कुत्ता घुमाने के बाद लद्दाख हुए थे ट्रांसफर, अब सत्य निकेतन हादसे में फंसे MCD कमिश्नर संजीव खिरवार! कौन हैं?

Time Updated: Monday, September 7, 2026, 17:05 [IST]

IAS Sanjeev Khirwar: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने के बाद सिर्फ हादसे की जांच ही नहीं, बल्कि दिल्ली नगर निगम की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। इस घटना में अब तक सात लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। कई लोगों के अभी भी मलबे में दबे होने की संभावना भी जताई जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज किया है और हादसे की जांच चल रही है।

वहीं, नगर निगम के कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई के बाद अब MCD कमिश्नर संजीव खिरवार (IAS Sanjeev Khirwar) के इस्तीफे की मांग भी सामने आने लगी है। खिरवार कोई नए अधिकारी नहीं हैं। करीब तीन दशक लंबे प्रशासनिक करियर में उन्होंने दिल्ली समेत कई जगह अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। हालांकि, साल 2022 में त्यागराज स्टेडियम से जुड़ा विवाद उन्हें पूरे देश में चर्चा में ले आया था।

IAS Sanjeev Khirwar

1994 बैच के IAS अधिकारी हैं संजीव खिरवार

संजीव खिरवार 1994 बैच के IAS अधिकारी हैं और AGMUT कैडर से आते हैं। इस कैडर में अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। दिल्ली में खिरवार कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। वह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में सचिव रहे हैं। इसके अलावा राजस्व विभाग के प्रधान सचिव और मंडलायुक्त की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। केंद्र सरकार में भी उनकी तैनाती रही है।

साल 2009 से 2014 के बीच वह तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ के निजी सचिव रहे। कोरोना के दौर में भी वह दिल्ली प्रशासन के महत्वपूर्ण अधिकारियों में शामिल थे। लेकिन उनके करियर में एक ऐसा विवाद भी आया, जिसने उनकी पहचान को प्रशासनिक जिम्मेदारियों से आगे देशभर की खबरों में पहुंचा दिया।

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त्यागराज स्टेडियम में क्या हुआ था?

मई 2022 में संजीव खिरवार दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग में प्रधान सचिव थे। इसी दौरान त्यागराज स्टेडियम से जुड़ा मामला सामने आया। आरोप लगाया गया कि खिरवार शाम के समय अपने कुत्ते को स्टेडियम में घुमाने के लिए ले जाते थे और खिलाड़ियों तथा प्रशिक्षकों को करीब 7 बजे स्टेडियम खाली करना पड़ता था। खिलाड़ियों का कहना था कि इससे उनका अभ्यास प्रभावित हो रहा था, क्योंकि इससे पहले स्टेडियम में रात करीब 8 से 8:30 बजे तक रोशनी में ट्रेनिंग चलती थी।

मामला सामने आने के बाद यह सवाल उठा कि क्या एक अधिकारी के निजी इस्तेमाल की वजह से खिलाड़ियों का अभ्यास समय कम किया जा रहा था। खिरवार ने इन आरोपों को खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि उन्होंने किसी खिलाड़ी को स्टेडियम से जाने के लिए नहीं कहा। हालांकि, उन्होंने यह माना था कि वह कभी-कभी अपने पालतू कुत्ते को वहां लेकर जाते थे।

विवाद के बाद हुआ था तबादला

त्यागराज स्टेडियम का मामला बढ़ने के बाद तत्कालीन दिल्ली सरकार ने सभी सरकारी खेल परिसरों को रात 10 बजे तक खोलने का आदेश दिया था। इसके कुछ समय बाद केंद्र सरकार ने संजीव खिरवार का तबादला लद्दाख कर दिया। उनकी पत्नी और IAS अधिकारी रिंकू दुग्गा को अरुणाचल प्रदेश भेजा गया था। इसके बाद खिरवार ने लद्दाख में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर काम किया। कुछ साल बाद उनकी दिल्ली वापसी हुई, लेकिन इस बार जिम्मेदारी पहले से भी बड़ी थी।

2026 में बने MCD कमिश्नर

जनवरी 2026 में केंद्र सरकार ने संजीव खिरवार को दिल्ली नगर निगम यानी MCD का कमिश्नर नियुक्त किया। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक उनकी नियुक्ति 21 जनवरी 2026 से प्रभावी हुई। यह वापसी इसलिए भी खास थी क्योंकि करीब चार साल पहले उन्हें दिल्ली से बाहर भेजा गया था और अब वह राजधानी के सबसे बड़े नागरिक निकाय के प्रमुख बनकर लौटे।

MCD के पास दिल्ली में भवनों से जुड़े कई अहम काम हैं। इनमें अवैध निर्माण पर कार्रवाई, भवनों के नियमों का पालन, साफ-सफाई और कई स्थानीय नागरिक सेवाएं शामिल हैं। इसलिए किसी इमारत के असुरक्षित होने या नियमों के खिलाफ निर्माण से जुड़े मामलों में नगर निगम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

सत्य निकेतन हादसे ने फिर खड़े किए सवाल

सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने के बाद अब इसी जिम्मेदारी को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं। हादसे के वक्त इमारत में लोग रह रहे थे और वहां निर्माण या मरम्मत का काम चल रहा था। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस इमारत का इस्तेमाल रहने के लिए किया जा रहा था, उसकी हालत और वहां चल रहे काम की निगरानी किस स्तर पर हुई थी। हादसे के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया है और मजिस्ट्रेट जांच के आदेश भी दिए गए हैं। नगर निगम के कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। ऐसे में जांच का एक अहम हिस्सा यह भी होगा कि इमारत की स्थिति की जानकारी संबंधित विभागों को थी या नहीं और निर्माण या मरम्मत से जुड़े नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

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