मीन राशिफल – Meen Rashifal 2026 – 16 July To 23 July
दी, दू, थ, झ, ञ — पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र
दे, दो, चा, ची — उत्तराभाद्रपद नक्षत्र
चे, चो — रेवती नक्षत्र
16 जुलाई से 23 जुलाई तक
दिनांक 16, 17, 18 को सामान्य फलसूचक समय रहेगा। आप अपना काम समय पर पूरा करने की कोशिश करेंगे और कुछ हद तक सफल भी होंगे। आपकी योजनाएं कार्यरूप में परिवर्तित होंगी। आप इस समय खानपान का आनंद लेंगे। समय सुखद रहेगा। स्वास्थ्य की दृष्टि से सामान्य समय है। 19, 20 को आप कलात्मक और कल्पनाशील रहेंगे। साथ ही आप रूढ़िवादी भी रहेंगे। आप अपनी इच्छाओं की पूर्ति करेंगे। आप काफी एकान्तप्रिय रहेंगे। 21, 22, 23 को समय ठीक नहीं है। आपका हर दाव उल्टा पड़ेगा। आलोचना या निंदा में न पड़ें। किसी की बुराई बेवजह न करें अन्यथा आप ही फसेंगे। ऐसे अवसर आएंगे जिसमें उद्विग्नता की स्थिति रहेगी। 23 की शाम से समय में सुधार आएगा।
ग्रह स्थिति
मासारम्भ में शनि मीन राशि का लग्न में, मंगल वृषभ राशि का तृतीय भाव में, सूर्य मिथुन राशि का चतुर्थ भाव में, बुध + गुरु + शुक्र कर्क राशि का पंचम भाव में, केतु सिंह राशि का षष्टम भाव में, चन्द्रमा धनु राशि का दशम भाव में, राहु कुंभ राशि का बारहवे भाव में चलायमान है।
मीन राशि की शुभ-अशुभ तारीख़ें
| 2026 | शुभ तारीख़ें | सावधानी रखने योग्य अशुभ तारीख़ें |
| जनवरी | 1, 18, 19, 20, 23, 24, 25, 27, 28 | 3, 4, 11, 12, 13, 21, 22, 30, 31 |
| फरवरी | 15, 16, 20, 21, 24, 25 | 7, 8, 9, 18, 26, 27 |
| मार्च | 14, 15, 19, 20, 23, 24 | 7, 8, 9, 17, 18, 25, 26, 27 |
| अप्रैल | 10, 11, 12, 16, 17, 19, 20 | 3, 4, 5, 13, 14, 22, 23, 30 |
| मई | 8, 9, 13, 14, 17, 18 | 1, 2, 11, 19, 20, 27, 28, 29 |
| जून | 4, 5, 9, 10, 13, 14 | 7, 15, 16, 24, 25, 26 |
| जुलाई | 1, 2, 3, 7, 8, 10, 11, 28, 29, 30 | 4, 5, 13, 14, 21, 22, 23, 31 |
| अगस्त | 3, 4, 7, 8, 25, 26, 30, 31 | 1, 9, 10, 17, 18, 19, 28, 29 |
| सितम्बर | 1, 18, 19, 20, 24, 25, 28, 29 | 6, 7, 14, 15, 16, 24, 25 |
| अक्टूबर | 15, 16, 20, 21, 24, 25 | 3, 4, 11, 12, 13, 21, 22, 30, 31 |
| नवम्बर | 12, 13, 14, 18, 19, 21, 22 | 7, 8, 9, 18, 19, 26, 27 |
| दिसम्बर | 3, 4, 11, 12, 13, 21, 22, 30, 31 | 5, 6, 7, 15, 16, 24, 25 |
मीन राशि का वार्षिक भविष्यफल
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यह साल मीन राशि वालों के लिए मुश्किलों व परेशानियां से घिरा हुआ रहेगा। आपकी राशि में शनि का परिभ्रमण कदम-कदम पर मुसीबतें खड़ी करेगा। स्वास्थ्य में परेशानी रहेगी, कोई पुराना रोग वापस से प्रकट हो सकता है। स्वास्थ्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही के घातक परिणाम होंगे। खान-पान, योग, व्यायाम जैसी चीजों के प्रति आप सजग रहेंगे। शत्रु व षडयंत्र भी इस वर्ष सक्रिय व गतिशील रहेंगे। चौथा बृहस्पति इस वर्ष रोगों की स्थिति को रखेगा। इस वर्ष वर्ष पर्यंत शनि की साढेसाती द्वितीय पाद में चल रही है। आर्थिक रूप से कोई खास सफलता के योग इस वर्ष में नहीं देखा पा रहा हूँ, कदम-कदम पर पारिवारिक चुनौतियां भी हैं। वर्षारंभ में दशम स्थान में चतुष्ग्रह युति है। आर्थिक कश्मकश व खींचतान जारी रहेगी। पैसा कहीं ऐसी जगह पर फंस जायेगा, जहां धैर्य रखने के अलावा आपके पास और कोई विकल्प नहीं बचेगा। शनि की स्थिति आपकी राशि में है। चर्म रोग, उदर विकार, हार्ट डिजीज, डायबिटीज जैसी बीमारी से सावधान रहें। नियमित चैकअप करवाते रहें, खान-पान का परहेज, गुरेज तथा चिकित्सीय सलाह का ध्यान रखें।
इस वर्ष शत्रु षडयंत्र सक्रिय रहेंगे। शत्रुजन्य पीड़ाएं रहेंगी, तथा येन केन प्रकारेण शत्रु आपको नुकसान पहुंचाने की चेष्टा करेंगे। व्यापार व कारोबार की उतरी हुई गाड़ी को पटरी पर लाने के लिए भरसक प्रयास करेंगे। आपको पापड कुछ ज्यादा ही बेलने पड़ सकते हैं। तथा आंशिक रूप से आपको लाभ भी प्राप्त होगा। जीवनसाथी के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव रहेगा। जो काम पिछले काफी अरसे से रुका हुआ व अटका पड़ा है। वह पूर्णता की ओर चलेगा। इस वर्ष आपको मार्केर्टिंग पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। कोर्ट-केस व सरकारी विषय अटकेंगे। हलांकि बारहवें भाव में राहु के प्रभाव से यात्राओं का क्रम इस वर्ष चलता रहेगा। बृहस्पति 2 जून से 31 अक्टूबर तक उच्च राशि में चलायमान रहने के साथ-साथ अतिचारी भी होंगे। अतः विद्यार्थी पूर्ण रूप से एकाग्रचित्त होकर अपने अध्ययन पर फोकस रहेंगे। करियर व अध्ययन में एकाग्रचित्त होने के अनुकूल परिणाम भी मिलेंगे। बुरी आदतों व बुरे लोगों से दूर रहें। संतान की शिक्षा, करियर व विवाह आदि से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण निर्णय आप लेंगे। किसी रिश्तेदार से सम्बन्धित कोई शुभ समाचार आपको मिल सकता है। कोर्ट-कचहरी के लम्बित विषयों का समाधान हो जायेगा। किसी मित्र या आपके शुभ चिंतक की गवाही आपके लिए मददगार साबित होगी। सम्पत्ति व भाईयों से बटवारे सम्बन्धी विषय का समाधान आपसी सहमति से होगा। मित्र व सहयोगी आपके लिए मद्दगार साबित होंगे। योजनाएं व प्लानिंग आप बनाएंगे, परंतु योजनाओं से ध्यान ज्यादा उनके कार्यरूप में परिणित पर रहेगा। रिश्तेदारों पर खास भरोसा नहीं किया जा सकता है। जिस पर आप सबसे ज्यादा भरोसा करेंगे, वही आपके लिए नुकसानप्रद रहेगा। किसी बड़े व्यक्ति से आपकी मुलाकात जीवन की दशा व दिशा परिवर्तित कर देगी।
शारीरिक सुख एवं स्वास्थ्य:-
इस वर्षवर्ष के मध्य में हल्की-फुल्की व मौसमी बीमारियों को छोड़ दें, तो स्वास्थ्य वर्ष पर्यंत अच्छा ही रहेगा। लेकिन इसका कतई मतलब नहीं कि आप स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही करें। खान पान, योग, व्यायाम जैसी चीजों का विशेष ध्यान रखें। दशम स्थान में वर्षारंभ में चतुष्ग्रह युति के कारण पीठ दर्द, कब्ज, वायुविकार व कमर से सम्बन्धित बीमारी रह सकती है। 27 जुलाई से 11 दिसम्बर के मध्य वक्री शनि के कारण रक्तचाप, मधुमेह, हार्ट डिजीज जैसी बीमारियों में नियमित जांच करवावें । बुरी आदतें, बुरे लोगों से दूर रहें। नशे का सेवन छोड़ दें, अन्यथा कोई बड़ी बीमारी को निमंत्रण दे बैठेंगे। रोग निवृत्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र की 1 माला नित्य करें।
व्यापार, व्यवसाय व धन:-
कारोबार व व्यापार में नित नई चुनौतियां व मुश्किलें मुँह फाड़े खड़ी हैं। काम-काज को लेकर आप नई योजनाएं बनाएंगे, हालांकि योजनाएं कार्यरूप में परिणित नहीं हो पाएंगी। नौकरी में भी छोटी-मोटी समस्याएं आएंगी। सहकर्मी व बॉस से तालमेल का आभाव रहेगा। सहकर्मी वरिष्ठ अधिकारियों के कान आपके विरुद्ध भर सकते हैं। इस समय आपको व्यापार व कारोबार में भी दोगुना सावधान रहना चाहिए। आयकर, जीएसटी कस्टम जैसी कोई सरकारी परेशानी पेश आ सकती है। आपका ही कोई व्यक्ति आपकी शिकायत कर सकता है। व्यापार में नई मशीन या तकनीक का इस्तेमाल करके अपने व्यापार को चमका देंगे। मार्केटिंग के लिए नई योजना या प्लानिंग आप बना सकते हैं। लेकिन सावधान 27 जुलाई से 11 दिसम्बर के मध्य शनि वक्र स्थिति में रहेगा, रुपयों-पैसों के मामले में किसी पर भी भरोसा नहीं करें। उधार तो किसी को भूलकर भी न दें, या फिर उधार देकर भूल जाएं, क्योंकि वापस आने की संभावना न के बराबर है। अपने अधीनस्थों, कर्मचारियों व भागीदार के व्यवहार, कार्यकलाप पर पूरी नजर रखें। जहां तक सम्पत्ति की बात है। पैतृक सम्पत्ति में कुछ न कुछ विवाद हो सकता है। किसी वरिष्ठ सदस्य को विवाद में मध्यस्थता करनी पड़ेगी सोना, भूमि, भूखण्ड, शेयर्स आदि में निवेश करने से पूर्व अच्छी तरह जांच पड़ताल करें। “ॐ महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र की 1 माला नित्य कर दें। इससे धन आगम के स्त्रोत तो खुलेंगे साथ ही नुकसान रुक जायेगा।
घर, परिवार, संतान व रिश्तेदार:-
पारिवारिक सुख शांति के लिहाज से यह साल मिला-जुला रहेगा। कभी कभार घर-परिवार में वातावरण तनावपूर्ण रहेगा । दाम्पत्य संबंधों में वर्षारंभ में चौथे गुरु के कारण पति-पत्नी में आपसी तालमेल बिगड़ेगा, हालांकि बाद में गलत फहमियां व मतभेद सुलझ जाएंगे संतान की शिक्षा, विवाह आदि पर इस वर्ष खर्च के प्रबल योगायोग हैं। भाईयों से किसी बात को लेकर विवाद शुरु होगा, तथा रिश्तेदारों व नातेदारों से कोई खास मदद की उम्मीद नहीं की जा सकती। हालांकि रायता फैलाने में उनका योगदान रह सकता है। संतान की सोहबत अध्ययन, हरकतों पर नजर रखें, ध्यान रखें कि संतान गलत रास्ते पर तो नहीं नकल रही। घर के बड़े-बुजुर्गों का स्वास्थ्य कमजोर रह सकता है। साथ ही परिवार में वर्ष के पूर्वार्द्ध में किसी नन्हे मेहमान की किलकारियां गूंज सकती हैं।
विद्याध्यन, पढ़ाई व करियर:-
इस वर्ष विद्यार्थीयों का प्रदर्शन बहुत ही शानदार रहेगा । विद्यार्थी पूर्ण रूप से एकाग्रचित्त होकर अपने करियर पर फोकस होंगे। 2 जून से पूर्व तो फिर मिथुन राशि के गुरु के कारण ढिलाई रह सकती है, परंतु 2 जून के उपरांत बृहस्पति पचंम स्थान में अपनी उच्च राशि में आ जाएंगे। आप खूब जमकर मेहनत करेंगे, व छककर परिणाम भी प्राप्त करेंगे। इंटरव्यू, ग्रुप डिस्कशन, विभागीय परीक्षा, नौकरी से सम्बन्धित परीक्षा में आप अनुकूल परिणाम प्राप्त कर ही लेंगे। आपकी योग्यता व क्षमता खुलकर लोगों के सामने आएंगी। लक्ष्य पर पूर्ण रूप से एकाग्रचित्त होकर ध्यान दें। मंजिल अब ज्यादा दर नहीं है। नौकरी में पदोन्नति इन्क्रीमेण्ट या प्रमोशन मिल सकता है। सोशल मीडिया इंटरनेट व प्रेम प्रसंगों से इस समय किनारा कर लें।
प्रेम-प्रसंग व मित्र:-
इस साल आपको प्रेम प्रस्ताव प्राप्त होंगे। प्रेम संबंधों के लिहाज से यह साल मिश्रित फलकारी है। प्रेम प्रसंगों के अवसर मिलेंगे। हालांकि इस वर्ष शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव आपकी राशि पर है। अतः प्रेम संबंध अपयश व बदनामी का कारण भी बन सकते हैं। सावधान व सर्तक रहें। प्रेम प्रंसगों में पड़कर अपने अध्ययन व करियर के साथ कोई समझौता नहीं करें। मित्र आपको कदम-कदम पर सहयोग करेंगे। हालांकि इस वर्ष नए मित्र भी बनेंगे, परंतु मित्रों की इस भीड़ में सही व सच्चे मित्र की तलाश वास्तव में ही एक चुनौती होगी।
वाहन, खर्च व खर्च व शुभकार्य:-
इस वर्ष खर्च बेतहाशा ही रहेगा। बल्कि खर्चों के मामले में आमदनी अठन्नी व खर्चा रुपया वाली स्थिति रहेगी। फिजुलखर्ची पर नियंत्रण रखें, कुछ अवांछित व अप्रत्याशित खर्चे अकस्मात् रूप से आ जाएंगे। वाहन से भी आप परेशान ही रहेंगे। वाहन की बार- बार मरम्मत व रिपेयरिंग से आप परेशान रहेंगे, परंतु वाहन को तैयार रखें, नए वाहन की संभावना कम ही है। संतान संबंधी किसी कार्य में विशेष खर्च की स्थिति रहेगी। बच्चों के हाथ में वाहन इस समय बिल्कुल न सौंपें। 27 जुलाई से 11 दिसम्बर के मध्य वक्री शनि के कारण कोई अप्रिय या अशुभ घटना की स्थिति बन सकती है। शराब पीकर व वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग बिल्कुल भी नहीं करें। जहां तक शुभ व मांगलिक कार्य की बात है। इस वर्ष इस प्रकार कोई योग व संभावना नहीं है।
हानि, कर्ज व अनहोनी:-
इस वर्ष आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव है अतः इस वर्ष धनहानि की संभावनाएं हैं, व्यापार में बहुत ही संजीदगी व गम्भीरता से एक निर्णय लें। निवेश से पूर्व अच्छी तरह जांच परख लें, किसी की भी चिकनी चुपड़ी बातों में नहीं आएं। शत्रु व विरोधी इस साल आपको किसी गुप्त योजना या षडयंत्र में उलझा सकते हैं। आर्थिक कश्मकश व धनहानि के योग इस साल हैं। निश्चित रूप से आय व आजीविका बढ़ाना आपके अधिकार में नहीं है। परंतु आप अपने खर्चों को सुव्यवस्थित कर आप अपने बजट को संतुलित व व्यवस्थित कर सकते हैं। अनहोनी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
यात्राएं :-
इस वर्ष परिवार के साथ छोटी-मोटी यात्राएं होंगी, यात्राओं में कष्ट रहेगा। रिजर्वेशन, आदि को लेकर परेशानी रह सकती है, वहीं व्यापारिक यात्राओं के कोई खास योगायोग नहीं है।
उपाय :-
वर्ष की शुभता बढ़ाने के लिए काले घोड़े की नाल की अंगूठी (लोहे की ) मध्यमा उंगली में धारण करें। नित्य पीले रंग का सुगंधित रुमाल पास में रखें। पुखराज या सुनैला युक्त गुरु यंत्र गले में धारण करें। किसी मंदिर या धर्म स्थल की निःशुल्क सेवा करें। सफेद चंदन की लकड़ी को घिसकर उसमें केसर डालकर ललाट पर उसका तिलक लगावें।
मीन राशि की चारित्रिक विशेषताएं
मीन राशि का अधिपति गुरु ज्ञान व बुद्धि का कारक ग्रह है। ऐसे जातकों में शासन करने की क्षमता व बुद्धिमत्ता विशेष श्रेणी की होती है। गुरु धर्म व अध्यात्म का सूचक है, गुरुता (बड़प्पन) का परिचायक है, अतः ऐसे व्यक्ति विशाल हृदय के धनी होते हैं, प्रवृत्ति के होते हैं। भावुक
आपका राशि स्वामी बृहस्पति है। बृहस्पति के प्रभाव से मीन राशि के जातक धार्मिक व आध्यात्मिक प्रवृत्ति के होते हैं।
मीन राशि में उत्पन्न जातक स्वस्थ, बुद्धिमान तथा सौम्य स्वभाव के होते हैं। ये नवीन विचारों का सृजन करने में समर्थ होते हैं। इनके विचारों से लोग प्रभावित रहते हैं। भौतिक सुख-साधनों का उपभोग करने की इनमें प्रबल इच्छा रहती है। ये धनैश्वर्य से युक्त रहते हैं एवं विभिन्न स्रोतों से धनार्जन करके आर्थिक रूप से सुदृढ़ रहते हैं। साथ ही चिंतन एवं मननशीलता का भाव भी इनमें रहता है। प्राकृतिक दृश्यों का अवलोकन करना इन्हें अच्छा लगता है। प्रेम के क्षेत्र में सरल एवं भावुक रहते हैं, परंतु व्यवहार कुशल होते हैं। अतः सांसारिक कार्यों में उचित सफलता अर्जित करके अपने उन्नति के मार्ग को प्रशस्त करने में सफल रहते हैं। इसके अतिरिक्त नवीन वस्तुओं का उत्पादन करने आदि में इनकी रुचि का योगदान रहता है।
देवगुरु बृहस्पति के प्रभाव से आप स्वस्थ एवं बलवान रहेंगे। आपकी बुद्धि अत्यंत ही तीक्ष्ण रहेगी। अतः विभिन्न शास्त्रीय विषयों का ज्ञानार्जन करके आप एक विद्वान के रूप में समाज में अपनी प्रतिष्ठा एवं आदर बढ़ाने में समर्थ होंगे। एक विचारक के रूप में भी आप सम्माननीय होंगे। यद्यपि ब्रह्मादि के विषय में चिंतनशील रहेंगे, परंतु भौतिकता के प्रति भी आकर्षण रहेगा ।
आपका स्वरूप दर्शनीय एवं व्यक्तित्व आकर्षक होगा। साहित्य, कला एवं लेखन के प्रति आपकी रुचि होगी। अभिमान के भाव की आपमें अल्पता होगी तथा सबके साथ विनम्रता का व्यवहार होगा। आप सरकार या समाज से सम्मान प्राप्त करने में सफल होंगे। आप में दयालुता का भाव भी विद्यमान होगा तथा अवसरानुकूल अन्य जनों की सेवा तथा सहायता करने में भी तत्पर होंगे। इसके अतिरिक्त साहित्य एवं कला के प्रति भी आपकी अभिरुचि रहेगी। पिता की सेवा करने में तत्पर रहेंगे। बाल्यावस्था में आपको संघर्ष करना पड़ेगा, परंतु युवावस्था के बाद भौतिक सुख-संसाधनों को अर्जित करके सुख एवं शांतिपूर्वक अपना समय व्यतीत करेंगे। पुत्र संतति से आप युक्त रहेंगे तथा इनसे आपको इच्छित सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। ऐसे व्यक्ति गौर वर्ण, कंचन देह, मछली के समान आकर्षक व सुन्दर नेत्र वाले, ललाट चौड़ी व भरा-पूरा चेहरा, लम्बे कद के मालिक होते हैं। यह राशि दिवाबली, जलतत्व प्रधान व सत्वगुणी है । 'पूर्वाभाद्रपद' के अंतिम चरण में जन्मे व्यक्ति धार्मिक बुद्धि से ओत-प्रोत, मेहमानप्रिय, सामाजिक अच्छाइयों व नियमों का पालन करने वाले, बातचीत में प्रवीण होते हैं। मीन राशि वाले व्यक्ति कूटनीति, रणनीति व षड्यंत्रकारी मामलों में एक प्रतिशत भी रुचि नहीं लेते। इनका प्राकृतिक स्वभाव उत्तम, दयालु व इनमें दानशीलता होती है।
धर्म के प्रति आपके मन में श्रद्धा होगी तथा आप समय- समय पर धार्मिक कार्य-कलापों एवं अनुष्ठानों को सम्पन्न करेंगे। इससे आपको आत्मिक शांति की प्राप्ति होगी। साथ ही बंधु एवं मित्र वर्ग में भी आप प्रिय एवं आदरणीय होंगे। इनसे आपको इच्छित लाभ एवं सहयोग मिलता रहेगा। आपके असली मित्र बहुत थोड़े हैं। एक मित्र जो किसी कारणवश आपका शत्रु हो जाए, उसके द्वारा भारी आघात पहुंचाने का खतरा है, सतर्क रहें ।
यदि आपका जन्म मीन राशि के 'पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र' (दो) के चतुर्थ चरण में हुआ है, तो आपका जन्म 16 वर्ष की बृहस्पति की महादशा में
हुआ है। आपकी योनि-सिंह, गण-मनुष्य, वर्ण-विप्र, हंसक-जल, नाड़ी-आद्य, पाया-लोहा तथा वर्ग-सर्प है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक क्षुब्ध मन वाला, धनी, निरोगी, स्त्री के वश में रहने वाला तथा कंजूस होता है। यदि आपका जन्म मीन राशि के 'उत्तराभाद्रपद नक्षत्र' (दू, थ, झ, य) में है, तो आपका जन्म 19 वर्ष की शनि की महादशा
में हुआ है। आपकी योनि - गौ, गण-मनुष्य, वर्ण- विप्र, हसंक - जल, पाया-लोहा, प्रथम दो चरण का वर्ग-सर्प तथा अंतिम दो चरण का वर्ग-सिंह है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक कुशल वक्ता, परम धार्मिक, धनी व सुखी होते हैं। प्रायः जीवन में शत्रु न बनाकर मित्रों की संख्या बढ़ाने में विश्वास रखते हैं।
यदि आपका जन्म मीन राशि के 'रेवती नक्षत्र' (दे, दो, चा, ची) में हुआ है, तो आपका जन्म 17 वर्ष की बुध की महादशा में हुआ है। आपकी योनि - गज, गण देव, वर्ण- विप्र, हंसक - जल, नाड़ी - अत्य, गण-देव, वर्ण-विप्र, पाया-सुवर्ण, प्रथम दो चरण का वर्ग-सर्प तथा अंतिम दो चरण का वर्ग-सिंह है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक प्रायः आमदनी से अधिक खर्च करता है तथा समझौते वाले दृष्टिकोण में विश्वास रखता है।
मीन राशि का चिन्ह ‘मुख- पूंछ मिलित दो मछली' हैं। आपको जल से निकली हुई वस्तु नमक, हीरे-जवाहरात, समुद्र पार देशों से माल मंगाने तथा भेजने से तथा नवीन वस्तुओं का उत्पादन करने से विशेष धन लाभ हो सकता है। स्त्रियों के सम्पर्क से भी आपका भाग्योदय संभव है। 32 वर्ष पश्चात् आपको पुत्र एवं नौकरी का योग बनता है। शत्रु आपसे हार जाएंगे। भाग्योदय हेतु गुरु रत्न 'पुखराज' को स्वर्ण मुद्रिका में धारण करें।
उपायः- मीन राशि का स्वामी बृहस्पति है, अतः पुखराज या सुनैला रत्न धारण करें। गुरुवार को थोड़ा सा गुड़ व चना दाल एक आटे की लोई में डालकर गाय को खिलाएं। रविवार व मंगलवार के अलावा पीपल को सींचना भी मीन राशि वालों के लिए फायदेमंद है। पीले रंग का सुगन्धित रूमाल पास में रखें। गुरुवार को हल्दी युक्त दूध का सेवन करें।
मीन राशि की प्रमुख विशेषताएं
- राशि – मीन
- राशि चिन्ह – दो मछलियाँ (आपस में जुड़ी हुई)
- राशि स्वामी – गुरु (बृहस्पति)
- राशि तत्त्व – जल तत्त्व
- राशि स्वरूप – द्विस्वभाव
- राशि दिशा – उत्तर
- राशि लिंग व गुण – स्त्री, सत्त्वगुणी
- राशि जाति – ब्राह्मण
- राशि प्रकृति व स्वभाव – सौम्य स्वभाव, कफ प्रकृति
- राशि का अंग – चरण (पैर)
- अनुकूल रत्न – पुखराज
- अनुकूल उपरत्न – सुनैला, पुखराज टाइप स्टोन
- अनुकूल धातु – सोना
- अनुकूल रंग – पीला
- शुभ दिवस – गुरुवार
- अनुकूल देवता – विष्णु
- व्रत / उपवास – गुरुवार
- अनुकूल अंक – 3
- अनुकूल तारीखें – 3, 12, 21, 30
- मित्र राशियां – कर्क, वृश्चिक
- शत्रु राशियां – मेष, सिंह, धनु
- व्यक्तित्व – आध्यात्मिक, प्रभावशाली, अध्ययनशील मनोवृत्ति
- सकारात्मक तथ्य – विनम्रता, सज्जनता, कल्पनाशीलता
- नकारात्मक तथ्य – अधैर्य, लापरवाही, अत्यधिक चिंता