No Insurance No Fuel Rule: MP में लागू होगा ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ फॉर्मूला, बिना बीमा वाले वाहनों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल
No Insurance No Fuel Rule: मध्यप्रदेश में बिना इंश्योरेंस वाले वाहन चालकों के लिए बड़ी परेशान सामने आने वाली है। बगैर वैध थर्ड पार्टी इंश्योरेंस ( Third Party Insurance) के सड़कों पर दौड़ रहे लाखों वाहनों पर सरकार शिकंजा कसने जा रही है। इसके लिए अब नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल (No Insurance No Fuel Rule) का सख्त फॉर्मूला लागू किया जाएगा।
मंत्रालय में हुई बैठक में फैसला (SC Committee on Road Safety)
सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी (Supreme Court Committee on Road Safety) के अध्यक्ष जस्टिस (रिटायर्ड) अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता में सोमवार, 31 अगस्त को मंत्रालय - वल्लभ भवन में हुई बैठक में इस नई व्यवस्था को हरी झंडी दी गई। प्रदेश में कुल रजिस्टर्ड वाहनों की संख्या करीब 1.75 करोड़ है। इनमें से करीब 35% (करीब 61 लाख) वाहन बिना वैध इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
हादसे रोकने ग्राम-वार्ड स्तर पर Committees बनेंगी
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सड़कों पर पशुओं के कारण होने वाले हादसों को रोकने ग्राम और वार्ड स्तर पर समितियां बनेंगी। इन समितियों को प्रोत्साहन राशि देकर एक्टिव किया जाएगा।
Zero Fatality District Program का दायरा बढ़ा
Road Accident में मौतों का आंकड़ा शून्य (Zero) पर लाने के मकसद से संचालित जीरो फैटिलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम (Zero Fatality District Program) का दायरा 6 से बढ़ाकर 9 जिलों तक कर दिया है। पहले से शामिल धार, सतना, रीवा, सागर, जबलपुर और खरगोन के साथ अब भोपाल, इंदौर और उज्जैन भी इसमें जुड़ गए हैं।
पेट्रोल पंप पर लगेंगे नंबर प्लेट पढ़ने वाले ANPR कैमरे
इस नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल प्रोजेक्ट के तहत पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे, जिन्हें केंद्र सरकार के वाहन पोर्टल से इंटीग्रेट किया जाएगा। जैसे ही वाहन पंप पर पहुंचेगा, कैमरे नंबर प्लेट स्कैन कर इंश्योरेंस की वैलिडिटी की जांच कर लेंगे। बगैर बीमा वाले वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा। प्रदेश में सबसे ज्यादा अन-इंश्योर्ड वाहनों वाले जिले से पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा, इसके बाद इसे पूरे मध्यप्रदेश में लागू किया जाएगा।
क्यों पड़ रही Third Party Insurance की जरूरत ?
पीड़ित को नहीं मिल पाता हर्जाना: बगैर बीमा वाले वाहन से हादसा होने पर मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (Motor Accident Claims Tribunal) का हर्जाना सीधे वाहन मालिक पर तय होता है। मालिक के पास पर्याप्त संपत्ति न होने पर पीड़ित परिवार को लम्बे समय तक मुआवजा नहीं मिल पाता।
लम्बी चलती है कुर्की की प्रोसेस: कोर्ट द्वारा मालिक की संपत्ति कुर्की के आदेश जारी होने के बाद भी राजस्व/तहसील स्तर पर यह प्रक्रिया लंबे समय अटकी रहती है। साथ की पीड़ित को बीमा कंपनी से मिलने वाला पूरा क्लेम नहीं मिल पाता।
Automatic Fitness Center पर मिली लापरवाही
सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने भोपाल बायपास स्थित ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर(Automatic Fitness Center) का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान वाहनों की जांच और पासिंग प्रक्रिया में भारी लापरवाही उजागर हुई।
टेक्नीशियन बोला पास, सिस्टम में निकली फेल
निरीक्षण में एक वाहन की फिटनेस जांच कराई गई। जस्टिस सप्रे ने पूछा तो टेक्नीशियन बोला, गाड़ी पास हो गई है। लेकिन जब उन्होंने कंप्यूटर सिस्टम पर रिपोर्ट चेक की तो गाड़ी हेडलाइट और हॉर्न में खराबी के कारण फेल दर्ज थी।
जस्टिस सप्रे ने कहा- बिना Final Report पास न करें गाड़ियां
जस्टिस सप्रे ने इस गड़बड़ी पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि बिना सिस्टम की फाइनल रिपोर्ट आए मनमाने ढंग से गाड़ियां पास न की जाएं और किसी भी सूरत में अनफिट वाहनों को फिट का सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाए।
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Ambulance Response Time16 मिनट से कम करने के निर्देश
वर्तमान में प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में गंभीर घायलों को अस्पताल पहुंचाने का औसत रिस्पांस टाइम 16 मिनट है, जिसे न्यूनतम स्तर पर लाने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग और NHM को दिए गए। इसके अलावा स्कूल-कॉलेजों में छात्रों को सड़क सुरक्षा नियमों से जोड़ने के लिए शिक्षा विभाग विशेष जागरूकता अभियान चलाएगा।
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