MM Naravane on India: 'चीन हमारा दुश्मन नहीं', पूर्व सेना प्रमुख नरवणे ने क्यों कही ऐसी बात?

Time Published: Friday, August 21, 2026, 18:05 [IST]

MM Naravane on India: भारत की सुरक्षा और रणनीतिक चुनौतियों को लेकर पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने चीन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों और लंबे समय में चीन भारत का मुख्य प्रतिस्पर्धी बनने जा रहा है।

नरवणे के मुताबिक, दोनों देशों के बीच मुकाबला सिर्फ सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीति, अर्थव्यवस्था और व्यापार समेत कई क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। हालांकि, उन्होंने चीन को 'दुश्मन' कहने के बजाय 'प्रतिस्पर्धी' शब्द इस्तेमाल करने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने चीन के साथ मतभेदों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाने की बात कही।

MM Naravane on India

चीन हमारा शत्रु नहीं, मुख्य प्रतिस्पर्धी

पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने चीन को लेकर कहा कि भारत को उसे शत्रु के तौर पर नहीं, बल्कि मुख्य प्रतिस्पर्धी के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में चीन भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक और सैन्य क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है। नरवणे ने साफ किया कि वह जानबूझकर 'प्रतिस्पर्धी' शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, 'शत्रु' का नहीं।

पाकिस्तान से आतंकवाद का खतरा बरकरार

नरवणे ने कहा कि भारत का ध्यान लंबे समय से पाकिस्तान की ओर रहा है, क्योंकि वहां से आतंकवाद का खतरा लगातार बना हुआ है। भारत और पाकिस्तान के बीच कई बड़े युद्ध हो चुके हैं और सीमा विवाद भी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से तत्काल चुनौती आतंकवाद के कारण बनी हुई है। इसी वजह से भारत की पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा और सैन्य तैयारी लगातार महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

दोनों देशों से अलग-अलग तरह की चुनौती

पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि भारत ने चीन और पाकिस्तान दोनों के साथ युद्ध लड़े हैं और दोनों देशों के साथ सीमा विवाद भी हैं। हालांकि, दोनों की परिस्थितियां और चुनौतियां अलग-अलग हैं। पाकिस्तान से भारत को मुख्य रूप से आतंकवाद का खतरा है, जबकि चीन के साथ चुनौती काफी व्यापक है। चीन राजनीति, अर्थव्यवस्था, व्यापार और सैन्य शक्ति के स्तर पर भारत के साथ प्रतिस्पर्धा करेगा। इसलिए दोनों देश भारत के रणनीतिक रडार पर बने रहेंगे।

चीन से बातचीत और कूटनीति पर जोर

जनरल नरवणे ने कहा कि भारत को चीन के साथ अपने पुराने मतभेदों को बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बल प्रयोग हमेशा आखिरी विकल्प होना चाहिए। हालांकि, इसके साथ भारत को अपनी सैन्य ताकत और प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखना होगा। उनका कहना है कि मजबूत सैन्य तैयारी किसी भी संभावित दुस्साहस को रोकने में अहम भूमिका निभाती है और इससे बातचीत के दौरान भारत की स्थिति भी मजबूत रहती है।

पड़ोसी देशों की स्थिरता भारत के लिए जरूरी

नरवणे ने कहा कि नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों में स्थिरता भारत के रणनीतिक हितों से सीधे जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत अपने पड़ोसियों को चुन नहीं सकता, इसलिए मौजूदा परिस्थितियों में बेहतर परिणाम हासिल करने की कोशिश करनी होगी। पड़ोसी देशों में अस्थिरता का असर भारत तक पहुंच सकता है। इससे शरणार्थियों का पलायन, तस्करी, मादक पदार्थों और अवैध हथियारों की आपूर्ति जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

'शांति चाहते हैं तो युद्ध की तैयारी करें'

म्यांमार का उदाहरण देते हुए नरवणे ने कहा कि अगर पड़ोसी देश अस्थिर है तो उसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत को पड़ोसी देशों में स्थिरता बनाए रखने में मदद करनी चाहिए, लेकिन साथ ही अपनी सेना को भी पर्याप्त प्रतिरोधक क्षमता से लैस रखना जरूरी है। नरवणे ने कहा कि भारत को शांति के लिए तैयार रहना चाहिए, लेकिन संभावित संघर्ष से निपटने के लिए सैन्य तैयारी भी मजबूत होनी चाहिए। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा, 'यदि आप शांति चाहते हैं, तो युद्ध की तैयारी करें।'