ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने कैसे गिराए पाकिस्तान के 600+ ड्रोन? सेना के पराक्रम की Inside Story

मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण सैन्य टकराव हुआ. अप्रैल 22 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंक हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया. इसमें पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर के आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए. पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में पश्चिमी सीमा पर लहर-दर-लहर सैकड़ों ड्रोन भेजे. 

कुल 600 से अधिक ड्रोन इस्तेमाल हुए, जिनमें सस्ते कॉमर्शियल क्वाडकॉप्टर, तुर्की मूल के सोंगार और यिहा-III जैसे सुसाइड ड्रोन शामिल थे. ये ड्रोन जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात के सैन्य ठिकानों, एयरबेस और कुछ नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाने के लिए भेजे गए थे. मकसद था भारतीय हवाई रक्षा प्रणाली को सैचुरेट  करना, रडार और मिसाइल स्टॉक खत्म करना और खुफिया जानकारी जुटाना.

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ये हमले मुख्य रूप से 7-8 मई और 8-9 मई की रातों में हुए. एक लहर में लगभग 300-500 ड्रोन, दूसरी में करीब 600 ड्रोन थे. कई ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़कर रडार से बचने की कोशिश करते थे. कुछ में विस्फोटक थे, कुछ सिर्फ धोखा देने वाले थे ताकि भारत महंगी मिसाइलें खर्च करे. 

Pakistan drone attack

पाकिस्तान ने मिसाइलें भी दागीं, लेकिन मुख्य जोर ड्रोन स्वार्म पर था. यह रणनीति हाल के वैश्विक संघर्षों (जैसे यूक्रेन और मध्य पूर्व) से प्रभावित लगती थी, जहां सस्ते ड्रोन बड़ी संख्या में भेजकर महंगी रक्षा प्रणाली को थकाया जाता है.

भारत की प्रतिक्रिया: एकीकृत हवाई रक्षा ग्रिड

भारत की हवाई रक्षा ने इन हमलों को प्रभावी ढंग से रोका. आकाश सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम, एंटी-एयरक्राफ्ट गन (जैसे L-70, ZU-23, शिल्का), इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (जैमिंग और स्पूफिंग) तथा IACCS (Integrated Air Command and Control System) और आकाशतीर नेटवर्क ने मुख्य भूमिका निभाई.

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आकाशतीर भारतीय सेना का स्वदेशी कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम है. यह रडार, सेंसर और हथियारों को जोड़कर रियल-टाइम एयर पिक्चर बनाता है. यह ड्रोन, मिसाइल और अन्य खतरों को तेजी से पहचानकर ट्रैक करता है. माकूल हथियार से निपटता है. यह IAF के IACCS से जुड़ा हुआ है, जिससे सेना और वायुसेना में कॉर्डिनेशन बेहतर होता है.

Pakistan drone attack

इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ने कई ड्रोन के नेविगेशन और कंट्रोल लिंक को बाधित किया, जिससे वे बिना गोली चलाए ही गिर गए या दिशाभ्रमित हो गए. एंटी-एयरक्राफ्ट गन सस्ते और कम ऊंचाई वाले ड्रोन के खिलाफ किफायती साबित हुए. आकाश जैसी मिसाइलें अधिक खतरनाक या ऊंचे लक्ष्यों के लिए इस्तेमाल हुईं.

750 से अधिक शॉर्ट और मीडियम रेंज मिसाइल सिस्टम तथा 1000 से अधिक गन सिस्टम तैनात किए गए. नतीजा यह रहा कि अधिकांश ड्रोन हवा में ही नष्ट या बेअसर कर दिए गए. महत्वपूर्ण सैन्य या नागरिक ठिकानों को बड़े नुकसान से बचा लिया गया, हालांकि कुछ जगहों पर सीमित क्षति की खबरें आईं. एयर डिफेंस ग्रिड नहीं टूटा. 

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क्यों सफल रही भारत की रक्षा?

यह घटना आधुनिक युद्ध में ड्रोन स्वार्म की चुनौती और मल्टी-लेयर्ड डिफेंस की अहमियत दिखाती है. पाकिस्तान ने सस्ते ड्रोन की बाढ़ पर जोर दिया, लेकिन भारत ने गुणवत्ता, एकीकरण और स्वदेशी तकनीक से जवाब दिया. आकाशतीर जैसी प्रणालियों ने सेंसर फ्यूजन और ऑटोमेशन से प्रतिक्रिया समय कम किया. 

Pakistan drone attack

सॉफ्ट-किल (जैमिंग) ने महंगे हार्ड-किल (मिसाइल) का खर्च बचाया. ऑपरेशन सिंदूर भारत ने भी अपने ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन (जैसे हरोप, नागस्त्र) का इस्तेमाल किया. लंबे समय में इसने भारत को स्वदेशी ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक विकसित करने की गति तेज करने के लिए प्रेरित किया. एकीकृत नेटवर्क, स्वदेशी सिस्टम और समन्वय के कारण ग्रिड मजबूत रहा। यह भविष्य के संघर्षों में ड्रोन खतरे से निपटने का महत्वपूर्ण सबक देता है.

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