दिल्ली के कूड़े के पहाड़ अब बनेंगे जमीन! Okhla-Bhalswa-Ghazipur में बदली जा रही तस्वीर, CM रेखा ने बताया प्लान

By Oneindia Staff

Time Published: Monday, August 31, 2026, 11:40 [IST]

दिल्ली के बड़े-बड़े लैंडफिल साइट अब सिर्फ कूड़े के पहाड़ के तौर पर नहीं पहचाने जाएंगे। सरकार का दावा है कि ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल पर वैज्ञानिक तरीके से कचरे की प्रोसेसिंग करके जमीन को दोबारा इस्तेमाल लायक बनाया जा रहा है।

अब तक इन तीनों जगहों पर मिलाकर करीब 85 से 95 एकड़ जमीन को दोबारा फिर से इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। वहीं, साइटवार बताए गए आंकड़ों को जोड़ें तो यह करीब 100 एकड़ बैठता है। यानी लंबे समय से कूड़े के दबाव में रही जमीन को धीरे-धीरे वापस उपयोग में लाने की कोशिश हो रही है।

Delhi Landfill Reclaim

70 लाख टन कचरा हुआ प्रोसेस

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर लैंडफिल साइट्स पर चल रहे काम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ओखला लैंडफिल पर करीब 70 लाख मीट्रिक टन कचरे को प्रोसेस किया जा चुका है। इससे लगभग 35 एकड़ जमीन रिक्लेम हुई है।

सीएम के मुताबिक, यह काम किसी जल्दबाजी में नहीं बल्कि तय साइंटिफिक रोडमैप के तहत किया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार ने दिल्ली के कचरे के पहाड़ हटाने का वादा किया था और अब उसी दिशा में समयबद्ध तरीके से काम आगे बढ़ रहा है।

भलस्वा लैंडफिल: 102 लाख टन कचरे का निपटाना

भलस्वा लैंडफिल पर भी बड़े स्तर पर वेस्ट प्रोसेसिंग की गई है। सीएम रेखा गुप्ता ने बताया कि यहां करीब 102 लाख टन कचरे को साइंटिफिक प्रोसेस से हैंडल किया गया। इसके बाद करीब 45 एकड़ जमीन रिक्लेम की गई। इस बदलाव का असर सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है। लैंडफिल के आसपास रहने वाले लोगों के लिए हवा, बदबू और गन्ने के पहाड़ से जुड़ी रोजमर्रा की परेशानी कम होना भी बड़ी राहत मानी जा रही है।

गाजीपुर लैंडफिल: गन्ने से सड़क और जमीन भरने तक का इस्तेमाल

गाजीपुर लैंडफिल में करीब 44 लाख मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस किया गया। प्रोसेसिंग के बाद डिब्बा बंद सामग्री को सिर्फ हटाया नहीं गया, बल्कि उसका इस्तेमाल निचले इलाकों को भरने और सड़कों का बेस तैयार करने जैसे कामों में किया गया। यहां से करीब 20 एकड़ जमीन वापस पाने के लिए जाने की जानकारी सीएम ने दी।

रेखा गुप्ता ने कहा, "इतनी बड़ी जमीन को वापस इस्तेमाल में लाना सिर्फ सरकार की पहुंच नहीं है। असली राहत उन लोगों को मिलेगी, जो इन लैंडफिल साइट्स के आसपास रहते हैं। वहां से निकालने वालों को भी अब पहले से बेहतर तस्वीर दिखेगी और आसपास रहने वाले लोगों को बदलाव महसूस कर सकेंगे।"

चार नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स से आगे का प्लान

सरकार का अगला फोकस सिर्फ पुराने गन्ने को हटाने तक नहीं है। दिल्ली में चार नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स तैयार किए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि इनके शुरू होने के बाद रोज निकलने वाले कचरे को प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। सीएम रेखा गुप्ता के मुताबिक, लक्ष्य साफ है कि दिल्ली में दोबारा ऐसे नए कचरे के पहाड़ खड़े न हों। यानी पुराने लैंडफिल को खाली करने के साथ भविष्य में कचरे का बेहतर मैनेजमेंट करना भी प्लान का हिस्सा है।

मार्केट से कॉलोनियों तक सफाई अभियान

दिल्ली में सफाई को लेकर एक और अभियान भी शुरू किया गया है। इसमें मार्केट, सड़कें, पब्लिक पार्क और कॉलोनियों जैसे इलाकों पर फोकस किया जा रहा है। इस अभियान में MLA, पार्षद, पुलिस और सरकारी कर्मचारियों की भागीदारी रखी गई है।

खास फोकस हाशिए पर पड़े समुदायों की लाइनें और उनके आस-पास की सफाई पर है। मकसद सिर्फ सड़क या पार्क साफ करना नहीं, बल्कि लोगों को बेहतर और सम्मानजनक रहने का माहौल देना है।

यानी दिल्ली में कचरे की समस्या से निपटने का मॉडल दो हिस्सों में आगे बढ़ रहा है, पहले पुराने कचरे के पहाड़ों को साइंटिफिक प्रोसेसिंग से कम करना और फिर नए कचरे को लैंडफिल में जमा होने से रोकना। असली चुनौती अब इस पूरे सिस्टम को लगातार और तय समय के हिसाब से चलाने की होगी।