Mahalaxmi Vrat Katha: महालक्ष्मी व्रत में जरूर पढ़ें मां लक्ष्मी की यह कथा, जानें 16 दिन के व्रत की पूजा विधि - Haribhoomi
Mahalaxmi Vrat Katha 2026: महालक्ष्मी व्रत में पढ़ें मां लक्ष्मी की पौराणिक कथा। जानें 16 दिन के व्रत की पूजा विधि, महत्व और महालक्ष्मी आरती।
Mahalaxmi Vrat Katha
- Published: 21 Sep 2026, 09:03 AM IST
- Last Updated: 21 Sep 2026, 09:03 AM IST
महालक्ष्मी व्रत को हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। व्रत के दौरान भक्त माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हैं और उनकी कथा पढ़ते व सुनते हैं।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, महालक्ष्मी व्रत की कथा सुनने से भक्तों को मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दौरान श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत का पालन करते हैं और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।
महालक्ष्मी व्रत कथा (Mahalaxmi Vrat Katha in Hindi)
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक गांव में गरीब ब्राह्मण रहता था। वह भगवान श्रीहरि विष्णु का परम भक्त था और नियमित रूप से उनकी पूजा-अर्चना करता था। ब्राह्मण की भक्ति से प्रसन्न होकर एक दिन भगवान विष्णु ने उसे दर्शन दिए और मनचाहा वरदान मांगने को कहा।
इस पर ब्राह्मण ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की कि माता लक्ष्मी उसके घर में निवास करें, जिससे उसका जीवन सुख-समृद्धि से भर जाए। ब्राह्मण की प्रार्थना सुनकर भगवान विष्णु ने उसे देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने का उपाय बताया।
भगवान विष्णु ने कहा कि मंदिर के सामने एक स्त्री आती है, जो वहां उपले थापती है। तुम उसे अपने घर आने का निमंत्रण देना। वह स्त्री स्वयं देवी लक्ष्मी हैं। जब वह तुम्हारे घर आएंगी, तो तुम्हारा घर धन-धान्य से भर जाएगा।
भगवान विष्णु की बात सुनकर अगले दिन ब्राह्मण सुबह करीब चार बजे ही मंदिर के सामने जाकर बैठ गया। कुछ समय बाद वहां देवी लक्ष्मी उपले थापने पहुंचीं। ब्राह्मण ने उन्हें अपने घर आने का निमंत्रण दिया। देवी लक्ष्मी समझ गईं कि ब्राह्मण को यह बात भगवान विष्णु ने बताई है।
इसके बाद माता लक्ष्मी ने ब्राह्मण को महालक्ष्मी व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि वह 16 दिनों तक महालक्ष्मी व्रत रखे और सोलहवें दिन रात में चंद्रमा को अर्घ्य दे, तो उसकी मनोकामना पूरी हो सकती है।
ब्राह्मण ने माता लक्ष्मी के बताए अनुसार 16 दिनों तक व्रत रखा और विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना की। सोलहवें दिन उसने उत्तर दिशा की ओर मुंह करके माता लक्ष्मी का आह्वान किया। ब्राह्मण की श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होकर देवी लक्ष्मी ने अपना वचन पूरा किया।
धार्मिक मान्यता है कि तभी से महालक्ष्मी व्रत करने की परंपरा चली आ रही है। भक्त इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करके मां लक्ष्मी से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
महालक्ष्मी व्रत 2026 की पूजा विधि (Mahalaxmi Vrat Puja Vidhi)
महालक्ष्मी व्रत को 16 दिनों तक करने की परंपरा है। इस दौरान मां लक्ष्मी की पूजा विधि-विधान और श्रद्धा के साथ की जाती है। व्रत की पारंपरिक पूजा विधि इस प्रकार है:
- व्रत के पहले दिन 16 सूत के धागों से एक डोरा बनाएं और उसमें 16 गांठें लगाएं।
- पूजा स्थल पर चौकी स्थापित करके भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमा रखें।
- पूजा के लिए चावल की 16 ढेरियां बनाकर षोडश मातृका की पूजा करें।
- प्रतिदिन विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करें।
- शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें और व्रत से जुड़े नियमों के अनुसार पूजन करें।
- व्रत के अंतिम दिन मां लक्ष्मी की विशेष पूजा करके व्रत का समापन करें।
- पूजा की विधि और व्रत के नियम अलग-अलग क्षेत्रों एवं परिवारों की परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।
महालक्ष्मी व्रत में पढ़ें मां लक्ष्मी की आरती (Mahalaxmi Aarti)
महालक्ष्मी व्रत के दौरान मां लक्ष्मी की पूजा और आरती का विशेष महत्व माना जाता है। यहां पढ़ें माता लक्ष्मी की प्रसिद्ध आरती:
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु धाता॥ ॐ॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ॥
दुर्गा रूप निरंजनि, सुख-संपत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ॐ॥
तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता॥ ॐ॥
जिस घर में तुम रहती, तहं सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ॐ॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न हो पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ॐ॥
शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ ॐ॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनंद अति उमंग, पाप उतर जाता॥ ॐ॥
डिस्क्लेमर: यहां दी गई पूजा विधि और व्रत कथा धार्मिक मान्यताओं एवं पारंपरिक प्रचलनों पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा के नियमों में अंतर हो सकता है।