Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं, नदी में बनी झील का कनेक्शन समझिए, अबतक 587 मौतें, 2500 लापता
Published: Saturday, August 29, 2026, 8:12 [IST]
Nepal Flood: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। मरने वालों की संख्या 587 पहुंच गई है, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। पहाड़ी इलाकों में राहत और रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार चल रहा है। लेकिन पहली तबाही के बाद अब एक और खतरा सामने आ गया है। भोटेकोशी नदी के ऊपरी हिस्से में पानी जमा होने से बनी अस्थायी झील ने चिंता बढ़ा दी है।
सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है, जिनसे अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। इस आपदा में करीब 320 भारतीयों और भारतीय मूल के 100 लोगों से संपर्क नहीं हो सका है। हालांकि, तिब्बत में मौजूद करीब 400 भारतीयों से संपर्क हो चुका है और वे सुरक्षित बताए जा रहे हैं। सीमा के पास फंसे 96 भारतीय भी नेपाल पहुंच चुके हैं।
Nepal Flood Disaster: आखिर इतनी बड़ी तबाही कैसे हुई?
इस बाढ़ की शुरुआत नेपाल के ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाके से हुई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, एक ग्लेशियर टूटने के बाद बर्फ, पत्थर और भारी मलबा नीचे की तरफ आया। यह मलबा लेंडे नदी में गिरा और कुछ समय के लिए पानी का रास्ता रुक गया।
इसके बाद जब यह प्राकृतिक रुकावट टूटी, तो जमा पानी के साथ मिट्टी, चट्टान और मलबे का तेज बहाव नीचे की तरफ आया। इस सैलाब ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में भारी नुकसान किया। कई गांवों के साथ सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी इसकी चपेट में आए।
2500 लोग लापता, हजारों परिवारों पर संकट
बाढ़ और मलबे ने कई इलाकों में आवाजाही पूरी तरह रोक दी है। नेपाल रेड क्रॉस के मुताबिक, 90 हजार से ज्यादा लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। कई सड़कें और पुल बह चुके हैं। ऐसे में रेस्क्यू टीमों के लिए दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हाइड्रोपावर सेक्टर को भी भारी नुकसान हुआ है। 13 जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े करीब 933 कर्मचारी लापता बताए गए हैं। इनमें 254 लोगों को बचा लिया गया है। कई कर्मचारियों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। अकेले अपर त्रिशूली-1 परियोजना से जुड़े 576 कर्मचारियों का अब तक पता नहीं चल पाया है।
Temporary Lake Nepal: नदी के बीच बनी झील क्यों बनी नई मुसीबत?
पहली बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही खतरा खत्म नहीं हुआ है। अब नदी के ऊपरी हिस्से में बनी अस्थायी झील सबसे बड़ी चिंता बन गई है। दरअसल मलबे के कारण नदी का रास्ता रुक गया और उसके पीछे पानी जमा होने लगा। सैटेलाइट तस्वीरों से इस इलाके पर लगातार नजर रखी जा रही है।
चीनी अधिकारियों के मुताबिक, झील में करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका है। अगले तीन दिनों में इसमें करीब 30 लाख क्यूबिक मीटर और पानी आने का अनुमान है। अगर पानी का दबाव ज्यादा बढ़ा और मलबे से बनी प्राकृतिक दीवार टूट गई, तो नीचे की तरफ अचानक तेज बाढ़ आ सकती है। यही वजह है कि नदी के आसपास के इलाकों में अलर्ट बनाए रखा गया है।
अभी भोटेकोशी-त्रिशूली में क्या हाल है?
शनिवार सुबह 6:30 बजे तक रसुवा की भोटेकोशी और नुवाकोट से होकर बहने वाली त्रिशूली नदी का बहाव सामान्य बताया गया है। बाढ़ पूर्वानुमान महाशाखा के मुताबिक, दोनों नदियों के जलस्तर में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है। जल वैज्ञानिक प्रभाकर यादव ने बताया कि पानी तेजी से बढ़ता हुआ नजर नहीं आ रहा है। हालांकि, तिब्बत में उस इलाके की नई स्थिति की अतिरिक्त जानकारी अभी सामने नहीं आई है, जहां से पिछला संकट शुरू हुआ था।
चीन के तिब्बत में भी भारी नुकसान
इस आपदा का असर नेपाल तक ही सीमित नहीं रहा। चीन के तिब्बत इलाके में भी बाढ़ ने बड़ा नुकसान किया है। ग्यिरोंग काउंटी में पांच लोगों की मौत और करीब 558 लोगों के लापता होने की खबर है। इनमें 260 विदेशी नागरिक बताए गए हैं। तेज बहाव से गांवों, बिजलीघरों, सड़कों, पुलों और संचार नेटवर्क को नुकसान पहुंचा है। काठमांडू और ल्हासा के बीच आने-जाने वाला रास्ता भी प्रभावित हुआ है।
भारत के लोगों को लेकर क्या अपडेट?
भारत के विदेश मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक, 320 भारतीयों और भारतीय मूल के करीब 100 लोगों से संपर्क नहीं हो सका है। इनमें करीब 100 लोग त्रिशूली जलविद्युत परियोजना से जुड़े बताए गए हैं। वहीं, तिब्बत में मौजूद करीब 400 भारतीयों से संपर्क हो चुका है और वे सुरक्षित हैं। सीमा के पास फंसे 96 भारतीय नेपाल पहुंच चुके हैं। भारत की तरफ से नेपाल के लिए राहत सामग्री की दो खेप भी भेजी गई हैं।
36 से ज्यादा पुल टूटे, 7451 सुरक्षाकर्मी रेस्क्यू में जुटे
बाढ़ में 36 से ज्यादा पुल बह गए हैं। इससे कई गांवों का संपर्क टूट गया है। प्रभावित लोगों तक खाना, दवाएं और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। नेपाल ने संपर्क बहाल करने के लिए भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज बनाने में मदद मांगी है। राहत और बचाव अभियान में सेना के 2,391 जवानों समेत कुल 7,451 सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं।
फिलहाल भोटेकोशी और त्रिशूली में पानी सामान्य है। लेकिन खतरा खत्म नहीं हुआ है। असली चिंता नदी के ऊपरी हिस्से में जमा पानी और मलबे से बनी झील को लेकर है। अगर यह प्राकृतिक बांध टूटा, तो नीचे के इलाकों में अचानक तेज बाढ़ आ सकती है। इस त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं हैं। उम्मीद है कि लापता लोगों को जल्द सुरक्षित खोज लिया जाएगा और राहत-बचाव अभियान में जुटी सभी टीमें सुरक्षित रहेंगी।