Nepal Flood: मौत गले लगाने को थी बेताब...जंगल में भागा 8 साल का बच्चा, पेड़ पर चढ़कर बचाई जान
Aug 29, 2026 03:57 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

मैटी माया तामांग ने बताया, “मुझे लगने लगा था कि मेरे दोनों बच्चे अब नहीं रहे। मैं सिर्फ रो रही थी। खुद को बिल्कुल संभाल नहीं पा रही थी।” काफी तलाश के बाद उन्हें पता चला कि उनका 8 साल का बेटा जोयाल जिंदा है।

जंगल में भागा 8 साल का बच्चा, पेड़ पर चढ़कर बचाई जान
नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बीच एक 8 साल के बच्चे ने जंगल में भागकर और पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचाई। बाढ़ के दौरान उसकी मां को डर था कि स्कूल के पानी में बह जाने से उसके दोनों बेटों की मौत हो गई होगी। लेकिन कुछ समय बाद बच्चे के सुरक्षित मिलने से परिवार को बड़ी राहत मिली। 8 साल के जोयाल घाले को बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित रसुवा जिले से हेलिकॉप्टर के जरिए सुरक्षित बाहर निकाला गया। उसके पैर में चोट लगी थी और चेहरे पर भी कट और चोट के निशान थे।
पेड़ पर चढ़कर बचाई अपना जान
जोयाल की 28 साल की मां मैटी माया तामांग अपने दोनों बेटों को ढूंढने के लिए पूरे दिन एक शरण केंद्र से दूसरे जगह और अलग-अलग राहत केंद्रों के चक्कर लगाती रहीं। वह लगातार अपने बच्चों की तलाश कर रही थीं। काफी देर तक दोनों बेटों का कोई पता नहीं चलने पर उनकी उम्मीद टूटने लगी थी। मैटी माया ने बताया कि एक समय उन्हें लगने लगा था कि शायद उनके दोनों बच्चों की बाढ़ में मौत हो गई है। हालांकि, बाद में जोयाल के सुरक्षित मिलने की खबर ने पूरे परिवार को राहत दी। बाढ़ के बीच जंगल में भागकर और पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचाने वाले इस बच्चे की कहानी अब लोगों के लिए उम्मीद की एक मिसाल बन गई है।
मां की दुआओं के आगे काल विवश
मैटी माया तामांग ने रॉयटर्स को बताया, “मुझे लगने लगा था कि मेरे दोनों बच्चे अब नहीं रहे। मैं सिर्फ रो रही थी। खुद को बिल्कुल संभाल नहीं पा रही थी।” काफी तलाश के बाद उन्हें पता चला कि उनका 8 साल का बेटा जोयाल जिंदा है। यह खबर उन्हें रॉयटर्स की पत्रकार सहाना बजराचार्य के जरिए मिली। सहाना की मुलाकात पास के नुवाकोट जिले के एक अस्पताल में जोयाल से हुई थी।
जब सहाना ने मैटी माया को बताया कि जोयाल सुरक्षित है और उसे इलाज के लिए काठमांडू ले जाया गया है, तो कुछ पल के लिए उन्हें इस बात पर भरोसा ही नहीं हुआ। मैटी माया ने कहा, “जब आपने मुझे बताया कि आपको पता है कि जोयाल कहां है, तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ। मुझे लगा था कि अब मैं अपने बच्चों को कभी नहीं ढूंढ पाऊंगी। मैंने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी।”
इस बीच उन्हें अपने छोटे बेटे के भी जिंदा होने की जानकारी मिल गई थी। दोनों बच्चों के सुरक्षित मिलने की खबर ने बाढ़ की तबाही के बीच परिवार को बड़ी राहत दी।
‘वापस मिली जिंदगी’
मैटी माया तामांग ने कहा, “जब मुझे मेरा बड़ा बेटा मिल गया, तो ऐसा लगा जैसे मेरी जिंदगी वापस लौट आई हो।” बुधवार सुबह जोयाल और उसका छोटा भाई स्कूल की गाड़ी से स्कूल गए थे। उनकी मां उस समय घर पर बैठकर बुनाई का काम कर रही थीं। तभी अचानक उन्हें भूकंप जैसी तेज आवाज सुनाई दी। कुछ ही देर में पूरे इलाके में बाढ़ का पानी फैल गया। बताया जा रहा है कि लांगटांग लिरुंग पहाड़ के पास ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया था। इसके बाद बर्फ और पत्थरों का बड़ा मलबा नीचे आया, जिससे घाटी में पानी, कीचड़ और मलबे का तेज सैलाब फैल गया। बाढ़ की खबर मिलते ही मैटी माया अपने बच्चों को बचाने के लिए स्कूल की तरफ दौड़ीं। लेकिन वहां पहुंचकर वह हैरान रह गईं। पूरा इलाका इतना बदल चुका था कि उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि स्कूल और बाजार आखिर कहां हैं। उन्होंने बताया, “आप समझ ही नहीं पा रहे थे कि स्कूल कहां है और बाजार कहां था। हर तरफ सिर्फ पानी, पत्थर और कीचड़ नजर आ रहा था।”
स्कूल से जंगल की ओर भागा
बाढ़ की वजह से स्कूल की इमारत पूरी तरह तबाह हो गई थी। लेकिन जोयाल किसी तरह वहां से निकलने में कामयाब रहा। बाद में बचावकर्मियों को उसने बताया कि जब बाढ़ आई, तब वह स्कूल में पढ़ाई कर रहा था। अचानक चारों तरफ इतना अंधेरा छा गया कि उसे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। उसने इसे “बहुत, बहुत काला” बताया। इसके बाद जोयाल स्कूल से निकलकर अपने एक दोस्त के साथ पास के जंगल की तरफ भाग गया। तेज बहाव से बचने के लिए दोनों ने पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई।
जब जोयाल से पूछा गया कि क्या उस वक्त उसे डर लगा था, तो 8 साल के बच्चे ने सिर्फ सिर हिलाकर “नहीं” कहा। उसकी यह बात बताती है कि इतनी कम उम्र में भी उसने बेहद मुश्किल हालात में कितनी हिम्मत दिखाई। जोयाल और उसका छोटा भाई उत्तरी नेपाल में आई इस भयानक आपदा से प्रभावित हजारों बच्चों में शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के मुताबिक, रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में बाढ़ से कम से कम 17 हजार बच्चे प्रभावित हुए हैं। यूनिसेफ ने बताया कि वह नेपाल सरकार के साथ मिलकर ऐसे बच्चों की पहचान और पंजीकरण कर रहा है, जो बाढ़ के दौरान अपने परिवारों से बिछड़ गए हैं। एजेंसी इन बच्चों को उनके परिवारों से मिलाने की कोशिश भी कर रही है।