My Name Is Khan OTT Mystery: कभी Netflix कभी प्राइम वीडियो... ओटीटी से क्यों गायब होती हैं फिल्में-सीरीज? ये राइट्स का खेल है भैया

My Name Is Khan OTT Mystery: कभी Netflix कभी प्राइम वीडियो... ओटीटी से क्यों गायब होती हैं फिल्में-सीरीज? ये राइट्स का खेल है भैया

ओटीटी की दुनिया कैसे काम करती है?

My Name Is Khan OTT Mystery: बॉलीवुड के ‘किंग खान’ यानी शाहरुख खान और काजोल स्टारर मास्टरपीस फिल्म ‘माय नेम इज खान’ आज भी दर्शकों के दिलों के सबसे करीब है. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जो फिल्म 16 साल पहले थिएटर में रिलीज हुई थी, वो भारत के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कभी पूरी तरह से गायब हो जाती है, तो कभी अचानक किसी एक राइवल प्लेटफॉर्म पर नजर आने लगती है?

हाल ही में जब ये फिल्म अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हुई, तो फैंस के बीच यह चर्चा छिड़ गई कि आखिर एक फिल्म को सही मायनों में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपनी स्थायी जगह बनाने में इतने साल क्यों लग जाते हैं? आखिर क्या वजह है कि ‘9-1-1’ और ‘ग्रेज एनाटॉमी’ जैसी इंटरनेशनल सीरीज नेटफ्लिक्स पर भी दिखती है और डिज्नी+ हॉटस्टार पर भी? क्या ओटीटी राइवल्स के बीच कोई गुप्त समझौता होता है? आइए समझते हैं ओटीटी की इस बैकस्टेज दुनिया का असली खेल!

1. नॉन-एक्सक्लूसिव लाइसेंसिंग और ‘शेयरिंग’ डील

आमतौर पर जब कोई प्रोडक्शन हाउस फिल्म बनाता है, तो वह किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म को दो तरह से डिजिटल राइट्स बेचता है: एक्सक्लूसिव और नॉन-एक्सक्लूसिव.

एक्सक्लूसिव डील: इसमें फिल्म सिर्फ और सिर्फ उसी एक प्लेटफॉर्म पर दिखेगी (जैसे नेटफ्लिक्स ओरिजिनल्स या हॉटस्टार स्पेशल).

नॉन-एक्सक्लूसिव डील: इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत प्रोडक्शन हाउस एक ही समय में दो या तीन अलग-अलग राइवल ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को अपनी फिल्म या शो के स्ट्रीमिंग राइट्स बेच सकता है. ‘9-1-1’, ग्रेज एनाटॉमी या ‘फ्रेंड्स’ जैसे इंटरनेशनल शोज के साथ अक्सर यही होता है. स्टूडियो (जैसे 20th Century Studios या Warner Bros) अलग-अलग डिजिटल राइट्स से ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए नॉन-एक्सक्लूसिव लाइसेंस जारी करते हैं. धुरंधर के साथ भी यही हुआ है.

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2. ‘माय नेम इज खान’ का केस: स्टूडियो राइट्स और टेरिटरी का खेल

‘माय नेम इज खान’ सिर्फ धर्मा प्रोडक्शंस की फिल्म नहीं थी, बल्कि इसमें इंटरनेशनल डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर ‘फॉक्स स्टार स्टूडियोज’ का बड़ा शेयर था यही वजह थी कि शुरुआत में ये फिल्म हॉटस्टार (बिना जियो वाले) पर मौजूद थी, क्योंकि एक समय तक हॉटस्टार, स्टार चैनल और फॉक्स स्टूडियोज़- ये सभी एक ही कॉर्पोरेट परिवार का हिस्सा थे. हालांकि जियो और हॉटस्टार के हाथ मिलाने के बाद ये गणित बदल गया. साथ ही शाहरुख खान की फिल्म भी इस ओटीटी प्लेटफॉर्म से गायब हो गई.

ग्लोबल और इंडियन राइट्स: अक्सर ऐसा भी होता है कि किसी फिल्म के स्ट्रीमिंग राइट्स भारत के लिए किसी एक प्लेटफॉर्म (जैसे हॉटस्टार) के पास होते हैं, लेकिन अमेरिका या यूके (अब्रॉड) के लिए नेटफ्लिक्स के पास. यही वजह है कि ‘माय नेम इज खान’ भारत में कुछ समय के लिए किसी प्लेटफॉर्म से गायब रही, जबकि विदेशों में ये नेटफ्लिक्स या अन्य सर्विस पर उपलब्ध थी. जब फॉक्स और डिज्नी का मर्जर हुआ, तो इसके ग्लोबल डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स के री-रिन्यूअल में लंबा समय लग गया और फिर नेटफ़्लिक्स और वार्नर ब्रोस की डील के बाद ये फिल्म वहां से भी निकल गई.

3. ‘लाइसेंस विंडो’ और कॉन्ट्रैक्ट का एक्सपायर होना

ओटीटी की दुनिया में कोई भी डील ‘हमेशा’ के लिए नहीं होती. जब भी कोई प्लेटफॉर्म किसी फिल्म के राइट्स खरीदता है, तो वह 2 साल, 3 साल या 5 साल की ‘विंडो’ के लिए खरीदता है. मजे की बात ये है कि इस लाइसेंस के तहत कुछ साल तक ‘माय नेम इस खान’ प्राइम वीडियो पर भी स्ट्रीम हो रही थी और फिर समय खत्म होते ही 2024 के दौरान वो वहां से भी गायब हो गई.

मान लीजिए प्राइम वीडियो ने 2020 में किसी फिल्म का 3 साल का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया. 2023 में जैसे ही वह कॉन्ट्रैक्ट खत्म हुआ, 2024 से फिल्म प्लेटफॉर्म से ‘गायाब’ हो गई. इसके बाद अगर नेटफ्लिक्स या हॉटस्टार ने बेहतर बोली लगाई, तो वही फिल्म अगले 3 सालों के लिए दूसरे राइवल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो जाती है.

4. भारतीय कानून और सीसीआई (CCI) के नियम क्या कहते हैं?

भारत में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के तहत ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा (Competition) करने की पूरी आजादी है. कानून के मुताबिक, कोई भी स्टूडियो मोनोपोली (एकाधिकार) नहीं बना सकता. यदि किसी प्रोडक्शन हाउस के पास खुद का ओटीटी प्लेटफॉर्म नहीं है, तो वह अपनी मर्जी से जिसे चाहे उसे तय समय सीमा के लिए राइट्स लीज पर दे सकता है.

तो अगली बार जब आपको आपकी पसंदीदा फिल्म या कोई सीरीज अचानक एक प्लेटफॉर्म से गायब होकर दूसरे ऐप पर दिखे, तो समझ जाइए कि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि करोड़ों डॉलर के लाइसेंसिंग विंडो और नॉन-एक्सक्लूसिव कॉन्ट्रैक्ट्स का सोचा-समझा खेल है.

सोनाली नाईक

सोनाली नाईक

सोनाली करीब 15 सालों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रहार न्यूज पेपर से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी. इस न्यूज पेपर में बतौर रिपोर्टर काम करते हुए सोनाली ने एंटरटेनमेंट बीट के साथ-साथ सीसीडी (कॉलेज कैंपस और ड्रीम्स) जैसे नए पेज पर काम किया. उन्होंने वहां 'फैशनेरिया' नाम का कॉलम भी लिखा. इस दौरान एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की, लेकिन पत्रकारिता के जुनून की वजह से इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के इरादे से 2017 में टीवी9 से सीनियर कोरेस्पोंडेंट के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की. टीवी9 गुजराती चैनल में 3 साल तक एंटरटेनमेंट शो की जिम्मेदारी संभालने के बाद सोनाली 2020 में टीवी9 हिंदी डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम में शामिल हुईं. सोनाली ने टीवी9 के इस सफर में कई ब्रेकिंग, एक्सक्लूसिव न्यूज और ऑन ग्राउंड कवरेज पर काम किया है. हिंदी के साथ-साथ गुजराती, मराठी, इंग्लिश भाषा की जानकारी होने के कारण डिजिटल के साथ-साथ तीनों चैनल के लिए भी उनका योगदान रहा है. रियलिटी शोज और ग्लोबल कंटेंट देखना सोनाली को पसंद है. नई भाषाएं सीखना पसंद है. संस्कृत भाषा के प्रति खास प्यार है. नुक्कड़ नाटक के लिए स्क्रिप्ट लिखना पसंद है. सोनाली के लिखे हुए स्ट्रीट प्लेज 'पानी', 'मेड इन चाइना' की रीडिंग 'आल इंडिया रेडियो' पर सोशल अवेयरनेस के तौर पर की जा चुकी है.

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