MP Employee-Pensioner Health Insurance: एमपी में हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम 7 साल से अटकी, योजना की लेटलतीफी पर उठे सवाल, 20 लाख कर्मचारी-पेंशनर्स को हेल्थ प्रोटेक्शन का इंतजार
MP Employee-Pensioner Health Insurance Scheme: मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए प्रस्तावित स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
मध्यप्रदेश के करीब 20 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स प्रस्तावित स्वास्थ्य सुरक्षा का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सालों से लंबित कर्मचारी-पेंशनर्स स्वास्थ्य बीमा योजना को अब बिना देरी किए लागू किया जाए।
मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष इंजीनियर सुधीर नायक ने सरकार से योजना को जल्द लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्ष 2019 में शुरू हुई प्रक्रिया सात साल बाद भी निचले स्तर तक नहीं पहुंच सकी है।
2019 में तत्कालीन सीएस लाए थे प्रस्ताव
सुधीर नायक के मुताबिक, वर्ष 2019 में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव वित्त अनुरोग जैन और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य पल्लवी जैन गोविल के स्तर पर मंत्रालय में कर्मचारी संगठनों की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें कर्मचारियों और पेंशनरों को स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके लिए संगठनों से सुझाव भी लिए गए थे।
सरकार पर सीधे तौर पर नहीं पड़ेगा भार
उनका कहना है कि उस समय योजना को लेकर कर्मचारियों में सकारात्मक माहौल था, लेकिन लंबे समय बाद भी इसे लागू नहीं किया जा सका। संघ अध्यक्ष का दावा है कि प्रस्तावित योजना में सरकार पर सीधे तौर पर अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।
वेतन और पेंशन से काट सकते हैं प्रीमियम
उन्होंने सरकार को सुझाव देते हुए बताया कि कर्मचारियों के वेतन और पेंशनरों की पेंशन से बीमा प्रीमियम काटकर योजना संचालित की जा सकती हैं। स्वास्थ्य दावों का भुगतान संबंधित बीमा कंपनी या निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से किया जा सकता है।
पुलिसकर्मियों का 5 लाख तक का इंश्योरेंस
अध्यक्ष सुधीर नायक ने एमपी पुलिस में पहले से संचालित हेल्थ इंश्योरेंस का उदाहरण देते हुए कहा कि पुलिस कर्मचारियों के लिए वर्ष 2013 से हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम चल रही है। उनके अनुसार, इसमें करीब 60 रुपए मासिक प्रीमियम पर 5 लाख रुपए तक का हेल्थ इंश्योरेंस कवर उपलब्ध कराया जाता है।
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सरकार को संघ ने सुझाए तीन विकल्प
उन्होंने सुझाव दिया कि प्रदेश के अन्य कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए भी इसी तरह का मॉडल अपनाया जा सकता है। जरुरत पड़ने पर निजी बीमा कंपनी को जिम्मेदारी देने, किसी शासकीय कंपनी या निगम के माध्यम से योजना संचालित करने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।
अस्पतालों की भूमिका की निगरानी की मांग
संघ के अध्यक्ष नायक ने अस्पतालों द्वारा कथित तौर पर इलाज का बिल बढ़ाने की शिकायतों का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि बीमा योजना लागू होने के साथ अस्पतालों और बीमा दावों की निगरानी के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, ताकि योजना का दुरुपयोग न हो।
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