MP की विरासत को वैश्विक पहचान: UNESCO की Tentative List में शामिल हुए 4 और ऐतिहासिक स्थल
मध्य प्रदेश ने अपनी सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहर की वैश्विक मान्यता को मजबूत करते हुए चार ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को की अस्थायी सूची में जोड़ा है। ये स्थल हैं - बाग गुफा चित्रकला, गिन्नोरगढ़ किला, बटेश्वर-पड़ावली-ककहरामाठ मंदिर समूह, और उदयगिरि गुफाएं, जो सूची में पहले से मौजूद मध्य प्रदेश के 15 स्थलों के साथ शामिल हुए हैं।
By Oneindia Staff
Published: Monday, September 28, 2026, 21:31 [IST]
भोपाल: मध्य प्रदेश की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को वैश्विक पहचान की दिशा में एक और उपलब्धि मिली है। प्रदेश के चार ऐतिहासिक स्थलों को UNESCO की Tentative List में शामिल किया गया है। इनमें बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के मंदिर समूह (बटेश्वर-पदावली-ककरामठ) और उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं। इन स्थलों के Tentative List में शामिल होने से मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ा है।
मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, भारत की कुल 78 अस्थायी धरोहरों में से 19 मध्य प्रदेश में हैं।
पर्यटन सचिव और पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने कहा कि UNESCO की Tentative List में चार और ऐतिहासिक स्थलों का शामिल होना मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इस मान्यता से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश के पर्यटन को नई पहचान मिलेगी और दुनिया भर के पर्यटक प्रदेश की संस्कृति और इतिहास से परिचित हो सकेंगे।
1. बाघ गुफा चित्रकारी, धार
धार जिले में बाघ नदी के किनारे और विंध्य क्षेत्र की पहाड़ियों के पास स्थित बाघ गुफाएं नौ बौद्ध रॉक-कट गुफाओं का समूह हैं। इनका निर्माण मुख्य रूप से चौथी से छठी शताब्दी ईस्वी के बीच का माना गया है।
इन गुफाओं की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यहां मौजूद भित्ति चित्र हैं। विशेष रूप से गुफा संख्या 4, जिसे रंग महल के नाम से जाना जाता है, में शाही दरबार, जुलूस, संगीतकारों, नर्तकों और तत्कालीन सामाजिक जीवन से जुड़े दृश्य दिखाई देते हैं। इन चित्रों में अजंता की भित्ति चित्र परंपरा से जुड़ाव के साथ एक विशिष्ट क्षेत्रीय कलात्मक शैली भी दिखाई देती है। ये गुप्तकालीन सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को समझने के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
2. गिन्नौरगढ़ किला, सीहोर
भोपाल के पास रातापानी वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में पहाड़ी पर स्थित गिन्नौरगढ़ किला गोंड स्थापत्य और राजनीतिक इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है।
इसे एक स्वदेशी गोंड किलेबंद राजधानी के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है। किले की प्राकृतिक सुरक्षा के साथ व्यापक किलेबंदी, शाही संरचनाएं, जलाशय, 65 सीढ़ीदार कुएं और चार झीलें इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं। किले की त्रि-स्तरीय संरचना और आसपास के वन क्षेत्र के साथ इसका जुड़ाव गोंड राजनीतिक संगठन, सैन्य योजना, वास्तुकला और पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियों को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
3. बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह, मुरैना
मुरैना जिले के चंबल क्षेत्र में स्थित बटेश्वर-пदावली-ककरामठ मंदिर समूह प्रारंभिक मध्यकालीन नागर मंदिर वास्तुकला के विकास को दर्शाता है।
मुख्य रूप से आठवीं से ग्यारहवीं शताब्दी के बीच के इन मंदिरों में बटेश्वर का 200 से अधिक मंदिरों वाला समूह, पदावली की नक्काशीदार स्थापत्य कला और ककरामठ का स्मारकीय स्वरूप शामिल है। ये स्थल मध्य भारत में क्षेत्रीय शिल्प कौशल, राजवंशीय संरक्षण, ड्राय-स्टोन मैसनरी तकनीक और मंदिर वास्तुकला एवं मूर्तिकला के विकास की झलक देते हैं।
4. उदयगिरि गुफाएं, विदिशा
विदिशा के पास स्थित उदयगिरि गुफाएं गुप्तकालीन धार्मिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति से जुड़े महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में शामिल हैं।
यहां 20 रॉक-कट गुफाएं हैं, जिनमें पाषाण-कृत मंदिर, विशाल मूर्तियां, शिलालेख और प्राकृतिक स्थलाकृति आपस में जुड़े हुए हैं। यहां की प्रसिद्ध वराह प्रतिमा वैष्णव परंपरा, राजसत्ता और ब्रह्मांडीय व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति के रूप में प्रस्तुत की जाती है। उदयगिरि में हिंदू और जैन परंपराओं से जुड़े तत्वों के साथ गुप्तकालीन संरक्षण के प्रमाण भी मिलते हैं। यह स्थल शुरुआती हिंदू पवित्र वास्तुकला और बाद की विकसित मंदिर परंपराओं के बीच संक्रमण को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
UNESCO की Tentative List में पहले से 15 स्थल
मध्य प्रदेश के 15 अन्य स्थल पहले से UNESCO की Tentative List में शामिल हैं। इनमें 2025 के नामांकनों के तहत मौर्य मार्गों के साथ अशोक अभिलेख स्थल, चौसठ योगिनी मंदिर, उत्तर भारत के गुप्तकालीन मंदिर और बुंदेलों के महल-किलों का समूह शामिल हैं।
2024 में ग्वालियर किला, बुरहानपुर का खूनी भंडारा, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर, रामनगर (मंडला) के गोंड स्मारक और धामनार के ऐतिहासिक समूह को सूची में शामिल किया गया था।
इससे पहले 2021 में नर्मदा घाटी का भेड़ाघाट-लामेताघाट और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, 2019 में ओरछा का ऐतिहासिक समूह, 2014 में भारत के प्रतिष्ठित साड़ी बुनाई समूह और 1998 में मांडू के स्मारकों के समूह को Tentative List में जगह मिली थी।
MPTB ने UNESCO प्रक्रिया के लिए प्रस्ताव भेजे
मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड (MPTB) की ओर से भारत के UNESCO विश्व धरोहर कार्यक्रम के तहत विचार के लिए कई महत्वपूर्ण विरासत संपत्तियों के प्रस्ताव रखे गए थे। इसके बाद भारत में विश्व धरोहर मामलों की नोडल एजेंसी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की राष्ट्रीय प्रक्रिया के माध्यम से मध्य प्रदेश की इन चार धरोहरों को UNESCO की Tentative List में शामिल किया गया।
Tentative List क्या है?
UNESCO की Tentative List किसी देश की उन महत्वपूर्ण सांस्कृतिक, प्राकृतिक या मिश्रित धरोहर संपत्तियों की राष्ट्रीय सूची होती है, जिन्हें भविष्य में World Heritage List के लिए नामांकित किए जाने पर विचार किया जा सकता है। किसी स्थल का Tentative List में शामिल होना विश्व धरोहर नामांकन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण है।
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