अगस्त में NALSAR से IIT दिल्ली तक छात्रों का आंदोलन, जानें क्या रहा कारण

अगस्त में NALSAR से IIT दिल्ली तक छात्रों का आंदोलन, जानें क्या रहा कारण

अगस्त में NALSAR से IIT दिल्ली तक छात्रों का आंदोलन.

भारत के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में अगस्त के दौरान छात्रों के विरोध प्रदर्शन चर्चा में रहे. NALSAR और NLSIU जैसे प्रमुख लॉ संस्थानों में स्टूडेंट्स ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और बार काउंसिल ऑफ इंडिया से जुड़े फैसलों और कार्यक्रमों पर सवाल उठाए. वहीं IIT दिल्ली और IISER पुणे में छात्रों का विरोध स्टूडेंट वेलफेयर, मेंटल हेल्थ, प्रशासनिक जवाबदेही और परिसर से जुड़े मुद्दों को लेकर सामने आया. अलग-अलग संस्थानों में विरोध के कारण भले ही अलग रहे, लेकिन सभी जगह छात्रों ने अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रदर्शन, धरने और खुले पत्रों का सहारा लिया. इससे उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की भागीदारी और उनकी आवाज को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.

NALSAR में मुख्य न्यायाधीश के कार्यक्रम का विरोध

हैदराबाद स्थित NALSAR में 400 से ज्यादा छात्रों ने दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति जताई. छात्रों की चिंताएं हाल के कुछ मामलों में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका और उनकी टिप्पणियों से जुड़ी थीं. इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 2026 बैच के छात्रों के अधिवक्ता के तौर पर रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने का निर्देश दिया, जिसे कुछ घंटों बाद वापस ले लिया गया. बाद में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने समारोह का निमंत्रण स्वीकार ही नहीं किया था.

NLSIU, IIT दिल्ली में भी प्रदर्शन

बेंगलुरु के NLSIU में भी छात्रों और पूर्व छात्रों ने मुख्य न्यायाधीश और BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की प्रस्तावित मौजूदगी का विरोध किया. इसके बाद विश्वविद्यालय ने 2026 का दीक्षांत समारोह रद्द कर दिया और डिग्रियां अनुपस्थिति में देने का फैसला किया.

IIT दिल्ली में 31 वर्षीय MSc फिजिक्स छात्र की मौत के बाद छात्रों ने प्रदर्शन किया. उन्होंने मामले की स्वतंत्र जांच, अधिकारियों की जवाबदेही और स्टूडेंट वेलफेयर व्यवस्था में बदलाव की मांग की. छात्रों की आपत्ति के बाद जांच समिति का पुनर्गठन किया गया और रिटायर दिल्ली हाईकोर्ट की जज न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता को इसका प्रमुख बनाया गया.

IISER पुणे में छात्र परिषद के निलंबन पर नाराजगी

IISER पुणे में 27 अगस्त से छात्रों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया. छात्र परिषद के महासचिव राज बागवे के निलंबन के अलावा छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक दबाव, हॉस्टल नियम और छात्र प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे उठाए.

इन सभी घटनाओं को फिलहाल देशव्यापी छात्र आंदोलन कहना जल्दबाजी होगी. हालांकि, इन प्रदर्शनों से यह जरूर सामने आया है कि प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र अब अपने से जुड़े फैसलों में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और भागीदारी की मांग कर रहे हैं.

सपना यादव

सपना यादव

दिल्ली में जन्मीं सपना यादव TV9 भारतवर्ष डिजिटल में बतौर असिस्‍टेंट प्रड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता जगत में 4 वर्षों से ज्‍यादा के अनुभव के साथ काम जारी है. ह्यूमन इंटरेस्ट, राजनीति, वर्ल्ड, एजुकेशन, नॉलेज, करंट अफेयर्स से जुड़ी खबरों में खास दिलचस्पी रखती हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से BA Hons. हिस्ट्री की पढ़ाई करने के बाद उन्‍होंने पत्रकारिता को लक्ष्‍य बनाया, फिर जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा इन टीवी जर्नलिज्म किया, जामिया से ही हिस्ट्री में मास्टर्स भी किया और फिर इसके बाद गुरु जम्बेश्वर साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. मास कम्‍यूनिकेशन में पत्रकारिता की डिग्री लेने के बाद जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा. इसके बाद उन्‍होंने बतौर ट्रेनी TV9 भारतवर्ष डिजिटल में एक साल तक काम किया. ट्रेनी के दौरान अलग-अलग तरह की खबरों का अनुभव लेने के बाद TV9 भारतवर्ष डिजिटल में असिस्‍टेंट प्रड्यूसर के पद पर काम शुरू किया. यहां पर एंकरिंग, वॉइस ओवर, वीडियो प्रोडक्शन, न्यूज राइटिंग जैसे काम किए. इस समय वह एजुकेशन डेस्क पर कार्यरत हैं और स्टूडेंट्स के लिए करियर से जुड़े विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं और यूनिवर्सिटीज की महत्वपूर्ण जानकारियों को कवर कर रही हैं. सपना यादव को ट्रेवल करना, लिखना- पढ़ना पसंद है और वो प्रकृति को करीब से महसूस करना ज्यादा पसंद करती हैं. पत्रकारिता में सफर अभी जारी है.

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