीच घूमती है और इसमें लगातार ट्विस्ट देखने को मिलते हैं। शकुन बत्रा का सेगमेंट रिश्तों, थेरेपी, परिवार की उम्मीदों और अधूरी भावनाओं पर फोकस करता है। वहीं विशाल भारद्वाज दर्शकों को 1987 में ले जाते हैं, जहां सेक्स एजुकेशन को उस दौर की पृष्ठभूमि में कहानी का हिस्सा बनाया गया है।
‘लस्ट स्टोरीज 3’ की स्टार कास्ट की परफॉर्मेंस
एंथोलॉजी की कास्ट इसकी सबसे अहम खूबियों में शामिल है। विक्रमादित्य मोटवाने के सेगमेंट में राधिका आप्टे, कोंकणा सेन शर्मा, विजय वर्मा और अभिषेक शर्मा नजर आते हैं और असहज विषय को कहानी के हिसाब से निभाते हैं। किरण राव की कहानी में गुरफतेह पीरजादा और सना थंपी का अंदाज पिछले सेगमेंट से बिल्कुल अलग माहौल तैयार करता है। शकुन बत्रा की फिल्म में अली फजल और राधिका मदान रिश्तों की भावनात्मक जटिलताओं को सामने लाते हैं। विशाल भारद्वाज के सेगमेंट में अदिति राव हैदरी, सिद्धार्थ और गजराज राव के साथ कहानी का पीरियड टच उभरकर आता है।
‘लस्ट स्टोरीज 3’ का डायरेक्शन कैसा है?
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका निर्देशन है। चारों फिल्ममेकर्स को अपनी अलग आवाज और शैली इस्तेमाल करने की पूरी आजादी मिली है। विक्रमादित्य मोटवाने असहज विषय को सीधे कहानी में शामिल करते हैं, जबकि किरण राव कहानी को ठगी और थ्रिल के रास्ते पर ले जाती हैं। शकुन बत्रा रिश्तों की भावनात्मक परतों पर ज्यादा ध्यान देते हैं और विशाल भारद्वाज अपने सेगमेंट को 1987 के माहौल में स्थापित करते हैं। इस वजह से चारों कहानियां एक जैसी नहीं लगतीं और एंथोलॉजी का फॉर्मेट बोझिल होने के बजाय विविध नजर आता है।
टेक्निकल फ्रंट पर कैसी है फिल्म?
टेक्निकल स्तर पर एंथोलॉजी की सबसे खास बात इसकी विजुअल और नैरेटिव विविधता है। खासतौर पर विशाल भारद्वाज का सेगमेंट 1987 के दौर में कहानी को ले जाकर बाकी तीन कहानियों से अलग माहौल बनाता है। वहीं अलग-अलग निर्देशकों की कहानी कहने की शैली फिल्म को एक ही टोन में फंसने नहीं देती। नैरेटिव स्ट्रक्चर भी एंथोलॉजी के फॉर्मेट के मुताबिक काम करता है। दर्शक एक कहानी से दूसरी कहानी में जाता है, लेकिन हर सेगमेंट अपने अलग विषय और ट्रीटमेंट के कारण अपनी पहचान बनाए रखता है।
क्यों देखें ‘लस्ट स्टोरीज 3’?
अगर आपको एक ही फिल्म में अलग-अलग तरह की कहानियां और रिश्तों की जटिल परतें देखना पसंद है, तो ‘लस्ट स्टोरीज 3’ आपके लिए दिलचस्प हो सकती है। चारों फिल्ममेकर्स का अलग नजरिया इसे एक जैसा महसूस नहीं होने देता। खासतौर पर उन दर्शकों के लिए यह एंथोलॉजी आकर्षक है, जो प्यार और चाहत को पारंपरिक रोमांस से अलग नजरिए से देखना चाहते हैं। हमारी ओर से इस फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार।