MAPRI संस्थान में खाली पदों पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब: बदहाली और प्रशासनिक संकट पर सरकार को नोटिस, 8 सितंबर को अगली सुनवाई - Tonk News

अरबी-फारसी शोध संस्थान में पदों की कमी समेत अन्य अव्यवस्थाओं को लेकर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है।

टोंक के ऐतिहासिक मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी-फारसी शोध संस्थान (MAPRI) की बदहाली, प्रशासनिक संकट और लंबे समय से खाली पदों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश श

.

अरबी फारसी शोध संस्थान में दुनिया की सबसे बड़ी साइज की कुरान मौजूद है।

अरबी फारसी शोध संस्थान में दुनिया की सबसे बड़ी साइज की कुरान मौजूद है।

30 जुलाई को कोर्ट ने जारी किया नोटिस

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने इस मामले में 30 जुलाई को आदेश जारी किया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति भुवन गोयल की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और अन्य विपक्षियों को नोटिस जारी किया।

कोर्ट की ओर से जारी नोटिस को राजकीय अधिवक्ता कुलदीप सिंह राठौड़ ने स्वीकार किया। अदालत ने राज्य सरकार से संस्थान की स्थिति को लेकर जवाब मांगा है।

इस मामले में D.B. Civil Writ Petition No. 7660/2026 के तहत आदेश जारी किया गया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 8 सितंबर की तारीख तय की है।

दुनिया की सबसे बड़ी साइज की कुरान मौजूद

टोंक स्थित मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी-फारसी शोध संस्थान ऐतिहासिक ग्रंथों और पांडुलिपियों के लिए जाना जाता है। संस्थान में दुनिया की सबसे बड़ी साइज की कुरान मौजूद है।

इसके अलावा देश और विदेश से जुडे कई प्राचीन ग्रंथ भी संस्थान में संभालकर रखे गए हैं। इन ऐतिहासिक ग्रंथों और दस्तावेजों को डिजिटल किया जा रहा है, ताकि इन्हें सुरक्षित रखा जा सके।

स्टाफ की कमी से बंद होने का दावा

याचिकाकर्ता सरताज अहमद की ओर से दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार की घोर उपेक्षा के कारण यह प्रतिष्ठित संस्थान बंद होने की कगार पर पहुंच गया है।

याचिका के अनुसार संस्थान में प्रशासनिक संकट गहराया हुआ है। लंबे समय से महत्वपूर्ण पद खाली हैं और इन पदों पर नियुक्तियां नहीं होने के कारण शोध कार्य पूरी तरह ठप हैं।

स्टाफ की कमी के कारण संस्थान के कामकाज पर भी असर पड रहा है। इसी स्थिति को लेकर सरताज अहमद ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।

ऐतिहासिक ग्रंथों के डिजिटलीकरण की मांग

जनहित याचिका में संस्थान में मौजूद अमूल्य अरबी और फारसी पांडुलिपियों, ऐतिहासिक डाक्यूमेंट्स और प्राचीन ग्रंथों के संरक्षण और सुरक्षा की मांग की गई है।

याचिका में इन ऐतिहासिक सामग्री के त्वरित डिजिटलीकरण की भी मांग की गई है। इसका उद्देश्य इन ग्रंथों और पांडुलिपियों को सुरक्षित रखना और ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर को नष्ट होने से बचाना है।

8 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और अन्य विपक्षियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी।