क्या बाघ ने ही बाघ का किया शिकार? बालाघाट में गोरा बाघिन के बेटे 'सूखा' की मौत, MP में इस साल 46 टाइगर की गई जान

क्या बाघ ने ही बाघ का किया शिकार? बालाघाट में गोरा बाघिन के बेटे 'सूखा' की मौत, MP में इस साल 46 टाइगर की गई जान

बाघImage Credit source: Getty Images

Balaghat tiger death: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में एक नर बाघ की मौत का मामला सामने आया है. लालबर्रा वन परिक्षेत्र के सोनवानी अभ्यारण्य क्षेत्र में 13 माह के नर बाघ सूखा का शव मिला है. यह बाघ प्रसिद्ध गोरा बाघिन का बेटा था. वन विभाग की जांच में बाघ की मौत दूसरे बाघ के साथ हुए संघर्ष में होने की आशंका जताई गई है. घटना के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और पोस्टमार्टम के बाद बाघ का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

लालबर्रा वन परिक्षेत्र के सोनवानी अभ्यारण्य क्षेत्र के कक्ष क्रमांक-443 में वन अमले को नर बाघ का शव दिखाई दिया. इसकी सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई. सूचना मिलने के बाद मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) गौरव चौधरी और कटंगी के एसडीओ यशपाल मेहरा मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया.

वन विभाग की टीम ने पूरे क्षेत्र की जांच की और बाघ की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए आवश्यक साक्ष्य जुटाए. मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि बाघ के शरीर पर चोट के निशान मिले हैं, जिससे किसी अन्य वन्यजीव के साथ संघर्ष की संभावना जताई जा रही है.

पीएम रिपोर्ट में संघर्ष के मिले संकेत

पेंच टाइगर रिजर्व के वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अखिलेश मिश्रा ने मौके पर पहुंचकर मृत बाघ का पोस्टमार्टम किया. प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघ के शरीर पर संघर्ष के निशान पाए गए हैं.

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती तौर पर माना जा रहा है कि बाघ की मौत क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर हुई भिड़ंत में हुई है. जंगलों में नर बाघ अपने इलाके पर कब्जे को लेकर अक्सर दूसरे नर बाघों से संघर्ष करते हैं. ऐसे संघर्ष कई बार जानलेवा साबित हो जाते हैं.

गोरा बाघिन का बेटा था सूखा

मृत बाघ सूखा प्रसिद्ध गोरा बाघिन का बेटा था. महज 13 माह की उम्र में उसकी मौत से वन्यजीव प्रेमियों में भी चिंता है. अधिकारियों के अनुसार, बाघों की प्राकृतिक जीवन प्रक्रिया में क्षेत्रीय संघर्ष एक सामान्य घटना है, लेकिन बढ़ती बाघ मौतों को देखते हुए वन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है. घटना के बाद नियमानुसार बाघ के शव का अंतिम संस्कार किया गया. वन विभाग की टीम अब क्षेत्र में मौजूद अन्य बाघों की गतिविधियों पर भी नजर रख रही है.

मध्य प्रदेश में इस साल 46 बाघों की मौत

मध्य प्रदेश में बाघों की मौत का आंकड़ा लगातार चिंता का विषय बना हुआ है. जनवरी 2026 से अब तक प्रदेश में 46 बाघों की मौत दर्ज की जा चुकी है. वन विभाग के सामने बाघों के संरक्षण और उनकी सुरक्षा को लेकर बड़ी चुनौती बनी हुई है.

मध्य प्रदेश को देश में सबसे अधिक बाघों की संख्या वाले राज्यों में गिना जाता है. ऐसे में लगातार हो रही बाघों की मौतें वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बन रही हैं. वन विभाग अब इस मामले में रिपोर्ट तैयार कर रहा है.

पंकज डहरवाल

पंकज डहरवाल

पंकज डहरवाल मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के गांव चिखला बांध के रहने वाले हैं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा चिखला बांध में ही संपन्न हुई. वर्ष 2013 में न्यूज़ पेपर नवभारत में रिपोर्टर के तौर पर पत्रकारिता में क्षेत्र में प्रवेश किए. नवभारत न्यूज़ पेपर में उन्होंने 10 वर्ष तक सेवा दी. इसके बाद वो TV9 भारतवर्ष से जुड़ गए. जिले की हर खबर एक नए अंदाज और नए कलेवर में पहुंचाने की कोशिश करते हैं.

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