सम्राट को चुनौती और तेजस्वी के लिए मुसीबत... PK अब सबके लिए सिरदर्द!

बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार चल रही है. 243 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए के विधायकों की संख्या 201 है और यह बहुमत के आंकड़ा से काफी ज्यादा है और सरकार को कोई खतरा नहीं है. नितिन नवीन के राज्यसभा में जाने और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद एक विधानसभा सीट बांकीपुर पर उपचुनाव हुए. बांकीपुर सीट पर भाजपा का तीन दशकों से कब्जा था, लेकिन सोमवार को उपचुनाव के परिणाम ने भाजपा का किला ध्वस्त कर दिया और पहली बार चुनाव लड़ रहे जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा के उम्मीदवार नीरज सिन्हा को पराजित कर जीत हासिल की.

बिहार विधानसभा चुनाव में एक सीट भी हासिल करने में असफल रहे प्रशांत किशोर ने भाजपा के उम्मीदवार को पराजित कर विधायिका में एंट्री की है. हालांकि संख्या की दृष्टि से देखा जाए तो 243 सीटों वाली विधानसभा में प्रशांत किशोर जन सुराज पार्टी के एक मात्र विधायक होंगे, लेकिन उनकी जीत ने केवल सीएम सम्राट चौधरी और भाजपा की ही टेंशन नहीं बढ़ाई, बल्कि कांग्रेस और राजद के महागठबंधन और राजद नेता तेजस्वी यादव के लिए भी वह बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं. आइए जानते हैं कि प्रशांत किशोर की जीत से कैसे सम्राट चौधरी और बीजेपी की टेंशन बढ़ गई है और तेजस्वी की परेशानी.

पहले ही टेस्ट में फेल रहे सम्राट चौधरी

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही महीनों के अंदर बांकीपुर उपचुनाव हुए. उनके नेतृत्व में भाजपा का पहला बड़ा चुनावी टेस्ट था. वहीं, नितिन नवीन के राष्ट्रीय राजनीति में शिफ्ट करने के बाद भाजपा के संगठन की परीक्षा थी, लेकिन सम्राट चौधरी और बिहार भाजपा दोनों ही पहले टेस्ट में फेल रहे और प्रशांत किशोर ने जीत हासिल की.

दो सालों तक बिहार दौरे के बाद 2024 में प्रशांत किशोर ने जन सुराज को एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर लॉन्च किया था. राजनीतिक सलाहाकार के बाद राजनीति में उनका यह पहला कदम था, लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में राज्य की जनता ने उसे खारिज कर दिया, लेकिन प्रशांत किशोर जिस शिद्दत से अपने अभियान में जुटे रहे और जीत हासिल की. यह उपचुनाव उनके लिए अग्निपरीक्षा थी, जिसमें वह सफल रहे, लेकिन उनकी सफलता ने सत्तारूढ़ पार्टियों के साथ-साथ विपक्ष की भी चुनौती बढ़ा दी है.

तेजस्वी के लिए चुनौती, विपक्ष को मिली नई आवाज

वास्तव में बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत विपक्ष की जीत है. अभी तक बिहार में विपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पांच पार्टियों का महागठबंधन था. इस महागठबंधन में कांग्रेस से लेकर लेफ्ट तक शामिल हैं, लेकिन 2025 के बिहार चुनाव के बाद जिस तरह से तेजस्वी यादव की स्थिति रही है. चुनाव के बाद उन्होंने शपथ ग्रहण किया और विदेश चले गये.

बांकीपुर नितिन नवीन की सीट थी और सम्राट के सीएम रहते पहला चुनाव हो रहा था, लेकिन तेजस्वी यादव विदेश की सैर करते रहे और अंतिम समय में आए. जिस प्रशांत किशोर को आरजेडी बीजेपी की ‘बी’ टीम कहकर खारिज कर रही थी, उसी प्रशांत किशोर ने बीजेपी को उनके अभेद किला में पराजित किया.

इससे जनता में संदेश जाएगा कि प्रशांत किशोर विपक्ष की आवाज बनेंगे. पहले भी बोल्डली वह सरकार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं. तेजस्वी यादव का सदन से गायब रहना और पार्टी के प्रचार में शिथिलता अब उन पर भारी पड़ने वाली है. चुनाव से पहले ऐसा माना जा रहा था कि प्रशांत किशोर को विपक्षी पार्टियों का साथ मिलेगा, लेकिन आरजेडी उनके खिलाफ उम्मीदवार उतारी और महागठबंधन का भी साथ नहीं मिला. ऐसे में पीके ने अकेले जीत हासिल कर विपक्षी में अपनी कुर्सी मजबूत कर ली है, जो तेजस्वी के लिए बड़ी चुनौती होगा.

सम्राट चौधरी पर प्रशांत का हमला और होगा तेज

प्रशांत किशोर पढ़े-लिखे होने के कारण बोलने वाले आदमी हैं और राजनीतिक सलाहाकार होने की वजह से राजनीतिक समझ भी है. कई पार्टियों की योजना बनाई और कई पार्टियों को सत्ता तक पहुंचा चुके हैं. उन्हें हर घर की कहानी मालूम है.

बांकीपुर विधानसभा चुनाव प्रशांत किशोर ने एक कुशल रणनीतिकार के रूप में लड़ा. प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार के शुरू से ही सम्राट चौधरी पर निशाना साधते रहे. उन्होंने नितिन नवीन, पीएम मोदी और अमित शाह के बारे में कुछ नहीं बोला. सम्राट चौधरी को अपराधी सीएम करार देते रहे. इससे बीजेपी में सम्राट विरोधी खेमे के जो लोग थे, नितिन नवीन के समर्थक भी, जो नाराज थे, उनकी ओर मुखातिब हुए.

बांकीपुर में जीत के बाद भी प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी पर निशाना साधा और कहा कि बीजेपी को सम्राट चौधरी जैसे अपराधी सीएम को हटाना चाहिए और यह कहा कि यदि एनडीए नहीं सुधरी तो इसी तरह के परिणाम होंगे और अपनी जीत का श्रेय भी सम्राट चौधरी को ही दे दिया. इससे साफ संकेत है कि बिहार में अब अगली लड़ाई उनकी सम्राट चौधरी से होने वाली है और विधानसभा के बाहर और अंदर दोनों जमकर घमासान मचेगा.

MY से लेकर जाति की सियासत तक… बदलाव के संकेत

बांकीपुर विधानसभा चुनाव में जिस तरह से मुस्लिमों ने प्रशांत किशोर को समर्थन किया. उससे बिहार की सियासत में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. मुस्लिम बिहार के साथ-साथ पूरे देश के मुस्लिम विकल्प की तलाश कर रहे हैं. फिलहाल मुस्लिम आरजेडी या इंडिया ब्लॉक के साथ थे, लेकिन ओवीसी की पांच सीटों पर जीत ने यह संकेत पहले ही दे दिया था कि अब मुस्लिमों का आरजेडी पर भरोसा नहीं है. इंडिया ब्लॉक पर भोरास नहीं है.

बिहार में पहला चुनाव जाति के समीकरण से बाहर होकर लड़ा गया है, लेकिन प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी पर हमला बोला, क्योंकि सम्राट चौधरी पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं और इस चुनाव में प्रशांत किशोर को अगड़ी जाति के लोगों का समर्थन मिला, जो बीजेपी का जनाधार रहा है. प्रशांत किशोर जनता के मुद्दों पर वोकल होते हैं. अभी चार साल चुनाव के बाकी हैं. ऐसे में बिहार विधानसभा में प्रशांत किशोर की एंट्री से नया समीकरण बन सकता है, तो बिहार की सियासत को नई दिशा दे सकता है.

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अजय विद्यार्थी

अजय विद्यार्थी

कलकत्ता यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रैजुएशन. प्रभात खबर में बतौर सीनियर न्यूज़ एडिटर काम किया. ग्राउंड रिपोर्टिंग और एडिटिंग में करीब 20 सालों से ज्यादा का अनुभव. राजस्थान पत्रिका में चीफ रिपोर्टर रहने के दौरान कई ऐसी स्टोरी की, जिन्हें सराहा गया.

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