MP Snake Census: पहली बार होगी सांपों की वैज्ञानिक गणना, सतपुड़ा और कान्हा टाइगर रिजर्व से शुरू हुआ एक साल का सर्वे - Haribhoomi
मध्य प्रदेश में पहली बार सतपुड़ा और कान्हा टाइगर रिजर्व में सांपों की वैज्ञानिक गणना शुरू हुई है। WII की टीम कैमरा ट्रैप, GPS आधारित फोटोग्राफी और फील्ड सर्वे के जरिए एक वर्ष तक सांपों की प्रजातियों, वितरण और घनत्व का अध्ययन करेगी।
एमपी में पहली बार होगी सांपों की वैज्ञानिक गणना
- Published: 01 Aug 2026, 09:32 AM IST
- Last Updated: 01 Aug 2026, 09:32 AM IST
मध्य प्रदेश में पहली बार सांपों की वैज्ञानिक गणना शुरू की गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और कान्हा टाइगर रिजर्व से हुई है। इस अध्ययन का उद्देश्य प्रदेश में सांपों की विभिन्न प्रजातियों, उनकी संख्या, वितरण और घनत्व का वैज्ञानिक तरीके से रिकॉर्ड तैयार करना है। साथ ही भविष्य में सांप के काटने की घटनाओं को कम करने और संरक्षण की बेहतर रणनीति बनाने में भी यह परियोजना मदद करेगी।
भारतीय वन्यजीव संस्थान संचालित
इस परियोजना को भारतीय वन्यजीव संस्थान संचालित कर रहा है। वन विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एल. कृष्णमूर्ति ने बताया कि पहले चरण में दोनों टाइगर रिजर्व को अध्ययन के लिए चुना गया है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने भी पुष्टि की कि रिजर्व के विभिन्न इलाकों में सांपों की गणना का काम शुरू हो चुका है।
विशेष स्नेक किट भी उपलब्ध
परियोजना शुरू करने से पहले अप्रैल में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसमें करीब 110 वन अधिकारियों और कर्मचारियों को सांपों की पहचान, डेटा संग्रह और आधुनिक तकनीकों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षित कर्मचारियों को विशेष स्नेक किट भी उपलब्ध कराई गई है, ताकि वे सुरक्षित तरीके से सर्वे का कार्य कर सकें।
गणना के लिए कैमरा ट्रैप, पिट होल (Pit Hole) तकनीक और GPS आधारित फोटोग्राफी का उपयोग किया जा रहा है। गश्त के दौरान वनकर्मी सांप दिखाई देने पर उसकी फोटो लेकर एक साझा व्हाट्सएप ग्रुप में अपलोड करेंगे। इन तस्वीरों का विश्लेषण WII की रिसर्च टीम करेगी और उसी के आधार पर सांपों की प्रजातियों और उनके वितरण की सूची तैयार की जाएगी।
पूरा अध्ययन एक वर्ष तक
इस अध्ययन के दौरान केवल प्रजातियों की पहचान ही नहीं, बल्कि यह भी दर्ज किया जाएगा कि किस क्षेत्र में कौन-सी प्रजाति अधिक पाई जाती है। साथ ही सड़क दुर्घटनाओं में सांपों की मौत, उनके प्राकृतिक आवास और आबादी के घनत्व (Density) से जुड़ा डेटा भी एकत्र किया जाएगा। यह पूरा अध्ययन एक वर्ष तक चलेगा। कान्हा टाइगर रिजर्व के उप निदेशक प्रकाश कुमार वर्मा के अनुसार, इस सर्वे से प्रदेश में पहली बार सांपों का व्यवस्थित वैज्ञानिक डेटाबेस तैयार होगा। इससे वन विभाग को संरक्षण योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी और मानव-सांप संघर्ष को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकेंगे।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में सांपों की गणना कराने का विचार रखा था। इसके बाद वन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर WII को भेजा। संस्थान की मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार ने इस अध्ययन के लिए वित्तीय स्वीकृति दी। उम्मीद है कि यह परियोजना जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ सांप के काटने से होने वाली घटनाओं की रोकथाम में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।