National Award Biggest Record: 10-20 तो कम हैं, इस शख्स ने जीते हैं सबसे ज्यादा नेशनल अवॉर्ड, दूर दूर तक कोई नहीं

National Award Biggest Record: 10-20 तो कम हैं, इस शख्स ने जीते हैं सबसे ज्यादा नेशनल अवॉर्ड, दूर दूर तक कोई नहीं

पूरे करियर में जीते 37 नेशनल अवॉर्ड्स

Most National Awards Winning Actor: भारतीय सिनेमा जगत में नेशनल अवॉर्ड सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है. इस अवॉर्ड को हासिल करना हर कलाकार का सपना होता है. कई ऐसे नामी कलाकार रहे हैं जिन्होंने ताउम्र फिल्म इंडस्ट्री में काम किया लेकिन कोई भी नेशनल अवॉर्ड हासिल नहीं कर सके. लेकिन कुछ कलाकारों ने अपने बेमिसाल करियर के दौरान कई सारे नेशनल अवॉर्ड पाए. कुछ को तो अलग-अलग कैटेगरीज में इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. कुछ ने एक ही कैटेगरी में महारथ हासिल की. जैसे एक्टिंग के लिए अमिताभ बच्चन और मामूटी को सिर्फ इसी कैटेगरी में 4-4 नेशनल अवॉर्ड मिले जो सबसे ज्यादा है.

वहीं दूसरी तरफ केजे येसुदास को सिंगिंग के लिए 8 नेशनल अवॉर्ड मिले जो सबसे ज्यादा है. इसी तरह ए आर रहमान 7 नेशनल अवॉर्ड्स के साथ सबसे ज्यादा बार ये सम्मान पाने वाले कलाकार हैं. इसी तरह कुछ कलाकार ऐसे भी रहे जिन्होंने अलग-अलग कैटेगरीज में ये सम्मान जीता. जैसे संजयलीला भंसाली को करियर में कुल 7 नेशनल अवॉर्ड्स मिले हैं. लेकिन उन्होंने इसे बेस्ट डायरेक्शन के लिए भी जीता है और बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर के लिए भी उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है.

वहीं मृणाल सेन जैसे दिग्गज डायरेक्टर ने अलग-अलग श्रेणियों में कुल 18 नेशनल अवॉर्ड जीते हैं जिसमें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड भी शामिल है. हालांकि उन्हें तो विदेश से भी तमाम अवॉर्ड्स मिले हैं. ये उन्हें एक असीमित लीग में लाकर खड़ा कर देता है. लेकिन आज बात उस कलाकार ही जिसने भारत में सबसे ज्यादा नेशनल अवॉर्ड्स जीते हैं. उनके जीते कुल नेशनल अवॉर्ड्स की संख्या 37 है. अब ये अपने आप में ही उस कलाकार की असीमित प्रतिभा और श्रेष्ठता का प्रतिबिंब है. जहां एक कलाकार उम्रभर एक नेशनल अवॉर्ड की आस लिए रहता है और कइयों के लिए ये अवॉर्ड सपना बनकर रह जाता है.

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वहीं प्रतिभाशाली और हुनरमंद सत्यजीत रे इस फहरिश्त में काफी ऊपर के ओहदे में नजर आते हैं. ये बात सही है कि किसी कला को किसी अवॉर्ड के पैमाने पर नहीं तोला जा सकता. कभी कोई अवॉर्ड ना पाने वाला कलाकार भी अपनी ओर से श्रेष्ठ प्रस्तुति देता है. लेकिन फिर भी जब बात नेशनल अवॉर्ड की ही हो रही है तो क्यों आज के दिन इस नायाब फनकार को याद ना किया जाए. सत्यजीत रे ने अपने करियर के दौरान ऑस्कर समेत भारत रत्न भी जीता है.लेकिन उनकी उपलब्धियों की पिटारी में दादासाहेब फाल्के समेत 37 नेशनल अवॉर्ड भी शामिल हैं जो न सिर्फ उनकी असीम प्रतिभा का प्रमाण देते हैं बल्कि उन्हें देश का उत्तम कलाकार भी बनाते हैं. आइए 72वें नेशनल अवॉर्ड के मौके पर एक नजर डालते हैं सत्यजीत रे के नेशनल अवॉर्ड्स की फहरिश्त पर.

Satyajit Ray Director Bollywood

किन कैटेगरीज में सत्यजीत रे ने जीते 37 अवॉर्ड्स?

सत्यजीत रे ने दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड्स को मिलाकर कुल 37 नेशनल अवॉर्ड्स अपने नाम किए हैं. ये अपने आप में एक अविश्वशनीय उपलब्धि है. उन्होंने 6 बेस्ट फीचर फिल्म के अवॉर्ड्स अपने नाम किए. इसमें चारुलता, पाथेर पांचली, गोपी ज्ञाने बघा बयने, अपुर संसार और अगनतुक जैसी फिल्में शामिल है. इसके अलावा उन्होंने श्रेष्ठ डायरेक्शन के लिए 6 अवॉर्ड्स जीते जिसमें प्रतिद्वंदी, गोपी ज्ञाने बघा बयने, सोनार केला, जन अनण्य, अगनतुक और चिड़ियाखाना का नाम भी शामिल है. इसके अलावा बेस्ट फीचर फिल्म इन बंगाली की श्रेणी में उन्हें 8 बार चुना गया.

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इसके अलावा उन्हें सेकंड बेस्ट फीचर फिल्म की कैटेगरी में 3 बार और थर्ड बेस्ट फीचर फिल्म की कैटेगरी में 1 बार चुना गया. वहीं बेस्ट डॉक्युमेंट्री फिल्म की कैटेगरी में उन्हें 2 बार तो बेस्ट चिल्ड्रन्स फिल्म की कैटेगरी में उन्हें एक बार ये सम्मान दिया गया. चार बार उन्हें बेस्ट स्क्रीनप्ले की कैटेगरी में चुना गया. साथ ही उन्हें एक बार बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर की कैटेगरी में भी उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला है. सत्यजीत रे को एक बार स्पेशल ज्यूरी की कैटेगरी में भी नेशनल अवॉर्ड मिला है. वहीं अन्य अवॉर्ड्स को मिला लिया जाए तो कुल 37 नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स सत्यजीत रे ने अपने नाम किए हैं जिसके आसपास ना तो इतिहास में कोई पहुंच सका है और ना तो भविष्य में कोई पहुंच पाएगा.

Satyajit Ray Director (1)

कई इंटरनेशनल अवॉर्ड भी अपने नाम किए

सत्यजीत रे ने अपने करियर में दुनियाभर से कई इंटरनेशनल अवॉर्ड अपने नाम किए. उन्हें ऑस्कर्स की ओर से ऑनरेरी अवॉर्ड से नवाजा गया. वहीं इसके बाद एक्टर को बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में 9 बार सम्मानित किया गया. कान्स फिल्म फेस्टिवल में उन्होंने 2 बार अलग-अलग श्रेणी में अवॉर्ड्स अपने नाम किए. सान फ्रान्सिसको फिल्म फेस्टिवल में उन्होंने 4 अवॉर्ड्स जीते. वेनिस फिल्म फेस्टिवल में उन्होंने 4 अवॉर्ड्स अपने नाम किए. इसके अलावा उन्होंने मेलबर्न इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल. सिकागो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल समेत कई अन्य अवॉर्ड्स और डॉक्टरेट की उपाधियां भी सम्मान के तौर पर हासिल कीं.

मल्टीटैलेंटेड सत्यजीत रे

सत्यजीत रे सदी में एक बार आने वाले डायरेक्टर हैं. खुद विदेश के कई सारे डायरेक्टर्स उन्हें अपनी प्रेरणा मानते थे और उनके काम से काफी प्रभावित दिखे. रे ने फिल्म निर्देशन के अलावा गानों की लिरिक्स भी लिखीं. कई फिल्मों में स्क्रीनप्ले लिखा. यहां तक की उन्हें तो बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर के नेशनल अवॉर्ड से भी नवाजा गया है. मतलब वे संगीत की महीनता के भी अच्छे पारखी थे और इसमें भी उन्हें महारत हासिल थी. चाह कर भी कोई सत्यजीत रे के काम को नजरअंदाज नहीं कर सकता. वे अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जो कला जगत के लिए अपने आप में एक पाठशाला है. जो जितना गहरा डूबेगा उसे हर कदम पर कोई ना कोई कोहिनूर ही मिलेगा. ऐसे एक से बढ़कर एक मास्टरपीस देने वाले डायरेक्टर को मेरा सलाम.

पुनीत उपाध्याय

पुनीत उपाध्याय

पत्रकारिता जगत में 7 साल पूरे कर चुके पुनीत उपाध्याय रायबरेली से ताल्लुक रखते हैं. वे टीवी 9 के डिजिटल विंग में साल 2022 से सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. कला, संगीत, सिनेमा, साहित्य पर लिखने का शौक रखते हैं. साथ ही इससे जुड़ी हर छोटी, बड़ी और रोचक खबरें पाठकों तक पहुंचाते हैं. इसके अलावा वे अन्य बीट्स में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. पुनीत मानते हैं कि कला सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि उससे इतर अंतरमन से जुड़ने और समाज से रूबरू होने का एक सार्थक जरिया भी है. CSJM कानपुर युनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद पुनीत ने ITMI (इंडिया टुडे मीडिया इंस्टिट्यूट) से मास कॉम्युनिकेशन में पीजी डिप्लोमा का कोर्स किया है. पुनीत की पहली जॉब आज तक में थी जहां उन्होंने 4 साल सब एडिटर की पोस्ट पर काम किया और मनोरंजन बीट के लिए अपनी सेवाएं दीं. पुनीत की रुचि लिखने में है और वे कलम की धार से समाज में बदलाव लाने में विश्वास रखते हैं. इसके अलावा उनकी रुचि आध्यात्म, साहित्य, गायन, दर्शन, क्रिकेट और मनोविज्ञान में है.

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