PAC जवान का दर्द-कुत्ता न खाए, ऐसा खाना देते हैं: बिस्तर पर सांप आते हैं; टॉयलेट खुद साफ करते हैं, बजट क्या अफसर खा रहे? - Uttar Pradesh News
‘हमें ऐसी जगह रखते हैं, जहां जानवर भी न रहें। जो कुत्ता भी न खाए, ऐसा खाना दिया जाता है। टॉयलेट तक खुद साफ करने होते हैं।’
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बाराबंकी में PAC बटालियन में तैनात जवान देवेंद्र गुप्ता यह सब कहते हुए परेशान हो जाते हैं। उनके अनुसार, कई बार ऐसी जगह भेजा जाता है, जहां साफ पानी तक नहीं मिलता। भीषण गर्मी में बिना बिजली रात गुजारनी पड़ती है।
देवेंद्र का दावा है कि बदहाल बैरक, खराब खाना और छुट्टियां नहीं मिलने से सिर्फ वो ही नाराज नहीं हैं, PAC के ज्यादातर जवान परेशान हैं। लेकिन, कोई खुलकर बोल नहीं सकता है। दैनिक भास्कर ने जवान देवेंद्र से बात की। PAC में अव्यवस्थाओं को समझने की कोशिश की।

देवेंद्र कहते हैं कि मैंने बदहाल व्यवस्थाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर डाले हैं। कई पुलिसकर्मी कमेंट में मुझे सपोर्ट कर रहे।
जवान का दावा- तबेले जैसी जगह रखा जा रहा
बाराबंकी में 9 PAC कंपनियां हैं। यहां करीब 1100 जवान तैनात हैं। देवेंद्र गुप्ता भी यहीं पर तैनात हैं। वह कहते हैं- जवानों की तैनाती पुलिस मुख्यालय में साल में सिर्फ 1-2 महीने ही रहती है। बाकी के 9-10 महीने जवानों को जिलों में अलग-अलग जगहों पर ड्यूटी के लिए भेज दिया जाता है। जहां हमें भेजा जाता है, वहां रहने की कोई व्यवस्था नहीं होती। आप जाकर देखेंगे, तो हैरान रह जाएंगे कि कोई इंसान यहां कैसे टिक सकता है। स्थिति किसी भैंस के तबेले जैसी होती है।
वह दावा करते हैं कि PAC के जवानों को शहर की सबसे जर्जर और खराब बिल्डिंग में रखा जाता है। दिन में मच्छर काटते हैं, बिस्तर पर जहरीले सांप आ जाते हैं। कमरे में चूहे, बिल्ली और बंदर घुस आते हैं। न हमारी जान की सुरक्षा है, न ही हमारे सामान की। आखिर हम क्या हैं- मशीन या जानवर?

देवेंद्र ने सोशल मीडिया पर जो वीडियो शेयर किया है, उसमें इन्हीं तस्वीरों को दिखाकर विभाग में बदहाली का दावा किया है।
‘एक भी सिपाही खुश नहीं, सस्पेंशन के डर से सब चुप हैं’
हमने पूछा- आपने अपनी परेशानियों के वीडियो बनाए। अब अनुशासनात्मक कार्रवाई का डर नहीं लग रहा?
उन्होंने कहा- यह सच है कि जो आवाज उठाएगा, अधिकारी उसे सस्पेंड कर देंगे या स्पष्टीकरण मांगेंगे। इस डर से कोई सिपाही मुंह नहीं खोलता। लेकिन, हकीकत यह है कि महकमे में एक भी सिपाही खुश नहीं है। जब अफसर जांच करने आते हैं, तो वो सिपाही की वर्दी और बेल्ट चेक करते हैं। जरा-सी कमी मिली, तो अनुशासनहीनता की कार्रवाई ठोक दी जाती है। लेकिन, जिस नरक में सिपाही रह रहा है, उसकी जांच कोई अफसर नहीं करता। इससे सिपाहियों का मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है।
देवेंद्र ने सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा- टॉयलेट और बैरक साफ करने के लिए फिनाइल और सफाई के सामान का बजट तो जारी होता होगा, फिर वह पैसा कहां जाता है?

देवेंद्र ने यह तस्वीर शेयर करते हुए कहा कि क्या अधिकारी बजट खा जा रहे हैं, जो सिपाही को टॉयलेट साफ करना पड़ता है?
‘पिता बनने पर पैटरनिटी लीव नहीं दी, छुट्टी मांगने पर रपट लिखी’
देवेंद्र गुप्ता ने भले ही वीडियो में छुट्टियों का जिक्र नहीं किया था। लेकिन, उनकी पोस्ट पर विवाद बढ़ने के बाद पीएसी, बाराबंकी की ओर से आधिकारिक रिप्लाई आया। विभाग ने बताया कि देवेंद्र ने इस साल पहले ही 25 अर्न्ड लीव (EL) और 19 कैजुअल लीव (CL) ले लिए हैं।
इस पर देवेंद्र का कहना है- मेरी पत्नी प्रेग्नेंट थी। इसी महीने उसने बच्चे को जन्म दिया। इसलिए मुझे 25 EL लेनी पड़ीं। नियमानुसार विभाग में पिता बनने पर 15 दिन की पैटरनिटी लीव (पितृत्व अवकाश) मिलती है। मैंने 15 सितंबर को इसके लिए अप्लाई किया था, लेकिन अधिकारियों ने उसे खारिज कर दिया। अगर इस साल मेरी छुट्टियां ज्यादा लग रही हैं, तो अधिकारियों को मेरी पिछले 3 साल की सर्विस देखनी चाहिए, जिसमें मैंने नाममात्र की छुट्टियां ली हैं।

देवेंद्र ने जवानों की ये तस्वीर भी शेयर की। कहा कि कई अफसर ऐसे हैं जो छुट्टी मांगने पर रपट लिख देते हैं।
‘कागजी बैठकों में सब ठीक, हकीकत में सिपाही बेहाल’
पीएसी बाराबंकी ने सफाई देते हुए लिखा कि हर महीने जवानों की समस्याओं के समाधान के लिए वेलफेयर बैठकें होती हैं। अधिकारियों से बात करके समस्याओं को सुलझाया जाता है।
इस दावे पर देवेंद्र कहते हैं- हर महीने बैठक होती है, लेकिन उसमें केवल बटालियन प्रभारी (सूबेदार/इंचार्ज) जाते हैं। वे ही सब कुछ ठीक है, यह बता देते हैं। उन्हें जमीनी समस्या दिखती है, लेकिन अफसरों के सामने बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।

देवेंद्र ने उन्हें मिलने वाले खाने की इस तस्वीर शेयर की। कहा- कागजों पर सब कुछ बहुत सुंदर दिखाया जाता है।
PAC जवान ने VIDEO बनाकर मुख्यमंत्री से न्याय मांगा
देवेंद्र गुप्ता ने 22 सितंबर को 6 मिनट 42 सेकेंड का वीडियो शेयर किया था। इसमें 5 मिनट 48 सेकेंड तक उन्होंने अपनी और अपने साथियों की व्यथा सुनाई। आखिरी के 1 मिनट 8 सेकेंड में महाभारत का एक प्रसंग जोड़ा, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण धृतराष्ट्र की सभा में न्याय मांगते नजर आ रहे हैं।
गोरखपुर क्षेत्र के रहने वाले देवेंद्र ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करते हुए कहा-

मुख्यमंत्री जी…मैं आपके ही संसदीय क्षेत्र से आता हूं। आपने प्रदेश के लाखों असहाय और गरीब लोगों की फरियाद सुनकर उनका भला किया है। अब हमें उम्मीद है कि आप हम सिपाहियों का दर्द भी सुनेंगे। पीएसी के जवान कड़कड़ाती धूप, कड़ाके की ठंड और मूसलाधार बारिश में चौबीसों घंटे ड्यूटी देते हैं। कृपया इस भ्रष्ट और जर्जर व्यवस्था में सुधार कराएं और बात-बात पर सिपाहियों का उत्पीड़न करने वाले अफसरों पर कड़ा नियम लगाएं।

देवेंद्र गुप्ता के इस वीडियो पर यूपी पुलिस और पीएसी के सैकड़ों जवानों के कमेंट्स आ रहे हैं, जो अपनी-अपनी बैरकों की बदहाली और अधिकारियों के रवैये बयां कर रहे हैं।

PAC बाराबंकी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि जवानों को सभी सुविधाएं दी जा रही हैं। किसी तरह की कोई कमी नहीं है।
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