जौनपुर में शिक्षकों ने निकाली पेंशन तिरंगा यात्रा: OPS बहाली, TET अनिवार्यता और निजीकरण खत्म करने की मांग - Jaunpur News
- Hindi News
- Local
- Uttar pradesh
- Jaunpur
- Jaunpur Teachers Protest: Demand For Old Pension, TET Waiver & Privatization
अंकित श्रीवास्तव | जौनपुर22 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

जौनपुर में पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) की बहाली, शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता समाप्त करने और सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग को लेकर शुक्रवार को अटेवा पेंशन बचाओ मंच के बैनर तले शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। शाम 4 बजे से 5:30 बजे तक चले प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने ‘पेंशन तिरंगा यात्रा’ निकाली और प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मांगों पर कार्रवाई की मांग की।
अंबेडकर तिराहे से कलेक्ट्रेट तक निकली यात्रा
पेंशन तिरंगा यात्रा नगर के अंबेडकर तिराहे से शुरू हुई। यात्रा जोगियापुर, जैसीज चौराहा और रोडवेज तिराहे से होते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची। इस दौरान शिक्षकों ने ‘पुरानी पेंशन बहाल करो’ समेत कई नारे लगाए। यात्रा में बड़ी संख्या में महिला शिक्षिकाओं ने भी भाग लिया।
2004 के बाद लागू हुई NPS को बताया असुरक्षा का कारण
संगठन की अध्यक्ष इंदु यादव ने कहा कि वर्ष 2004 के बाद देश में करीब एक करोड़ शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त कर नई पेंशन व्यवस्था (NPS) लागू की गई। उन्होंने कहा कि NPS के कारण कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद अपने भविष्य को लेकर असुरक्षा महसूस हो रही है। शिक्षकों और कर्मचारियों का कहना है कि वे सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ऐसे में उन्हें बुढ़ापे में सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।

25 लाख से अधिक शिक्षकों पर TET अनिवार्यता का असर
प्रदर्शन के दौरान शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता का भी विरोध किया गया। संगठन ने कहा कि देशभर में 25 लाख से अधिक शिक्षक इससे प्रभावित हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की है, जो 20 से 25 वर्षों से सेवा कर रहे हैं। संगठन ने लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता को अव्यावहारिक बताते हुए सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की मांग की।
निजीकरण पर रोक लगाने की मांग
शिक्षकों ने सरकारी संस्थानों के निजीकरण का भी विरोध किया। उनका कहना है कि सरकारी संस्थानों के निजीकरण से जवाबदेही प्रभावित होती है और इसका सीधा असर आम जनता, युवाओं और छात्रों पर पड़ता है। संगठन ने सरकार से सरकारी संस्थानों के निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की।
अटेवा पदाधिकारियों ने कहा कि पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली, TET की अनिवार्यता समाप्त करने और सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांगों को लेकर संगठन आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेगा।
.