सोशल मीडिया पर PM नरेंद्र मोदी का जन्मदिन, तेल कम इस्तेमाल के बीच लाखों दिए जले, स्कूल और बाढ़ के मूद्दे?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो साभार: नरेंद्र मोदी फ़ेसबूक पेज)                

आज 17 सितंबर है, आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। इस मौके पर देशभर में अलग-अलग कार्यक्रम किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री के जन्मदिन की खुशी में स्कूलों और सरकारी भवनों में दिए जलाए जा रहे हैं। इसके लिए कई राज्यों में बाकायदा नोटिस जारी कर स्कूलों और सरकारी भवनों में ‘आशीर्वाद का दिया’ जलाने की बात कही गई है।

फोटो साभार: एक्स

प्रधानमंत्री का जन्मदिन मनाना लोगों की अपनी पसंद है। लोग अपने घरों में दीये जलाएं, मिठाई बांटें या सोशल मीडिया पर बधाई दें, यह उनकी इच्छा है। लेकिन स्कूल और सरकारी भवन किसी एक व्यक्ति के जन्मदिन के लिए इस्तेमाल किए जाएं, तो यह बात अलग हो जाती है। स्कूल बच्चों की पढ़ाई की जगह हैं और सरकारी भवन जनता के काम के लिए बनाए गए हैं।

फोटो साभार: एक्स

थोड़ा सा याद करें तो ये पूरा आयोजन कोरोना के समय की याद भी दिलाता है। उस समय प्रधानमंत्री की अपील पर देशभर में लोगों से ताली और थाली बजाने को कहा गया था। बाद में लोगों से दिए और मोमबत्तियां जलाने की अपील भी की गई थी। उस समय इसे कोरोना के खिलाफ एकजुटता दिखाने की पहल के तौर पर रखा गया था। 

आज फिर बड़ी संख्या में दिए जलाने की अपील सामने है। फर्क इतना है कि इस बार ये आयोजन प्रधानमंत्री के जन्मदिन के मौके पर हो रहे हैं। इस बार तो स्कूलों में भी दिए जलाने को कहा गया है। बताइए क्या सरकारी स्कूलों और भवनों को ऐसे आयोजनों से दूर नहीं रखा जाना चाहिए? खासकर तब, जब इन जगहों का इस्तेमाल किसी व्यक्ति विशेष के सम्मान के लिए किया जा रहा हो।

बाढ़ से प्रभावित लोगों के घर आग नहीं जन्म दिन पर लाखों दिए जले 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सोशल मीडिया उनके बधाई संदेशों से भरा हुआ है। कहीं उनके पुतले को लड्डू खिलाए जा रहे हैं, कहीं दूध चढ़ाया जा रहा है और कहीं हवन किए जा रहे हैं। बड़े-बड़े नेता भी उन्हें जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की तरफ से हवन कराया गया और रक्तदान भी किया गया। (ये रक्तदान भी PM नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। ‘सेवा संकल्प यात्रा’ नाम का एक अभियान शुरू किया गया है।) 

रक्तदान एक अच्छा काम है। हवन भी लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। लेकिन यही काम उन लोगों के लिए भी किया जा सकता था जो बाढ़ में अपनी जान गंवा गए। जिनकी इमारत गिरने से मौत हो रही है या जो कारखानों में जलकर मर गए। या फिर उनके लिए जो सेप्टिक टैंक में काम के दौरान ज़हरीली गैस से मर गए। या फिर उनके लिए जो बालाघाट में बैगा समुदाय के बच्चे मारे गए। 

इस समय बिहार भी बाढ़ की मार झेल रहा है। लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं। कई परिवारों के घरों में खाना बनाने के लिए चूल्हा तक नहीं जल पा रहा है। ऐसे समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में लाखों दिए जल रहे हैं। एक तरफ तेल और गैस की बढ़ती कीमतों का असर गरीब परिवारों के सर पर मानों पहाड़ बन कर खड़ा हो। दूसरी तरफ इतने बड़े स्तर पर दीयों में तेल का इस्तेमाल हो रहा है। कितने तेल का इस्तेमाल हुआ होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है? याद ही होगा प्रधानमंत्री द्वारा ही तेल कम खाने और सोना न ख़रीदने की बात कही गई थी। ये बात 10 मई 2026 को तेलंगाना  आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा गया था। 

जो सामान और चढ़ावा प्रधानमंत्री की तस्वीर के सामने इस्तेमाल किया जा रहा है, क्या उसे स्कूलों के मध्यान भोजन में नहीं लगाया जा सकता था?, बाढ़ से प्रभावित परिवारों तक नहीं पहुंचाया जा सकता था? शायद इससे उन लोगों के लिए ज्यादा मदद होती जिन्हें इस समय इसकी जरूरत है।

सोशल मीडिया बना प्रचार का माध्यम 

देखो इन सब में जिसका सबसे बड़ा रोल है वो है सोशल मीडिया। इस पूरे आयोजन में सोशल मीडिया एक बड़ा माध्यम बना हुआ है। लोग अलग-अलग तरह के वीडियो बनाकर प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं। नेता, फ़िल्मी सितारे के लोग, आम लोग और कई दूसरे जाने-पहचाने चेहरे उनके लिए संदेश जारी कर रहे हैं।

डिजिटल मीडिया, प्रिंट और टीवी के जरिए भी प्रधानमंत्री की लोकप्रियता और उनके प्रति समर्थन की तस्वीर लगातार दिखाई जा रही है। इससे ये मैसेज जाता है कि नरेंद्र मोदी को छोटे बच्चों से लेकर बड़े उद्योगपतियों तक हर वर्ग के लोग पसंद करते हैं और उनका सम्मान करते हैं। 

जब किसी समुदाय या किसी पसंदीदा व्यक्ति को प्रधानमंत्री की तारीफ करते हुए दिखाया जाता है तो उसका असर भी पड़ता है। लोग कह सकते हैं, देखो ये भी मोदी जी की तारीफ कर रहे हैं।

सोशल मीडिया, टीवी, डिजिटल मीडिया और प्रसिद्ध लोगों के जरिए लगातार तारीफ जन्मदिन जैसे जुड़े मूद्दे दिखाए जाने से उनकी एक खास छवि लोगों तक पहुंचती है। इसे राजनीति में प्रचार और छवि बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा सकता है।

सोशल मीडिया में कहीं जन्म दिवस की बधाई तो कहीं तंज 

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिन पर हवन करवाया गया। 

VIDEO | Delhi: CM Rekha Gupta attends 108 Kundiya Yajna on the occasion of Prime Minister Narendra Modi’s 76th birthday.

(Full video available on PTI Videos – https://t.co/d8jp61yd2p) https://t.co/OcxlsIhC1c

— Press Trust of India (@PTI_News) September 17, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिन पर नमामि गंगा कार्यकर्ताओं ने वाराणसी के समने घाट पर गंगा में 76 मीटर लंबी चुनरी अर्पित की। समारोह में आरती, वैदिक मंत्रों का जाप और प्रधानमंत्री के दीर्घायु के लिए प्रार्थनाएं शामिल थीं। इस दौरान ‘बार बार ये दिन आए, तुम जियो हजारों साल’ गीत भी बजाया गया।

On Prime Minister Narendra Modi’s 76th birthday, Namami Gange workers offered a 76-meter-long chunari to the Ganga at Samne Ghat in Varanasi. The ceremony included aarti, Vedic chants and prayers for the Prime Minister’s long life. The song ‘Bar Bar Ye Din Aaye, Tum Jiyo Hazaron Saal’ also played during the event.

#PMmodi #HappyBdayPMModi

— Khabar Lahariya (@KhabarLahariya) September 17, 2026


तेजस्वी यादव ने एक्स अकाउंट में पोस्ट कर लिखा है कि “सरकारी आदेश वाला जबरन Happy Birthday to Modi Ji!देश में ऐसा पहली बार हुआ है जब मार्गदर्शक मंडल की आयु सीमा पार कर चुके किसी प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर सरकारी आदेश निकाल 100 करोड़ के सरकारी खर्च पर स्कूलों, सरकारी भवनों और सार्वजनिक स्थलों जैसे सड़क, पुल, पार्क इत्यादि पर दीये जलाना कानूनी तौर पर अनिवार्य कर दिया गया है।

शिक्षक अब अध्यापन नहीं बल्कि छुट्टी के दिन, रात 7-8 बजे स्कूल पहुंच, दीये जलाकर उनकी रखवाली करेंगे तथा UPSC पास नौकरशाह मोदी जी का स्तुतिगान कर अब अंधभक्ति वाला सबसे difficult पेपर पास कर आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करेंगे।”

सरकारी आदेश वाला जबरन Happy Birthday to Modi Ji!

देश में ऐसा पहली बार हुआ है जब मार्गदर्शक मंडल की आयु सीमा पार कर चुके किसी प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर सरकारी आदेश निकाल 100 करोड़ के सरकारी खर्च पर स्कूलों, सरकारी भवनों और सार्वजनिक स्थलों जैसे सड़क, पुल, पार्क इत्यादि पर दीये जलाना कानूनी तौर पर अनिवार्य कर दिया गया है।

शिक्षक अब अध्यापन नहीं बल्कि छुट्टी के दिन, रात 7-8 बजे स्कूल पहुंच, दीये जलाकर उनकी रखवाली करेंगे तथा UPSC पास नौकरशाह मोदी जी का स्तुतिगान कर अब अंधभक्ति वाला सबसे difficult पेपर पास कर आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करेंगे।

— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) September 17, 2026


वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आज काशी विश्वनाथ मंदिर में एक विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू उपस्थित थे।

On Prime Minister Narendra Modi’s 76th birthday, Namami Gange workers offered a 76-meter-long chunari to the Ganga at Samne Ghat in Varanasi. The ceremony included aarti, Vedic chants and prayers for the Prime Minister’s long life. The song ‘Bar Bar Ye Din Aaye, Tum Jiyo Hazaron Saal’ also played during the event.

#PMmodi #HappyBdayPMModi

— Khabar Lahariya (@KhabarLahariya) September 17, 2026


तारीफ के बीच आलोचना और सवालों की कितनी जगह है?

लोकतंत्र में किसी नेता की तारीफ करने या न करने की आजादी है। उसी तरह उसकी नीतियों पर सवाल उठाने और अपनी असहमति रखने की आजादी भी होनी चाहिए। पत्रकारों का काम सिर्फ सरकार और प्रधानमंत्री की तारीफ दिखाना नहीं है। सरकार से सवाल करना, उसकी नीतियों का असर देखना और जनता की समस्याओं को सामने रखना भी पत्रकारिता का हिस्सा है।

दूसरी पार्टियों के समर्थकों और आम लोगों को भी सरकार की नीतियों पर सवाल करने का अधिकार है। अगर मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर सिर्फ सरकार और प्रधानमंत्री की तारीफ दिखाई जाती है, तो दूसरी आवाजों के लिए जगह कम हो जाती है और लोगों तक एक ही तरह की तस्वीर पहुंचती है।

इसका असर उन पत्रकारों और लोगों पर पड़ता है जो सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना चाहते हैं। लोकतंत्र में अलग-अलग राय और आवाजों का सामने आना भी जरूरी है।

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