'वकील कॉकरोच नहीं हैं...', NALSAR विवाद को लेकर मनन कुमार मिश्रा ने AAP और CJP पर साधा निशाना - nalsar students demand apology from bci chief manan mishra in cji surya kant case
नालसर विधि विश्वविद्यालय के छात्रों के विरोध और बीसीआई के आदेश पर विवाद के बाद, बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

मनन कुमार मिश्रा से माफी की मांग पर रखी अपनी बात
HighLights
नालसर छात्रों के पंजीकरण रोकने का आदेश वापस लिया गया।
बीसीआई अध्यक्ष ने 'वकील कॉकरोच नहीं' कहकर AAP-CJP को घेरा।
सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई के हस्तक्षेप पर नाराजगी जताई।
डिजिटल डेस्क, हैदराबाद। नालसर विधि विश्वविद्यालय के छात्रों ने शनिवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के उस आदेश की निंदा की, जिसमें सभी राज्य बार काउंसिल को यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के स्नातकों का अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण करने से रोक दिया गया था।
विश्वविद्यालय की स्टूडेंट बार काउंसिल ने छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के लिए बीसीआइ के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा से माफी मांगने को कहा था। इस पर बीसीआई अध्यक्ष का बयान सामने आया है।
BCI अध्यक्ष ने AAP और CJP पर साधा निशाना
बार काउंसिल ऑफ इंडिया में कथित गड़बड़ियों और अपने इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध कर रहे वकीलों के एक समूह पर, BCI चेयरमैन और राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने कहा, 'हाल ही में सोशल मीडिया पर बहुत सी गैर-जिम्मेदाराना और बेतुकी बातें चल रही हैं।'
मनन कुमार मिश्रा ने आगे कहा, 'हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश, जो उनके चांसलर भी हैं, उनका बहिष्कार करने का फैसला किया और उस दीक्षांत समारोह में शामिल होने से इनकार कर दिया जिसकी अध्यक्षता उन्हें करनी थी।'
BCI चीफ ने आगे कहा, 'बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन के तौर पर, मुझे यह बात बहुत आपत्तिजनक लगी। नतीजतन, एक आदेश जारी किया गया कि उनका एनरोलमेंट प्रोसेस नहीं किया जाएगा। हालांकि, 15 मिनट के भीतर ही वह आदेश वापस ले लिया गया और छात्रों की शिकायतों का समाधान किया गया।'
मनन कुमार मिश्रा ने आम आदमी पार्टी और कॉकरोच जनता पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा, 'इस मौके का फायदा उठाते हुए, आम आदमी पार्टी और तथाकथित CJP समूह के सदस्यों ने मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी। उन्होंने बार काउंसिल का ताला तोड़ दिया।'
'वकील लीगल कॉकरोच नहीं हैं'
बार काउंसिल के अध्यक्ष ने इस्तीफे की मांग पर कहा, 'मैंने 12 से 14 साल तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन के तौर पर काम किया है क्योंकि मैं चुना गया था। मैंने सात बार चुनाव जीता है।'
मनन कुमार मिश्रा ने आगे कहा, 'वकील कॉकरोच नहीं हो सकते, वे बुद्धिजीवी हैं। ये जो सीजेपी ने लीगल कॉकरोच का नाम दिया है, ये बहुत ही शर्म की बात है। ये बात वकील बर्दाश्त नहीं करेंगे, युवा अधिवक्ता बर्दाश्त नहीं करेंगे।'
स्टूडेंट बार काउंसिल ने मिश्रा की उस टिप्पणी पर आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ शिक्षक और बाहरी लोग निर्दोष छात्रों को भड़काने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि बीसीआइ ने गुरुवार को सभी स्टेट बार काउंसिल को निर्देश दिया था कि अगले आदेश तक नालसर विधि विश्वविद्यालय के 2026 बैच के किसी भी स्नातक का अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण न किया जाए।
हालांकि, इस मुद्दे पर हंगामे के बाद कुछ ही घंटों में यह निर्देश वापस ले लिया गया। बीसीआइ के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने भी शुक्रवार को नाराजगी जताई थी।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि यह छात्रों और उनके बीच का मामला है। इसमें बीसीआइ दखल देने वाला कौन होता है। छात्रों को विरोध करने का अधिकार है।
बार काउंसिल को इस मामले में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। दरअसल, विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों को पत्र लिखकर दीक्षांत समारोह (जिसकी तिथि अभी घोषित नहीं हुई है) में प्रधान न्यायाधीश को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाने का विरोध किया था। इसके बाद से यह मामला सुर्खियों में है।
छात्रों ने कहा कि हम आदेश वापस लिए जाने और कार्रवाई का आधार समाप्त हो जाने को स्वीकार करते हैं। हालांकि, इसके बावजूद हमारे लिए इस घटना की निंदा करना महत्वपूर्ण है…।
2026 बैच के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने का राज्य बार काउंसिल को बीसीआइ का निर्देश उसके वैधानिक कार्यों के दायरे में नहीं आता था।
बीसीआइ का जांच संबंधी अनुरोध कार्यकारी परिषद के सामने रखा जाएगा
नालसर विधि विश्वविद्यालय ने कहा है कि वह दीक्षा समारोह में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत को बुलाने का विरोध करने वाले लोगों की जांच के लिए बीसीआइ के अनुरोध को अपनी कार्यकारी परिषद के सामने रखेगा।
कुलपति श्रीकृष्ण देव राव ने गुरुवार देर रात एक बयान में कहा कि उन्हें दिन में बीसीआइ से एक पत्र मिला था। इस पत्र में 2026 बैच के सभी स्नातक छात्रों के पंजीकरण पर रोक लगाने और दीक्षा समारोह से जुड़ी हालिया घटनाओं में शामिल लोगों के बारे में जांच रिपोर्ट मांगी गई थी।
इसके बाद एक और पत्र आया, जिसमें छात्रों के पंजीकरण पर रोक संबंधी निर्देश को पलट दिया गया। हालांकि, जांच रिपोर्ट की जरूरत बरकरार रखी गई है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
यह भी पढ़ें- जून मालिया ने शिशिर अधिकारी से की मुलाकात, बाढ़ प्रभावित एगरा के विकास के लिए डेढ़ करोड़ रुपये देने की घोषणा