Pakistan Crisis: पाकिस्तान में फिर होगा तख्तापलट! राष्ट्रपति जरदारी और प्रधानमंत्री के बीच छिड़ी भयंकर जंग

Time Published: Friday, August 7, 2026, 14:29 [IST]

Pakistan Judicial Crisis: पाकिस्तान में हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति को लेकर नया संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और संघीय सरकार आमने-सामने नजर आ रहे हैं। ज्यूडिशियल कमीशन ऑफ पाकिस्तान (JCP) की सिफारिश के बावजूद राष्ट्रपति ने अब तक नियुक्तियों से जुड़ी समरी को मंजूरी नहीं दी है।

ऐसे में सरकार राष्ट्रपति की औपचारिक स्वीकृति के बिना ही जजों की नियुक्ति का नोटिफिकेशन जारी करने पर विचार कर रही है। इस मामले ने राजनीतिक और कानूनी बहस को तेज कर दिया है। वहीं, इस्लामाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हैं।

Pakistan Judicial Crisis

राष्ट्रपति और सरकार के बीच क्यों बढ़ा टकराव?

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में ज्यूडिशियल कमीशन ऑफ पाकिस्तान (JCP) ने हाई कोर्ट में 19 अतिरिक्त जजों की नियुक्ति की सिफारिश की थी। इसके अलावा कुछ अतिरिक्त जजों की सेवा पक्की करने और एक जज का कार्यकाल बढ़ाने का भी प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अब तक इस समरी को मंजूरी नहीं दी। इसी वजह से कानून मंत्रालय नियुक्तियों का नोटिफिकेशन जारी नहीं कर पाया और अब सरकार वैकल्पिक रास्ते पर विचार कर रही है।

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संविधान क्या कहता है, सरकार का क्या तर्क है?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 48(1) के तहत राष्ट्रपति को समरी मिलने के दो सप्ताह के भीतर फैसला लेना होता है। सरकार का दावा है कि यह समय सीमा समाप्त हो चुकी है, इसलिए अब वह संवैधानिक प्रावधानों के तहत खुद नियुक्तियों का नोटिफिकेशन जारी कर सकती है। हालांकि, राष्ट्रपति कार्यालय का कहना है कि ऐसी कार्रवाई संवैधानिक प्रक्रिया को कमजोर करेगी और इससे राजनीतिक व कानूनी संकट पैदा हो सकता है।

देरी का न्यायपालिका पर क्या असर पड़ा?

नियुक्तियों में देरी का असर पाकिस्तान की न्यायपालिका पर साफ दिखाई देने लगा है। पेशावर हाई कोर्ट के चार अतिरिक्त जज 4 अगस्त को कार्यकाल समाप्त होने के बाद पद छोड़ चुके हैं। वहीं सिंध हाई कोर्ट के एक जज भी 29 जुलाई को पदमुक्त हो गए। खाली पदों की वजह से अदालतों के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर इस्लामाबाद हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की गई, जिस पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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अगले 48 घंटे क्यों हैं अहम?

वकील लुकमान जफर चौधरी ने राष्ट्रपति को नियुक्तियों की समरी मंजूर करने का निर्देश देने की मांग करते हुए इस्लामाबाद हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि JCP की सिफारिशों के 15 दिन से अधिक समय बीत चुका है। मीडिया रिपोर्टों के हवाले से यह भी कहा गया कि सरकार अगले 48 घंटों में जजों की नियुक्ति का नोटिफिकेशन जारी कर सकती है। ऐसे में अब सभी की नजर सरकार और अदालत के अगले कदम पर टिकी है।