दतिया उपचुनाव: मतदान के बीच सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पूर्व विधायक राजेंद्र भारती; MP सरकार और ECI को नोटिस जारी| Navbharat Live

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सार

Datia By Election: दतिया उपचुनाव की वोटिंग के बीच सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पूर्व विधायक राजेंद्र भारती, सजा पर रोक के लिए दायर याचिका पर MP सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस, 27 अगस्त को अगली सुनवाई।

During the Datia Assembly by-election, former MLA Rajendra Bharti approached the Supreme Court, where notices were issued to the Madhya Pradesh government and the Election Commission in connection with the matter

सुप्रीम कोर्ट (सोर्स- IANS)

विस्तार

Rajendra Bharti Moves Supreme Court: मध्य प्रदेश की चर्चित दतिया विधानसभा सीट पर एक तरफ जहां उपचुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया जारी है, वहीं दूसरी तरफ इसी सीट से कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने अपनी दोषसिद्धि पर स्टे लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

सर्वोच्च अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश शासन, भारत निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

27 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

बुधवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राजेंद्र भारती की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को स्वीकार करते हुए सभी पक्षों को अपना-अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को तय की गई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल दतिया में चल रही उपचुनाव की प्रक्रिया पर किसी भी तरह की रोक लगाने से साफ इंकार कर दिया है।

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क्या है पूरा मामला?

दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की विशेष एमपी/एमएलए (एमपी-एमएलए) कोर्ट ने बैंक एफडी घोटाला मामले में 2 अप्रैल 2026 को 3 साल के कारावास की सजा सुनाई थी। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत सजा मिलने के बाद विधानसभा सचिवालय द्वारा उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई थी। विधायक पद से अयोग्य ठहराए जाने के कारण दतिया सीट रिक्त घोषित हुई, जिसके बाद निर्वाचन आयोग ने यहां उपचुनाव की घोषणा की।

हाईकोर्ट से झटका मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे भारती

सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले राजेंद्र भारती ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी सजा पर रोक लगाने और उपचुनाव की प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग की थी। हालांकि, 10 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस मनोज जैन की एकल पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। दरअसल, हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की थी कि सजा पर स्टे देना एक असाधारण अधिकार है, जिसका उपयोग केवल विशेष परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए।

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ट्रायल कोर्ट के फैसले में प्रथम दृष्टया कोई स्पष्ट गलती या बुनियादी कमी नजर नहीं आती। केवल इसलिए कि कोई व्यक्ति एमएलए या एमपी है और उसकी राजनीतिक स्थिति पर असर पड़ रहा है, सजा पर रोक लगाने का वैध आधार नहीं बन सकता।हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद ही राजेंद्र भारती ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जहां अब 27 अगस्त को अगली सुनवाई में इस मामले पर आगे का फैसला होगा।

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